भारत का मिसाइल और एयर डिफ़ेंस सिस्टम पाकिस्तान की तुलना में कैसा है?

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इमेज कैप्शन, भारत की अग्नि मिसाइल की क्षमता पाकिस्तान की शाहीन सिरीज़ से अधिक है
    • Author, रजनीश कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में छह और सात मई की दरमियानी रात को सैन्य ऑपरेशन शुरू किया.

भारत ने इस सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया है. भारत का कहना है कि यह हमला 'आतंकवादी ठिकानों पर किया गया है.'

भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़े ताज़ा तनाव के बाद दोनों देशों की सैन्य क्षमता पर बात शुरू हो गई है.

आइए जानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के पास कौन-कौन सी मिसाइलें हैं और उनकी एयर डिफ़ेंस सिस्टम क्षमता कैसी है.

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इमेज कैप्शन, भारत ने अमेरिका की नाराज़गी के बावजूद रूस से एस-400 ख़रीदा था

भारत की अग्नि-5 मिसाइल ज़मीन से पाँच हज़ार से आठ हज़ार किलोमीटर तक मार कर सकती है.

दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की शाहीन-3 मिसाइल की मारक क्षमता 2,750 किलोमीटर है.

भारत की हथियारों के मामले में रूस पर निर्भरता ज़्यादा है और पाकिस्तान की चीन पर.

पश्चिम के देश लंबे समय तक भारत को मिसाइल तकनीक देने से परहेज़ करते रहे हैं लेकिन फ़्रांस और भारत ने मिलकर मिसाइल तकनीक पर काम किए हैं.

इनमें इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम भी शामिल है. दुनिया में केवल सात देश हैं, जिनके पास आईसीबीएम हैं.

एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम

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रक्षा विश्लेषक हैरिसन कास ने द नेशनल इंटरेस्ट में लिखा है, ''भारत उन चंद देशों में शामिल है, जिसके पास एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है. भारत के पास मिसाइल डिफेंस सिस्टम में दो तरह की मिसाइलें हैं. पहली पृथ्वी एयर डिफेंस (पीएडी) मिसाइल, जो कि ज़्यादा ऊंचाई पर मिसाइल हमले को रोकती है और दूसरी एडवांस एयर डिफेंस (एएडी) है, जो कम ऊंचाई वाले मिसाइल हमलों को रोकती है. भारत की एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम के बारे में उम्मीद की जाती है कि कम से कम 5000 किलोमीटर की दूरी से आने वाले मिसाइल हमलों को रोकने में सक्षम है.''

भारत ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस और ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को भी विकसित किया है और इसे ज़मीन, हवा, समुद्र और सब-सी प्लेटफ़ॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है.

हैरिसन कास का कहना है कि "भारत के पास पारंपरिक और परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों के कई विकल्प हैं. साथ ही मिसाइल हमलों को रोकने की भी क्षमता है.''

दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के पास भी पारंपरिक और परमाणु हथियार वाली मिसाइलों के कई विकल्प हैं. कहा जाता है कि दोनों देशों ने एक दूसरे के ख़तरों को देखते हुए अपनी मिसाइल क्षमता को आगे बढ़ाया है.

लेकिन भारत की तरह पाकिस्तान के पास आईसीबीएम का विकल्प नहीं हैं.

कई रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान को इसकी बहुत ज़रूरत नहीं है.

चीन और भारत में भी जंग हो चुकी है और भारत इस हिसाब से भी अपनी रक्षा क्षमता विकसित कर रहा है.

दूसरी तरफ़ पाकिस्तान अभी केवल भारत को अपना दुश्मन मानता है.

हैरिसन कास का कहना है कि ''पाकिस्तान को भारत के लिए आईसीबीएम की बहुत ज़रूरत नहीं है. पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता क्षेत्रीय लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम है.''

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इमेज कैप्शन, रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि आकाश और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम बहुत काम आ सकते हैं

पाकिस्तान के पास आईसीबीएम नहीं

भारत के जाने-माने रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी कहते हैं कि मामला आईसीबीएम तक आएगा तो फिर कुछ नहीं बचेगा.

