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सरबजीत कौर: इस्लाम धर्म अपनाकर शादी करने वाली भारतीय महिला को लेकर पाकिस्तानी मंत्री ने अब क्या कहा
- Author, शुमाइला ख़ान और एहतेशाम शामी
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद से
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
पाकिस्तान के गृह मामलों के राज्य मंत्री तलाल चौधरी का कहना है कि सरबजीत कौर (नूर फ़ातिमा) की भारत वापस भेजे जाने की अपील पर मानवीय आधार पर विचार किया जा रहा है.
तलाल चौधरी ने कहा कि 'उन्हें वापस नहीं भेजना पड़े, इसके प्रयास किए जा रहे हैं.'
सरबजीत कौर 4 नवंबर को सिख तीर्थयात्रियों के एक समूह के साथ भारत से पाकिस्तान आई थीं और उनका वीज़ा 13 नवंबर को समाप्त हो गया था.
हालांकि, वह भारत नहीं लौटीं और इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उन्होंने मध्य पंजाब के शहर शेखूपुरा के निवासी नासिर हुसैन से शादी कर ली और पाकिस्तान में ही रहने लगीं.
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उन्हें हाल ही में उनके पति के साथ हिरासत में लिया गया था और गृह मंत्रालय से एनओसी न मिलने के कारण उनकी भारत वापसी में देरी हो रही है और वह फिलहाल लाहौर के एक दारुल अमन में रह रही हैं.
शुक्रवार को बीबीसी से बात करते हुए गृह मामलों के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा, "वह (सरबजीत कौर) मानती हैं कि उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया है और चूंकि वहां (भारत में) मुसलमानों के लिए जीवन बहुत कठिन है, इसलिए उन्हें वापस नहीं भेजा जाना चाहिए."
सरबजीत को भारत वापस भेजने के संबंध में उन्होंने कहा, "यह निर्णय मानवीय सहानुभूति और वर्तमान में वहां अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार के आधार पर लिया जा रहा है. इसी आधार पर मामला आगे बढ़ रहा है और उन्हें वापस न भेजने के संबंध में प्रयास किए जा रहे हैं."
राज्य मंत्री ने लाहौर उच्च न्यायालय में सरबजीत कौर द्वारा दायर याचिका का भी ज़िक्र किया और कहा, "अदालत ने भी यही कहा है और इसमें विदेश मंत्रालय की राय ज़रूरी है. अब गृह मंत्रालय इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा."
जब तलाल चौधरी से पूछा गया कि क्या सरबजीत कौर पर भी कथित भारतीय जासूस होने के आरोप में जांच चल रही है, तो उन्होंने कहा, "हमारे संस्थान इस तरह की चीजें करते रहते हैं. फिलहाल, उनका आवेदन विचाराधीन है जिसमें उन्होंने मानवीय सहानुभूति और भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति व्यवहार के आधार पर बात की है."
"वह खुद इस समय दारुल अमन में हैं, इसलिए इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय जल्द ही इस पर फैसला लेगा."
उन्होंने कहा, "फिलहाल, उनके वीजा की अवधि बढ़ाई जा सकती है और अधिक वीजा सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं."
तीर्थयात्रा वीज़ा को लेकर विवाद
पूर्व संसदीय सचिव और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रमुख सरदार महेंद्रपाल सिंह ने भारतीय महिला को निर्वासित करने की मांग करते हुए लाहौर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी.
तलाल चौधरी के इस सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कि भारतीय नागरिक सरबजीत कौर (नूर) को निर्वासित करने के बजाय उनका वीज़ा बढ़ाया जा सकता है, सरदार महेंद्रपाल सिंह ने बीबीसी को बताया, "अगर सरकार सरबजीत कौर का वीज़ा बढ़ाती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन होगा क्योंकि अगर वह महिला विजिट वीज़ा पर आई होतीं, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन वो तीर्थयात्रा वीज़ा पर आई हैं."
