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ग़ज़ा: बंधकों की मौत पर इसराइली सेना की सफ़ाई, नेतन्याहू बोले- 'लड़ाई रखेंगे जारी'
- Author, ह्यूगो बशेगा
- पदनाम, बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता, तेल अवीव से
हमास के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान में इसराइली सेना ने 'ग़लती से' अपने ही तीन नागरिकों को मार दिया.
सात अक्टूबर के हुए हमले में हमास के लड़ाके इन तीनों को बाकी बंधकों की तरह अपने साथ ले गए थे. ग़ज़ा शहर में इसराइली सैनिकों को सफेद कपड़ा दिखाने के बावजूद सैनिकों ने उन पर गोली चला दी.
इसराइली सेना के अधिकारी ने कहा कि ये यह मामला 'रूल्स ऑफ़ एंगेजमेंट के ख़िलाफ़' यानी 'युद्ध के इसराइली नियमों के विरूद्ध' था. इसराइली सेना इस मामले की उच्च स्तर पर जांच कर रही है.
इसराइली सैनिकों ने शुक्रवार को तीन बंधक- योतम हैम (28 साल) समीर तलाल्का (22 साल) और एलोन शमरिज़ (26 साल) को शेज़ेया में गोली मार दी थी.
दरअसल ग़ज़ा सिटी में अभी भी इसराइली सेना को हमास के लड़ाकों से कड़ी चुनौती मिल रही है. इस वजह से वो कोई जोखिम नहीं ले रही है.
इस मामले में इसराइली सेना ने दावा किया है कि उनसे 'ग़लती' हुई और उन्होंने इन तीन बंधकों को ख़तरा समझा था.
इस घटना के बाद इसराइली सरकार पर अपने बंधकों को छुड़वाने के लिए हमास से समझौता करने का दबाव बढ़ गया है.
ग़ज़ा शहर में अभी भी इसराइल के 120 से ज्यादा बंधक हमास की कैद में हैं.
शहर में इसराइल, हमास के ख़िलाफ़ लगातार हमलावर है, लेकिन इस बीच बंधकों की वापसी के लिए पूरा इसराइल चिंतित दिख रहा है. उन परिवारों की बेचैनी ज्यादा बढ़ गई है, जिनके परिजन हमास की कैद में हैं.
पीएम नेतन्याहू ने क्या कहा
दूसरी ओर, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमास के ख़िलाफ़ इसराइल की सैन्य कार्रवाई में कोई ढील नहीं आने दी जाएगी.
उन्होंने कहा, "बंधकों की वापसी और जीत के लिए सेना का दबाव बनाए रखना ज़रूरी है. बगैर इस दबाव के हमारे पास अभी कुछ भी नहीं है."
दूसरी तरफ हमास ने मध्यस्थों से कहा है कि इसराइल जब तक उसके लोगों के ख़िलाफ़ हमले नहीं रोकता और आक्रामक रवैया नहीं छोड़ता तब तक बंधकों को छोड़ने पर कोई बात नहीं होगी.
सेना से गलती कहां हुई?
इसराइली सेना (आईडीएफ़) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि ग़ज़ा शहर में ये तीनों बंधक बिल्डिंग से बगैर शर्ट के निकले थे. इनमें से एक ने सफेद रंग का कपड़ा पकड़ रखा था.
अधिकारी के मुताबिक़ एक सैनिक, जो इन लोगों से क़रीब दस मीटर दूर था, उसने ख़तरा महसूस किया और चिल्लाया 'आतंकवादी'.
इसके बाद सैनिक ने गोलियां चला दी, जिससे दो लोगों की वहीं मौत हो गई. तीसरा शख्स बिल्डिंग में घुस गया.
उन्होंने बताया कि इसके बाद हिब्रू भाषा में मदद की गुहार सुनने को मिली तो बटालियन के कमांडर ने तुरंत हमला रोकने का आदेश दिया. लेकिन घायल बंधक जैसे ही दोबारा बिल्डिंग से बाहर आया उसे गोली मार दी गई. उसकी वहीं मौत हो गई.
अधिकारियों ने कहा कि या तो ये बंधक हमास के कब्जे़ से निकलकर भागे थे या उन्हें अपने साथ ले जाने वाले लड़ाकों ने उन्हें यहीं छोड़ दिया था.
वहां एक ऐसी बिल्डिंग मिली है, जहां से एसओएस संदेश मिला था. अधिकारी इस बात की जांच कर रहे थे कि क्या ये संदेश मारे गए बंधकों ने भेजा था.
इस बीच इन बंधकों के साथ रहे थाई बंधक विचियन तेमथोंग ने कहा कि चूंकि उन्हें हिब्रू नहीं आती थी इसलिए उन लोगों के बीच इशारों से बात होती थी. वे लोग एक दूसरे को हिम्मत बंधाते थे.
उन्होंने कहा कि जिन लोगों के साथ उन्होंने 50 दिन बिताए उनकी मौत की ख़बर सुनकर उन्हें गहरा सदमा लगा है.
विरोध में सड़कों पर उतरे लोग
इस महीने की शुरुआत में इसराइल और हमास के बीच अस्थायी युद्धविराम ख़त्म होने के बाद इसराइली बंधकों के परिवारों ने सरकार से मांग की थी वो हमास के साथ फिर से बातचीत शुरू करें.
शुरुआती समझौते में जेल में बंद फ़लस्तीनी कैदियों के बदले 100 इसराइलियों को छोड़ने की बात हुई थी. हमास ने कुछ बंधकों को छोड़ा भी था, लेकिन अभी भी 100 से ज्यादा बंधक हमास के कब्जे़ में हैं.
इस बीच, इसराइल की राजधानी तेल अवीव में बंधकों के परिजन ने उन्हें छुड़वाने के लिए सरकार पर दबाव डालना शुरू कर दिया है.
हज़ारों इसराइली नागरिक तेल अवीव में म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट के बाहर जमा हुए और उन्होंने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि बंधकों को जल्द से जल्द छुड़ाया जाए.
इस जगह को अब 'होस्टेज स्क्वायर' कहा जा रहा है.
बंधक रहे इताई सिविरस्की की कज़िन नामा विनबर्ग ने कहा, "जो हुआ वो हमारा सबसे बड़ा डर है. जो बंधक कल तक जिंदा थे वो अब मर चुके हैं. हमें उनकी लाश नहीं चाहिए."
उन्होंने कहा, "जब तक सारे बंधक न लौटें तब तक लड़ाई रोक कर रखनी चाहिए. हर बीतते दिन के साथ बंधकों की लाशें लौट रही हैं."
इसराइल पर युद्ध रोकने का दबाव
सात अक्टूबर को इसराइल पर हमास के हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में अब तक 18 हजार फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा हमास संचालित ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय का है.
जबकि सात अक्टूबर के हमास के हमले में 1200 इसराइली लोग मारे गए थे.
सात अक्टूबर के बाद ग़ज़ा में बड़े पैमाने पर तबाही मची है. संयुक्त राष्ट्र ने इसे बहुत बड़ी मानवीय त्रासदी करार दिया है.
इस बीच इसराइल पर अमेरिका समेत कई मित्र देशों ने युद्ध बंद करने का दबाव बनाया है. हालांकि इसराइल इसे मानने के लिए तैयार नहीं है.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने शनिवार को कहा, "इस दुख और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हम अंत तक लड़ेंगे. कोई भी चीज हमें रोक नहीं सकती."
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