राहुल बेदी कहते हैं, ''आईसीबीएम का फ्लाइंग टाइम 15 से 20 सेकंड है. आईसीबीएम एक स्ट्रैटिजिक वेपन है और भारत ने इसे चीन को देखते हुए विकसित किया है. पाकिस्तान के पास आईसीबीएम नहीं है. पाकिस्तान को इसकी ज़रूरत भी नहीं है. पाकिस्तान की पूरी तैयारी भारत को लेकर है जबकि भारत का मुख्य फोकस चीन है. 1998 में जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था, तब अटल बिहारी वाजपेयी ने बिल क्लिंटन को लिखे पत्र में यही कहा था.''

पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर शाहीन सिरीज़ की मिसाइलें बनाई हैं. पाकिस्तान की शाहीन मिसाइलें शॉर्ट, मीडियम और लंबी दूरी की मारक क्षमता रखती हैं.

पाकिस्तान एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम पर भी काम कर रहा है ताकि भारत के हमलों का सामना किया जा सके.

हैरिसन का कहना है कि पाकिस्तान के पास एचक्यू-9बीई है, लेकिन भारत अगर ब्रह्मोस का इस्तेमाल करेगा तो पाकिस्तान के लिए रोकना आसान नहीं है.

पाकिस्तान की संसद में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को लेकर विपक्षी सांसद चिंता जताते रहे हैं. मई 2022 में भारत ने कहा था कि उसकी एक मिसाइल ग़लती से पाकिस्तान की ओर लॉन्च हो गई थी.

तब पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ़ ने कहा था, ''एक सुपरसोनिक प्रोजेक्टाइल 40 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई से बॉर्डर पार पाकिस्तान में गिरा था. यह मिसाइल अंतरराष्ट्रीय और घरेलू व्यावसायिक एयरलाइंस के रास्ते के पास से गुज़री थी. यह बहुत ही ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है कि पाकिस्तान को भारत ने इसकी सूचना तक नहीं दी थी.''

पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा था कि मिसाइल भारत की सरहद से 75 किलोमीटर दूर मियां चानू नाम के एक छोटे शहर में गिरी थी.

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के पास बीएमसी सील्स नहीं हैं

इस बार क्या हुआ?

राहुल बेदी कहते हैं, ''भारत ने इस बार पाकिस्तान में घुसकर हमला करने के बजाय अपने ही इलाक़े से हमला किया है. सबसे बड़ी बात है कि भारत ने इस बार पाकिस्तान के मेनलैंड पंजाब में हमला किया है.''

भारत और पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता को लेकर राहुल बेदी कहते हैं, ''भारत के पास बीएमडी सील्स यानी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस है और पाकिस्तान के पास ये नहीं है. हालांकि बीएमडी हमेशा 100 फ़ीसदी कामयाब नहीं होती है. ऐसा में हमने इसराइल में देखा कि उनका आयरन डोम कुछ मामलों में नाकाम रहा था. इसके बावजूद बीएमडी सील्स बड़े हमलों को रोकने में काम आएगा.''

राहुल बेदी कहते हैं, ''भारत के पास स्ट्रैटिजिक और कन्वेंशनल दोनों तरह की मिसाइलें हैं. जैसे अग्नि स्ट्रैटिजिक मिसाइल हैं और ब्रह्मोस कन्वेंशनल. अगर इनकी तुलना पाकिस्तान की गौरी और बाबर से करें तो मारक क्षमता में कहीं आगे हैं. भारत का अभी सर्विलांस सिस्टम भी अच्छा हुआ है.''

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में नेशनल सिक्यॉरिटी सेंटर के प्रोफ़ेसर लक्ष्मण कुमार कहते हैं, ''भारत के एयर डिफेंस सिस्टम आकाश और एस-400 बहुत काम आएंगे. पाकिस्तान के पास इतने प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम नहीं हैं. मुझे नहीं लगता है कि पाकिस्तान भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा. ये तो तय है कि जवाब देगा.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित