रमज़ानः खजूर खाकर ही क्यों खोला जाना चाहिए रोज़ा?

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- Author, केट बोवी
- पदनाम, ग्लोबल हेल्थ, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान इस रमज़ान में हर रोज़ सूरज ढलते ही एक ही काम करेंगे- खजूर खाकर रोज़ा खोलेंगे.
महीने भर चलने वाले रोज़े, इबादत और आत्मचिंतन के दौर में, सेहतमंद मुसलमान सुबह से लेकर शाम तक कुछ भी खाने-पीने से परहेज़ करते हैं. यह इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है.
रोज़ा खोलने के लिए खजूर खाने की सलाह पैग़ंबर मोहम्मद ने दी थी और इस्लाम की पवित्र किताब, कुरान, में भी कई बार इसका ज़िक्र आता है.
लेकिन खजूर सिर्फ़ धार्मिक वजहों से ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी रोज़े, व्रत या फ़ास्ट रखने वालों के लिए बेहतरीन फल है.
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'विशिष्ट' पोषण लाभ
खजूर की बनावट उन्हें लंबे रोज़े के बाद खाने के लिए बिल्कुल सही बनाती है. ब्रिटेन में रजिस्टर्ड डाइटीशियन शहनाज़ बशीर, जो खुद रोज़ा रखती हैं, कहती हैं, "जब आप रोज़ा खोलते हैं तो शरीर सबसे पहले ग्लूकोज़ बनाने की कोशिश करता है, क्योंकि उसे ऊर्जा के लिए यही चाहिए."
खजूर में मौजूद ज़्यादा मात्रा में शक्कर, दूसरे खाने की तुलना में, आपके खून में शर्करा (शुगर) को बहुत जल्दी बढ़ा देती है, जबकि बाकी चीज़ों को टूटने में ज़्यादा समय लगता है.
बशीर बताती हैं, "खजूर की ख़ासियत यह है कि इनमें साधारण शक्कर भी होती है और जटिल कार्बोहाइड्रेट भी."
इसका मतलब है कि यह फल दिन भर धीरे-धीरे ऊर्जा देता रहता है- उन लोगों के लिए बिल्कुल सही है जो लंबे समय तक कुछ नहीं खा सकते. इसके अलावा विटामिन 'बी6', 'ए' और 'के' के साथ-साथ इनमें आयरन भी भरपूर होता है, जिससे शरीर को कम समय में ज़रूरी पोषण मिल जाता है.
पानी की कमी से बचाव

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सूखा फल होने के बावजूद, खजूर शरीर को हाइड्रेटेड रखने (शहर में पानी बनाए रखने) में मदद करता है.
इनमें प्राकृतिक रूप से पोटैशियम होता है, जो इलेक्ट्रोलाइट की तरह काम करता है और पानी को शरीर की कोशिकाओं में खींच लाता है.
बशीर कहती हैं, "कई लोग रोज़ा खोलते समय खजूर और पानी साथ लेते हैं, जो ऊर्जा और हाइड्रेशन दोनों के लिए बेहतरीन है. इसलिए अक्सर अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती."
ज़्यादा खा लेना
कुछ लोगों का वज़न रमज़ान में कम हो जाता है- लेकिन अगर इफ़्तार में ज़्यादा खा लिया जाए तो रोज़ा रखने से वज़न बढ़ भी सकता है. परंपरागत रूप से, मुसलमान रोज़ा खोलते समय विषम संख्या में खजूर खाते हैं और फिर तुरंत मग़रिब की नमाज़ अदा करते हैं.
उसके बाद वे इफ़्तार का खाना खाते हैं. जब शरीर रेशेदार खजूर को तोड़ना शुरू कर देता है, ज़्यादा खाने की इच्छा कम हो सकती है.
बशीर कहती हैं, "इससे शरीर को यह समझने का मौका मिलता है कि उसने खाना खा लिया है और पाचन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है."
पाचन पर असर

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रोज़ा रखने वाले मुसलमानों में कब्ज़ और पेट फूलने की समस्या आम है. इसकी वजह यह है कि दिन भर खाना-पीना आंतों की गति को सक्रिय रखता है, जो लंबे रोज़े के दौरान नहीं हो पाता.
खजूर फाइबर का बेहतरीन स्रोत हैं, जो मल को आसानी से आंतों से गुज़रने में मदद करता है. ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस रोज़ाना 30 ग्राम फाइबर लेने की सलाह देती है.
बशीर कहती हैं, "कभी-कभी रमज़ान में… हमें साधारण कार्बोहाइड्रेट की तलब होती है, लेकिन अगर हमने पहले से भोजन की योजना और तैयारी कर रखी हो तो यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारे खाने में फ़ाइबर मौजूद हो."
अपने खाने पर मेवे और बीज छिड़कना फाइबर की मात्रा बढ़ाने का एक आसान तरीका हो सकता है.
अगर ख़जूर पसंद ही न हों तो
धार्मिक वजहों से इतर, सेहत के लिए भी इंटरमिटेंट फास्टिंग यानी बीच-बीच में रोज़ा या व्रत रखना अब लोकप्रिय हो रहा है.
बशीर कहती हैं, "यह लगभग वैसा ही है जैसा हम रमज़ान में रोज़ा रखते हैं."
अगर आपको खजूर पसंद नहीं, तो इसकी सैकड़ों किस्में हैं- कुछ चबाने में सख़्त, कुछ बहुत मुलायम, कुछ का छिलका मोटा और कुछ का पतला.
बशीर सलाह देती हैं, "आप अलग-अलग किस्में आज़माइए."
और अगर फिर भी मन न बने, तो इन्हें स्मूदी में मिला लीजिए.
वह कहती हैं, "खजूर और दूध को साथ मिलाकर, उसमें थोड़ा दही और मेवे डालकर ब्लेंड कर लें और इस तरह पी लें."
"ये सचमुच खाने की ऐसी अच्छी चीज़ें हैं जो कई अहम ज़रूरतों को पूरा कर देती हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.














