असम में चुनाव से पहले 37 लाख महिलाओं को 8 हज़ार रुपये का 'तोहफ़ा', क्या बीजेपी को मिलेगा फ़ायदा?

महिला लाभार्थियों को सरकारी योजना के चेक बांटते असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, महिला लाभार्थियों को सरकारी योजना के चेक बांटते असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नवंबर में बिहार चुनाव नतीजों के बाद दावा किया था कि महिला सशक्तीकरण योजनाओं के 'असम मॉडल' ने नीतीश कुमार की जीत में योगदान दिया. सीएम सरमा ने दावा किया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू की गई महिला-केंद्रित योजनाएं उनकी सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं से प्रेरित थीं.

मुख्यमंत्री सरमा ने बिहार में वोटरों को नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) के पक्ष में प्रभावित करने का दावा करते हुए कहा था, "जब हमने बेहाली, नलबाड़ी, ढेकियाजुली में सबल महिला,सबल समाज स्कीम शुरू की, तो बिहार सरकार को भी अलग-अलग मीडिया के ज़रिए इसके बारे में पता चला. वे जानना चाहते थे कि हमने ये स्कीमें क्यों और कैसे शुरू की हैं. हमने समझाया कि हमारा मकसद हर महिला को 'लखपति बाइदेओ' (लखपति बहन) बनाना है."

अब असम विधानसभा चुनाव से महज चार महीने पहले सीएम सरमा ने महिला लाभार्थियों के लिए नकदी स्कीम की घोषणा कर सत्ता में वापसी का दांव खेल दिया है. नए साल के पहले दिन मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य की 37 लाख महिलाओं को अपनी प्रमुख अरुणोदय योजना के तहत 8 हज़ार रुपये का 'बिहू उपहार' के तौर पर देने की घोषणा की है.

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पत्रकारों के समक्ष कहा, "चुनाव के समय अरुणोदय योजना का वितरण हमेशा एक विवादित विषय बन जाता है. विपक्ष भी कई बार आपत्ति जताता है. लिहाज़ा 20 फरवरी को असम की प्रत्येक अरुणोदय योजना की लाभार्थी को बिहू के उपहार के तौर पर 8 हज़ार रुपये दिए जाएंगे. हम जनवरी में इस योजना का पैसा नहीं देंगे लेकिन 20 फरवरी को एक साथ बोहाग बिहू उत्सव के उपहार के तौर पर 8 हज़ार रुपये उनके बैंक खातों में ट्रांसफ़र कर देंगे."

बीबीसी हिन्दी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "जनवरी से अप्रैल तक अरुणोदय योजना का पैसा नहीं मिलेगा, इसलिए एक साथ हम 8 हज़ार रुपये दे रहे हैं. फिर मई से हर महीने मिलते रहेंगे. जनवरी से अप्रैल तक 1250 रुपये के हिसाब से 5 हज़ार होते हैं और हमने इसमें 3 हज़ार रुपये अपनी तरफ से जोड़ दिए हैं."

अरुणोदय एक वित्तीय सहायता योजना है जिसमें हर महीने महिला लाभार्थी के बैंक में सीधे 1250 रुपये ट्रांसफ़र किए जाते हैं. 2020 में शुरू हुई इस योजना में अभी लगभग 37 लाख लाभार्थी हैं.

नकदी स्कीम की घोषणाएं सभी सवालों का जवाब नहीं

असम में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन की रैली

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, जानकारों का मानना है कि नकदी योजनाओं से गायक जुबिन गर्ग की मौत से जुड़े सवाल ढक नहीं जाएंगे

मुख्यमंत्री ने एक और नई लाभार्थी योजना की घोषणा करते हुए अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट पुरुष छात्रों को हर महीने वित्तीय मदद देने का ऐलान किया है. इस 'बाबू योजना' के तहत सरकार 1 फरवरी से योग्य पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को हर महीने 2,000 रुपये और योग्य अंडर ग्रेजुएट छात्रों को 1,000 रुपये की वित्तीय मदद देगी. इस योजना का फ़ायदा केवल उन छात्रों को मिलेगा जिनके परिवार की सालाना घरेलू आय 4 लाख रुपये तक होगी.

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

असम की राजनीति समझने वाले लोग विधानसभा चुनाव से पूर्व वित्तीय मदद से जुड़ी इन घोषणाओं को सभी मुद्दों का जवाब नहीं मानते.

असम की राजनीति और भाजपा की चुनावी रणनीति को समझने वाले डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर कौस्तुभ डेका ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "बिहार तथा कुछ अन्य राज्यों में अभी तक जैसा देखा गया है, निश्चित तौर पर इस तरह की घोषणाओं का चुनावी फ़ायदा तो मिलेगा. लेकिन असम में काफ़ी सारे अलग-अलग फैक्टर हैं. पहचान का मुद्दा है, बेरोज़गारी है. लिहाज़ा इस तरह की स्कीमों से सारे मुद्दों का जवाब नहीं दिया जा सकता."

