अंतरजातीय विवाह: 'मेरे पिता ने मेरे पति को मारा और मुझे ज़िंदा लाश बनाकर छोड़ दिया'

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- ........से, सुपौल
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
दोपहर के 11 बज रहे थे. मैं सुपौल के पिपरा प्रखंड के तुलापट्टी गांव पहुंची थी. गुनगुनी धूप निकली थी और लोग अपने घरों के बाहर बैठे उसका मज़ा ले रहे थे.
लेकिन तुलापट्टी में ही एक छोटे से अंधेरे कमरे में एक 20 साल की लड़की कंबल में सिमटी सोने की कोशिश कर रही थी. उसके ससुर उसको पुकारते हैं, "तनु बेटा, तुमसे कोई मिलने आया है."
दो-तीन बार पुकारने पर वह कंबल हटाती हैं. उनकी आंखों में आंसू हैं और हाथ में टैब जिस पर उनके पुराने ख़ुशनुमा दिनों का वीडियो चल रहा है.
यह तनुप्रिया हैं, जिनके पति राहुल की गोली मारकर हत्या करने का आरोप उनके अपने पिता पर है.
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वह एक दुबली पतली लड़की हैं, जिनकी बड़ी-बड़ी आंखें उनके जीवन में मौजूदा पीड़ा की गवाही देती हैं. वह सुबह जल्दी नहीं उठना चाहतीं. वह देर तक सोना चाहती हैं ताकि ज़िंदगी का एक और दिन किसी तरह से गुज़र जाए.
तनुप्रिया की कहानी भारत में एक लड़की के ख़ुद के जीवन से जुड़े फ़ैसले लेने, जातीयता की जकड़न और पितृसत्ता की पकड़ में उलझे समाज की कहानी कहती है.
तनुप्रिया और राहुल की प्रेम कहानी

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तनुप्रिया बिहार के सहरसा के बनगांव की रहने वाली हैं वहीं राहुल सुपौल के तुलापट्टी गांव के रहने वाले थे.
तनुप्रिया की शुरुआती पढ़ाई सहरसा में ही हुई. पढ़ाई में तेज़ तनुप्रिया, प्रेमशंकर झा और गुंजन कुमारी की सबसे बड़ी बेटी हैं.
प्रेम शंकर झा की दवाइयों की दुकान है और गुंजन कुमारी सरकारी स्कूल में संस्कृत पढ़ाती हैं. तनुप्रिया के दो छोटे भाई हैं.
तनुप्रिया की राहुल कुमार से मुलाकात दरभंगा मेडिकल कॉलेज में हुई.
राहुल सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे. दसवीं तक पढ़े उनके पिता गणेश मंडल खेती करते हैं और बारहवीं तक पढ़ी मां अनीता देवी गृहिणी हैं.
'मंडल' बिहार में अति पिछड़ी जाति समूह में आते हैं.

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राहुल और तनुप्रिया दोनों ही दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बीएससी नर्सिंग कर रहे थे.
तनु बताती हैं, "राहुल मुझसे एक साल सीनियर था. मेडिकल प्रोफ़ेशन में सीनियर जूनियर का इंटरेक्शन ज़्यादा होता है, इसलिए मेरी राहुल से दोस्ती हो गई. वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था. कॉलेज में सभी लोग यह देखकर आश्चर्य करते थे कि हमारे बीच कभी कोई लड़ाई क्यों नहीं हुई."
राहुल, तनुप्रिया को पढ़ाई लिखाई में मदद करता था. लेकिन दोनों के बीच असल में बुलेट ने नजदीकियां बढ़ाईं.
राहुल के पास बुलेट थी और तनु को बुलेट चलाने का शौक था. आज भी तनु के इंस्ट्राग्राम पर राहुल के साथ बुलेट चलाते कई वीडियो हैं.
तनुप्रिया उनको दिखाते हुए चहक उठती हैं. वह कहती हैं, "हम दोनों साथ-साथ पढ़ते और घूमते थे. डेटिंग जैसा कुछ नहीं था. हम बुलेट से मंदिर जाते. मैं एक ब्राह्मण परिवार से आती हूं और मेरे पति ईबीसी (अति पिछड़ा) से आते थे. कॉलेज में बहुत लोगों को यह पसंद नहीं आया. मेरे पिता प्रेमशंकर झा तक यह बात पहुंचा दी गई कि मेरा अफ़ेयर तथाकथित निचली जाति के लड़के से चल रहा है."

