क्या पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के एक इलाक़े पर कब्ज़ा कर लिया है?

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- Author, अली हुसैनी
- पदनाम, बीबीसी फ़ैक्ट चेकिंग
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अफ़ग़ानिस्तान के पक्तीका प्रांत में हाली में एक ऐसी घटना हुई जिसने इन अटकलों को जन्म दिया कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के कम से कम 12 किलोमीटर इलाक़े में बाड़ लगाकर उसे अपने कब्ज़े में मिला लिया है.
हालांकि तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के सीमावर्ती इलाक़े सरकारी सुरक्षा बलों के नियंत्रण में हैं. मंत्रालय ने किसी भी पाकिस्तानी क़ब्ज़े से इनकार किया है.
इस हफ़्ते सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पाकिस्तानी अकाउंट्स से एक वीडियो वायरल होता रहा जिसका शीर्षक था, 'पाकिस्तान का नक़्शा फैल रहा है.'
वीडियो में पाकिस्तान के बाड़ वाले सरहदी इलाक़े की तस्वीरें दिखाकर दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने सीमा पर बाड़ लगाकर अफ़ग़ान तालिबान से छीनी गई ज़मीन पर स्थायी तौर पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा को 'डूरंड लाइन' कहा जाता है.
अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता में रही किसी भी सरकार ने आजतक इस लाइन पर अंतरराष्ट्रीय सरहद मानने से इनकार किया है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संगठन इस लाइन को दोनों देशों की क़ानूनी सीमा मानते हैं.
यह इलाक़ा कहां है?

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पक्तीका प्रांत के दक्षिण-पश्चिम में पाकिस्तानी सीमा के साथ एक क्षेत्र है. यह एक ऐसे उभार की तरह दिखता है जो पाकिस्तान की ओर जा रहा है.
गूगल अर्थ की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पिछले चार वर्षों से इस क्षेत्र में दोनों देशों की सीमा पर बाड़ लगी हुई है. पाकिस्तान अरसे से अफ़ग़ानिस्तान के साथ अपनी सीमा पर बाड़ लगा रहा है.
इस इलाक़े का क्षेत्रफल कम से कम 32 वर्ग किलोमीटर है.
लगभग दो हफ़्ते पहले जो कुछ भी हुआ, वह इसी इलाक़े के एक दर्रे से जुड़ा हुआ है.

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सैटेलाइट तस्वीरों में देखा जा सकता है कि इस इलाक़े को बाड़ लगाकर अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन से अलग कर दिया गया है.
अगर हम इस क्षेत्र को तस्वीर की मदद से समझना चाहें तो मान सकते हैं कि यह इलाक़ा लगभग अंग्रेज़ी के एक बड़े 'एल' आकार का है.
इसका क्षेत्रफल क़रीब 32 वर्ग किलोमीटर है. लोहे की बाड़ ने इसके निचले और ऊपरी हिस्से को अफ़ग़ानिस्तान के क्षेत्र से अलग कर दिया है.
अगर हम पाकिस्तान की हज़ारों किलोमीटर लंबी सीमा पर लगी बाड़ को मानक मानें तो हाल की बाड़बंदी के ज़रिए पाकिस्तान ने इस 'एल' आकार वाले इलाक़े को व्यावहारिक रूप से अपने हिस्से में शामिल कर लिया है.
यहां बाड़ के पूर्वी इलाक़े को पाकिस्तान और पश्चिमी इलाक़े को अफ़ग़ानिस्तान माना जाता है,

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सैटेलाइट तस्वीरों को ध्यान से देखने पर इस इलाक़े को अलग करने वाली बाड़ 10 मार्च से पहले नज़र नहीं आती लेकिन केवल तीन दिन बाद यह बाड़ साफ़ तौर से दिखाई देने लगती है.
इस क्षेत्र का वह हिस्सा जिसे इस नई बाड़ के ज़रिए पाकिस्तान की तरफ़ मिलाया गया है, उसकी लंबाई कम से कम 12 किलोमीटर है.
एक और अहम बात यह है कि इस बाड़ का काम पूरा होने के बाद उसी सीमावर्ती क्षेत्र के एक और हिस्से में एक नई बाड़ लगाई गई है. यह नई बाड़ ठीक उसी 'एल' आकार वाले इलाक़े के सिरे पर लगाई गई है.
यह घेराबंदी अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन पर सरहद से 13.5 किलोमीटर से भी ज़्यादा भीतर तक की गई है.
तालिबान का पक्ष

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तालिबान की अंतरिम सरकार के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि डूरंड लाइन के पास स्थित सभी इलाक़े सुरक्षा बलों के नियंत्रण में हैं. मंत्रालय के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन के किसी भी हिस्से को लेकर किसी को फ़िक्रमन्द होने की ज़रूरत नहीं है.
तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक ताज़ा वीडियो में सशस्त्र बलों के उप प्रमुख माली ख़ान सिद्दीक़ बता रहे हैं कि वह पक्तीका प्रांत के तरवा ज़िले में मौजूद हैं.
वीडियो में वह अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन के भीतर बाड़ लगाने के मामले को 'मीडिया का प्रोपेगैंडा' क़रार देते हुए कहते हैं: "आप देख रहे हैं कि हमारी फ़ोर्स हर जगह मौजूद है. अगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया यहां आना चाहे तो हमें कोई समस्या नहीं है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