प्रोफ़ेसर डेका मानते हैं कि इन स्कीमों के तहत मतदाता तक सीधे पैसे पहुंचाना चुनावी रणनीति में एक बड़ा दांव हो सकता है.

वह कहते हैं, "बीजेपी सरकार की इन स्कीमों का पैसा महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में मिलेगा. लिहाज़ा इस तरह के चुनावी प्रयोग से मतदाता के साथ पार्टी का एक सीधा संपर्क बनता है. लेकिन जनजाति दर्जा देने की मांग, प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग की मौत से जुड़े मामले में लोग सवाल ज़रूर पूछेंगे. यह कहना सही नहीं होगा कि इन नकदी योजनाओं से बाकी सवालों को पूरी तरह ढका जा सकता है."

'जिनके घर तोड़े गए उनकी भी मदद हो'

नकदी योजनाओं की लाभार्थी महिलाएं ख़ुश दिख रही हैं

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, लाभार्थी महिलाओं ने मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया है (फ़ाइल फ़ोटो)

असम के कामरूप जिले में बने नए विधानसभा क्षेत्र चमारिया की रहने वाली सलमा बेगम (बदला हुआ नाम) अरुणोदय योजना की लाभार्थी हैं और उन्होंने सीएम सरमा की इस घोषणा पर खुशी जताई है. लेकिन वह चाहती हैं कि सरकार उन मुसलमान महिलाओं की भी मदद करें जिनके घर तोड़ दिए गए हैं.

सलमा ने बीबीसी न्यूज हिन्दी से कहा, "यह सरकार महिलाओं को वित्तीय तौर पर मज़बूत करने के लिए काफ़ी कुछ कर रही है लेकिन अच्छे काम की सराहना उस वक्त होती है जब बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों को एक नज़र से देखा जाए. सैकड़ों महिलाएं बेदखली अभियान के कारण बेघर हो गई हैं. उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं, सरकार को उनकी भी सुध लेनी चाहिए."

विधानसभा चुनावों से ठीक पहले नए साल की इन घोषणाओं के साथ पिछले कुछ सालों में असम सरकार द्वारा घोषित लाभार्थी योजनाओं और सुविधाओं की लिस्ट काफ़ी लंबी हो गई है.

इससे पहले राज्य सरकार ने बाल विवाह से निपटने के तरीके के तौर पर 12वीं से पोस्ट ग्रेजुएट स्तर तक की छात्राओं को हर महीने वित्तीय मदद देने के लिए 2024 में 'निजुत मोइना' योजना शुरू की थी. इस योजना के तहत कक्षा 11वीं की छात्राओं के लिए 10 महीने तक हर महीने 1,000 रुपये, ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की छात्राओं के लिए 10 महीने तक हर महीने 1,250 रुपये और पोस्ट ग्रेजुएट तथा बीएड कोर्स की छात्राओं के लिए 10 महीने तक हर महीने 2,500 रुपये निर्धारित हैं.

कांग्रेस के सामने चुनौती

असम प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, असम प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी मानती हैं कि इस तरह की योजनाएं चुनौती तो हैं

असम विधानसभा चुनाव का एलान फरवरी के आखिर या मार्च की शुरुआत में होने की उम्मीद है. कांग्रेस ज़मीनी स्तर पर काफ़ी सक्रियता के साथ मतदाताओं से मिलकर एक ऐसा चुनावी घोषणा-पत्र तैयार करना चाहती है जिसमें बीजेपी से मुकाबला करने के लिए सारी बातें हो.

असम प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर गोस्वामी मानती है कि इस तरह की योजनाओं से थोड़ी बहुत चुनौती तो ज़रूर खड़ी होगी.

वह कहती हैं, "यह चुनौती तब तक है जब तक असम की महिलाएं राजनीतिक और आर्थिक तौर पर सतर्क नहीं हो जातीं. महिलाओं को सोचना होगा कि एक तरफ स्कूल बंद किए जा रहे हैं और 1250 रुपये देकर उनका वोट ले लिया जा रहा है. मुख्यमंत्री को यह आभास हो गया है कि बेरोज़गार, युवा, किसान, छोटे व्यापारी उनको वोट नहीं देंगे, इसलिए महिला मतदाताओं को अपना लक्ष्य बनाया है. महिलाओं को समझना होगा कि यह 8 हज़ार रुपये का उपहार दरअसल चुनाव जीतने के लिए है."