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तनुप्रिया और राहुल के बीच दोस्ती की सूचना परिवार तक पहुंच चुकी थी.
तनुप्रिया बताती हैं कि बीते साल (2025) 27 मार्च को वह अपने घर बनगांव गई तो परिवार वालों ने उनको प्रताड़ित करना शुरू कर दिया.
तनुप्रिया ने कहा, "उन लोगों ने दबाव बनाया कि मैं राहुल पर रेप का केस फ़ाइल करूं. लेकिन जब उसने मुझे ग़लत तरीक़े से छुआ तक नहीं तो मैं ऐसा कैसे कर सकती थी. आप किसी से फ्रेंडशिप करते हैं तो इसका मतलब यह तो नहीं कि आप पर कोई प्रेशर पड़े और आप अपने दोस्त का करियर बर्बाद कर दें."
तनुप्रिया कहती हैं, "मेरे मना करने पर घरवालों में मुझे मारना शुरू कर दिया. जब मेरे लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया तब मैनें इंस्टा के जरिए राहुल को मैसेज़ भेजा कि मुझे बचा लें. मेरे पास फ़ोन नहीं था और लैपटॉप पर इंस्टा ही एक तरीक़ा था जिससे मैं राहुल से संपर्क कर सकती थी."
तनुप्रिया ने राहुल की मदद से अपना घर छोड़ दिया. दोनों ने अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचा और फिर सोच-समझ कर शादी का फ़ैसला लिया.
तनुप्रिया बताती हैं, "हमने लखीसराय के अशोकधाम में शादी की और सुपौल कोर्ट में शपथ पत्र वगैरह भी बनवा लिया. फिर बनगांव पुलिस स्टेशन में भी मेरा 161 और 164 का स्टेटमेंट हुआ कि मैंने यह शादी अपनी मर्ज़ी से की है."
वह कहती हैं, "शादी के बाद मैं डीएमसीएच आ गई. मैं बीएससी नर्सिंग के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी करने लगी. राहुल ने मेरे लिए टैब ख़रीदा और कहा, बस पढ़ाई करो. 5 अगस्त को भी उसने कहा था कि तुम पॉलिटिकल साइंस का चैप्टर कंप्लीट कर लेना. मैंने कहा था कि शाम में कर लूंगी, लेकिन वह शाम कभी आई ही नहीं."
पांच अगस्त को क्या हुआ था?
पांच अगस्त को क्या हुआ था?
इस सवाल पर तनु प्रिया कुछ रूक कर कहती हैं, "उस दिन मंगलवार था. सोमवार को मेरा व्रत था और हम मंदिर गए थे. सुबह-सुबह प्रसाद खाकर मैंने पारण किया. हमने साथ में नाश्ता किया और खाना वगैरह खाकर मैं कॉलेज गई. शाम को मैं कैंटीन जा रही थी तब हम दोनों ने एक दूसरे को सामने से देखा. मैंने देखा कि एक आदमी मास्क लगाकर आया है. वह राहुल से बार-बार पूछ रहा था कि यह किसका बुलेट है."
वह कहती हैं, "राहुल उसको मास्क हटाने के लिए बोल रहे थे. तभी उसने कट्टा निकाला और उसको शूट कर दिया. राहुल मेरी तरफ दौड़े और मैं उनकी तरफ. वह मेरी गोदी में आकर गिर गए. हम लोग उनको इमेरजेंसी वार्ड ले गए. प्रेमशंकर झा को दूसरे स्टूडेंटस ने पकड़ लिया था. उनका मास्क हटा तो देखा कि वह मेरे पापा हैं. माई फादर किल्ड माई हसबैंड."
नर्सिंग कॉलेज में इस घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई थी. वहां मौजूद छात्रों ने प्रेम शंकर झा यानी तनुप्रिया के पिता को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी.
बाद में स्थानीय पुलिस ने प्रेम शंकर झा को इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलज हॉस्पिटल भेजा था.
तनुप्रिया उस वक़्त को याद करते हुए कहती हैं, "जिनसे प्यार करते (तनुप्रिया के पिता) हैं वो आकर आपके हसबैंड को मार दें, इसलिए कि वो आपकी जाति ट का नहीं था. क्या जाति ही सब कुछ होती है. जो उच्च जाति के वही अच्छे हैं? और बाक़ी सबका खून अशुद्ध. अगर ऐसा है तो अस्पताल में क्यों नहीं देखते कि खून किस जाति के आदमी का चढ़ रहा है. कोई यह क्यों नहीं कहता कि उसे सिर्फ़ उसके गोत्र वाले का खून चाहिए?"
दरभंगा में यह घटना बेंता थाना के इलाके में हुई थी. राहुल कुमार के पिता गणेश मंडल की ओर से दर्ज़ प्राथमिकी में चार नामजद अभियुक्त हैं. प्रेमशंकर झा, गुंजन कुमारी और उनके दोनों बेटे. ये सभी तनुप्रिया के माता-पिता और भाई हैं.
दरभंगा जेल में बंद प्रेमशंकर झा की ज़मानत याचिका को बीती नवंबर में सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्र की अदालत ने ख़ारिज कर दिया था.
लोक अभियोजक अमरेन्द्र नारायण झा ने बीबीसी को बताया, "प्रेमशंकर झा की नियमित ज़मानत याचिका को ख़ारिज़ कर दिया गया था और इस मामले में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया गया है."
वहीं इस मामले में अन्य अभियुक्तों के बारे में पूछने पर बेंता थाना प्रभारी हरेन्द्र कुमार ने बीबीसी को बताया, "इस मामले में गुंजन कुमारी को पटना हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है और बाकी दो अभियुक्तों की संलिप्तता पर जांच चल रही है."
तनुप्रिया कहती हैं, "ठीक ढंग से जांच ही नहीं हो रही है. गुंजन कुमारी को ज़मानत मिल गई. दोनों भाई खुले आम घूम रहे हैं. आप ठीक से जांच कीजिएगा तभी पता चलेगा न कि कौन-कौन से लोग इस साज़िश में शामिल थे. कोई भी आकर कॉलेज परिसर में गोली चला देता है. हम किस बारबेरिक सिस्टम में जी रहे हैं जहां संविधान, कानून नाम की कोई चीज़ ही नहीं है."
'अब यही मेरा बेटा है'

