You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
एयर एम्बुलेंस क्रैश में मरने वाले डॉक्टर विकास के परिजनों को झारखंड और बिहार सरकार से क्या है शिकायत?
- Author, प्रीति प्रभा
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
झारखंड के चतरा ज़िले के कर्माटांड जंगल में सोमवार रात एक एयर एम्बुलेंस विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके़ पर ही मौत हो गई थी.
मृतकों में राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), रांची में क़रीब आठ सालों से कार्यरत 42 साल के डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता भी शामिल हैं. वह बिहार के औरंगाबाद ज़िले के मदनपुर थाना क्षेत्र के मनिका गांव के रहने वाले थे.
मंगलवार को चतरा सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद जब एम्बुलेंस से डॉक्टर विकास का शव मनिका गांव पहुंचा तो ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी.
इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में चारों तरफ़ मातम पसरा हुआ है. हर तरफ़ उनकी ही बातें हो रही हैं.
बीबीसी हिन्दी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
कब हुआ था हादसा
दरअसल, सोमवार को रांची से दिल्ली जा रहा एक एयर एम्बुलेंस विमान उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी.
इस विमान दुर्घटना पर जारी नागर विमानन महानिदेशालय के बयान के मुताबिक़, 23 फ़रवरी 2026 को रेडबर्ड एयरवेज़ प्राइवेट लिमिटेड का बीचक्राफ्ट सी90 विमान (वीटी-एजेवी), रांची-दिल्ली मार्ग पर बतौर एयर एम्बुलेंस उड़ान संचालित कर रहा था.
यह विमान झारखंड के चतरा ज़िले की कसरिया पंचायत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
विमान ने भारतीय समयानुसार शाम 7 बजकर 11 मिनट पर रांची से उड़ान भरी थी. कोलकाता से संपर्क स्थापित करने के बाद, विमान ने ख़राब मौसम के कारण रूट बदलने का अनुरोध किया.
7 बजकर 34 मिनट पर वाराणसी से लगभग 100 नॉटिकल माइल्स दक्षिण-पूर्व में विमान का कोलकाता से और रडार से संपर्क टूट गया जिससे यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.
ज़िम्मेदार कौन?
मनिका गांव में मंगलवार को गांव के लोग डॉक्टर विकास की बातों को याद कर रहे थे.
कोरोना काल का ज़िक्र करते हुए लोग कहते हैं, "विकास में अपनापन बहुत था, उन्होंने निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा की थी. गांव के लोग विकास से कभी भी किसी भी समय फ़ोन पर भी डॉक्टरी सलाह ले सकते थे, पूरे गांव को उन पर गर्व है, उन्होंने किसी की ज़िन्दगी बचाने के लिए अपनी ज़िन्दगी क़ुर्बान कर दी."
विकास की पत्नी बेसुध हैं तो वहीं मां का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं विकास के पिता अपने 7 साल के पोते (डॉक्टर विकास का बेटा) को जवाब नहीं दे पा रहे हैं, जब वह बार-बार यह सवाल करता है कि 'मेरे पापा को क्यों जलाया?'
विकास के चाचा शंकर प्रसाद कहते हैं, "विकास तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे और पढ़ाई में काफ़ी तेज़ थे, ग़रीबी में रहने के बावजूद माता-पिता और चाचा-चाची ने ज़मीन बेचकर बहुत ही मुश्किल से उन्हें पढ़ाया था. अब तो कोई सहारा नहीं रहा."
शंकर प्रसाद सरकार पर आरोप लगाते हैं, "घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी न झारखंड सरकार और न ही बिहार सरकार की और से कोई भी व्यक्ति पीड़ित परिवार से मिलने आया."
शंकर प्रसाद यह सवाल भी पूछते हैं, "आख़िर एयर एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त कैसे हो गया? इसका ज़िम्मेदार कौन है?"
राज्य सरकारों का क्या कहना है?
शंकर प्रसाद के आरोप पर बिहार सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की मंत्री लेसी सिंह ने इस हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुखद बताया है.
उन्होंने कहा, "ये बेहद दुखद घटना है, बिहार सरकार संवेदनशील है, अभी बिहार विधान मंडल का सत्र चल रहा है इस वजह से लोग जा नहीं पाए लेकिन सरकार मृतक के परिजनों के साथ है."
वहीं झारखंड के रांची से बीबीसी के सहयोगी पत्रकार मोहम्मद सरताज आलम ने बताया है कि राज्य सरकार में मंत्री इरफ़ान अंसारी ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिया है कि सरकार मामले और मुआवज़े से जुड़ी पूरी जानकारी जुटा रही है और परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी.
इरफ़ान अंसारी ने कहा, "मैं रांची सदर अस्पताल में आयोजित शोकसभा में डॉक्टर विकास गुप्ता को श्रद्धांजलि देने पहुँचा. परिवार को घबराने की ज़रूरत नहीं है, हमारी सरकार परिवार के साथ है परिवार बिल्कुल चिंता ना करे. वे जो कहेंगे वो करेंगे, चिंता न करें."
इरफ़ान अंसारी ने बताया, "हम लोग मुआवज़े की जानकारी ले रहे हैं. गाइडलाइन सेंटर से मंगवाएंगे. मोदी जी ने एयर इंडिया मामले में दो-दो करोड़ रुपए दिए थे. हम लोग ये भी जानना चाहते हैं कि इंश्योरेंस था कि नहीं था. अगर इंश्योरेंस था तो फिर हम भुगतान करेंगे, वे चिंता न करें."
क्या डॉक्टर विकास के परिवार के किसी सदस्य को जॉब देने पर कोई फ़ैसला लिया गया? इस सवाल पर इरफ़ान अंसारी ने कहा, "देखते हैं, क्या कर सकते हैं हम लोग. फैमिली के लिए कहीं ना कहीं, कुछ ना कुछ करेंगे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.