कांग्रेस के चुनावी नुक़सान से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए मीरा बोरठाकुर गोस्वामी कहती हैं, "अगर महिलाएं 8 हज़ार रुपये के पीछे गईं तो कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी हो जाएगी. लिहाज़ा हम मतदाताओं से मिलकर उन्हें समझा रहे हैं कि कांग्रेस की सरकार बनी तो इस आर्थिक संकट का स्थाई समाधान निकाला जाएगा. साथ ही हम सरकार के भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, महंगाई और दमन करने वाली नीतियों के बारे में लोगों से बात कर रहे हैं. काफ़ी लोग समझते हैं कि बीजेपी सरकार क्यों मुफ्त रेवड़ियां बांट रही है."

सीएम सरमा का फ़ायदा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुककर नमस्ते करते हिमंत बिस्वा सरमा

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, चर्चा है कि बीजेपी शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही यहां चुनाव लड़े

असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी किस नेता के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी, इस बात को लेकर अभी तक किसी भी तरह की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

ऐसी चर्चा है कि प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग की मौत को लेकर लोगों में जो नाराज़गी है उसके कारण बीजेपी शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही यहां चुनाव लड़े.

असम की राजनीति को तीन दशकों से भी ज़्यादा समय से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार नव कुमार ठाकुरिया भी कुछ ऐसा ही मानते हैं.

वह कहते हैं, "जुबिन गर्ग की घटना से पहले तक असम में बीजेपी के लिए किसी तरह की कोई चुनौती नहीं थी. सरकार और पार्टी के स्तर पर इस मामले को जिस तरह से संभालने का प्रयास हो रहा है, ऐसे में यह संभव है कि बीजेपी बिना किसी नेता को प्रोजेक्ट किए इस बार का चुनाव लड़े. लिहाज़ा सीएम हिमंत इस तरह की जन लुभावनी स्कीमों की घोषणा कर रहे हैं ताकि मतदाताओं में उनकी पकड़ मज़बूत बनी रहे. और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में एक अच्छा संदेश जाए."

पत्रकार ठाकुरिया की मानें तो बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बदल सकती है.

वह कहते हैं, "राज्य में बीजेपी अन्य पार्टियों की तुलना में आज भी काफ़ी मज़बूत है. लेकिन जुबिन गर्ग की मौत के बाद नाराज़ लोगों ने बीजेपी सरकार को हटाने की बजाए सीएम सरमा को हटाने की मांग उठाई थी.जुबिन मामले में सीएम की पत्नी का भी नाम घसीटा गया. बीजेपी इससे पहले भी 2021 में मौजूदा सीएम (सर्बानंद सोनोवाल) को बदल चुकी है. ऐसे में हिमंत बिस्वा सरमा जो भी नया और अच्छा काम करेंगे उससे पार्टी के मुकाबले उनका ख़ुद का फ़ायदा ज़्यादा होगा."

'हिमंत के नेतृत्व में हर तबके का विकास'

हिमंत बिस्वा सरमा समर्थकों से मिलते हुए

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

असम प्रदेश बीजेपी का यह कहना है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य के हर तबके का विकास हुआ है.

कांग्रेस के तमाम आरोपों का जवाब देते हुए असम प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता ने बीबीसी न्यूज हिन्दी से कहा, "महिलाओं को आर्थिक तौर पर मज़बूत करना और उन्हें स्वनिर्भर बनाना हमारी सरकार का प्रमुख लक्ष्य रहा है. चुनाव के कारण अरुणोदय योजना का पैसा माताओं और बहनों को नहीं मिल पाता, लिहाज़ा हमारे सीएम ने उन्हें एक साथ एडवांस में देने की घोषणा की है."

"बात जहां तक युवाओं, किसानों और छोटे व्यापारियों के वोटों की है तो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार में युवाओं को सबसे ज़्यादा नौकरी मिली है. राज्य में टाटा समेत कई बड़े उद्योग लग रहे हैं. मोबाइल बनाने की फैक्ट्री लगने जा रही है. सरकारी ज़मीन खाली करवाई गई है ताकि किसानों के लिए खेती-बाड़ी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. नौकरीपेशा लोगों के लिए सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लागू करने की घोषणा कर दी है."

जुबिन गर्ग की मौत के मतदाताओं पर असर से जुड़े सवाल पर बीजेपी नेती ने कहा, "सीएम ने जुबिन गर्ग की मौत के मामले में बेहद गंभीरता से काम किया है. यही कारण है कि समय पर जांच प्रक्रिया को पूरा कर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है. हमारी सरकार ज़ुबिन गर्ग से जुड़े मामले में कोर्ट की कार्यवाही में तेज़ी लाने के लिए खास तौर पर एक स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त करने जा रही है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)