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राहुल की मौत के बाद तुलापट्टी स्थित उनका घर भी एक झटके में बिखर गया है. घर में एक अनकही चुप्पी पसरी है.
तनुप्रिया के कमरे के दरवाज़े की सिटकनी पर ताला लगा दिया गया है ताकि वह अपना कमरा अंदर से लॉक न कर सके.
तनुप्रिया कहती है, "इन लोगों को डर है कि हम कुछ कर लेंगे. इसलिए अंदर से कभी दरवाजा बंद नहीं करने देते. मुझे सिर्फ़ चाय बनानी आती है. ये लोग दिन भर मेरे पीछे लगे रहते हैं कि मैं कुछ खा लूं. आज तक इन लोगों ने कभी मुझसे बुरा बर्ताव नहीं किया. कोई नहीं कहता कि मेरी वजह से इनका बेटा चला गया. बिहार के ऐसे अंदरूनी गांव में आप किसी बहु को क्या शर्ट-पैंट पहने देखती हैं?"
राहुल के पिता गणेश मंडल ज़्यादा बात नहीं करते लेकिन मां अनीता देवी बात करती हैं.
वह कहती हैं, "ऐसा पिता मैंने आज तक नहीं देखा जो अपने दामाद को मार दे. मेरा बेटा (राहुल) चला गया लेकिन अब यही मेरा बेटा है. इसी को बेटा मानकर आगे का जीवन जी लेंगे."
लेकिन तनुप्रिया के सामने लंबा जीवन बाक़ी है.
अनीता देवी कहती हैं, "ठीक है लेकिन अब यह बेटा बनकर मेरे पास रहेगी. यह रहती है तो बाबू-बाबू करके पूरा दिन कट जाता है. बाक़ी सरकार हमें क्या देगी? मेरा बेटा वापस कर देगी. हमें उन लोगों के लिए फांसी चाहिए."
अगस्त में हुई इस घटना के बाद तनुप्रिया ने किताबों को फ़िर हाथ नहीं लगाया.
उनके कमरे में दो बस्ते लटके हैं जिसमें से एक संभवत: राहुल का होगा.
तनुप्रिया कहती हैं, "मैंने कोई सपना अकेले देखा ही नहीं था. जो था राहुल के साथ था. अब वह नहीं रहा तो पढ़ने का क्या मतलब? मैं सिर्फ़ अपने पति को न्याय दिलाने के लिए ख़ुद को ज़िंदा रखे हुए हूं. रात होती है तो उसको ऐसे ही बिताने की कोशिश करती हूं ताकि सुबह देर तक सोती रहूं. दोपहर ग्यारह-बारह बजे उठती हूं. तसल्ली मिलती है कि एक दिन और ज़िंदा रहकर बिता दिया."
"मेरे पिता ने मेरे पति को मार दिया और मुझे ज़िंदा लाश बनाकर छोड़ दिया है. मैं नहीं चाहती कि कोई मुझे मर्डरर की बेटी कहे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
