उन्होंने सवाल किया, "अगर यहां का कोई हिंदू सऊदी अरब जाकर इस्लाम धर्म अपना लेता है, तो क्या सऊदी अरब उसे वहां रहने देगा?"
सरदार महेंद्रपाल सिंह के अनुसार, 'सरबजीत कौर सिखों के प्रथम गुरु बाबा गुरु नानक देव जी का जन्मदिन मनाने के लिए भारत से पाकिस्तान आई थीं, लेकिन इस घटना ने धार्मिक समारोह को विवादास्पद बना दिया.'
उन्होंने कहा, "हमें उनके इस्लाम धर्म अपनाने पर कोई आपत्ति नहीं है, दुनिया में बहुत से लोग इस्लाम धर्म अपनाते हैं. मेरी आपत्ति इस बात पर है कि तीर्थयात्रा वीज़ा को विवादित बना दिया गया है और एक पवित्र दिन को विवाद का विषय बना दिया गया है."
उन्होंने आगे कहा कि "यदि कोई व्यक्ति वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद भी रुकता है, तो यह एक अवैध कृत्य है और उसे क़ानून के अनुसार नतीजे भुगतने होंगे."
सरबजीत कौर और उनके पति हिरासत में
सरबजीत कौर चार नवंबर को सिख यात्रियों के जत्थे के साथ पाकिस्तान आई थीं और उनके वीज़ा की मियाद 13 नवंबर तक थी, लेकिन वो वापस भारत नहीं गईं.
रमेश सिंह अरोड़ा ने बीबीसी उर्दू को बताया कि चार जनवरी को ननकाना साहिब के एक गाँव पहरे वाली में सरबजीत कौर और नासिर हुसैन की मौजूदगी के बारे में पता चलने पर ख़ुफ़िया एजेंसियों की टीम ने तत्काल कार्रवाई की.
उनका कहना था कि इस कार्रवाई के दौरान सरबजीत कौर को उनके पाकिस्तानी पति के साथ हिरासत में ले लिया गया. अब उन्हें ननकाना साहिब पुलिस के हवाले किया गया है. इस वक़्त दोनों ननकाना साहिब के थाना सदर में हिरासत में हैं.
रमेश सिंह अरोड़ा के मुताबिक़, पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों ने मिलकर इस मामले की तफ़्तीश की.
एजेंसियों को जांच में पता चला कि सरबजीत कौर और नासिर हुसैन 2016 में टिकटॉक पर मिले थे और इन दोनों ने कई मौक़ों पर वीज़ा के लिए अर्ज़ियां भी दी थीं, लेकिन क़ानूनी वजहों के आधार पर उन्हें वीज़ा नहीं दिया गया.
कोर्ट ने कपल को परेशान न करने का आदेश दिया
गौरतलब है कि नवंबर में सरबजीत कौर के निवेदन पर लाहौर हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस को उन्हें परेशान न करने का आदेश दिया था.
सरबजीत के वकील अहमद हसन पाशा के मुताबिक़, पंजाब पुलिस ने 8 नवंबर को सरबजीत और नासिर की तलाश में उनके घर पर छापा मारा और उन पर शादी ख़त्म करने का दबाव बनाया जा रहा था और इस अर्ज़ी में कोर्ट से सरबजीत कौर और नासिर हुसैन की शादीशुदा ज़िंदगी में दखल न देने का निवेदन किया गया था.
सुनवाई के बाद लाहौर हाई कोर्ट के जज जस्टिस फ़ारूक़ हैदर ने पंजाब पुलिस को सरबजीत को परेशान करने से रोक दिया था और इस बारे में पंजाब पुलिस के आईजी को आदेश जारी किए थे.
हालांकि, शेख़ूपुरा पुलिस के प्रवक्ता राणा यूनुस ने बीबीसी उर्दू को बताया कि पुलिस ने किसी भी भारतीय महिला या उसके पाकिस्तानी पति को परेशान नहीं किया है. उन्होंने कहा, "इस बारे में लगाए गए आरोप सच्चाई के ख़िलाफ़ हैं और पुलिस का उनसे कोई लेना-देना नहीं है."
उन्होंने कहा, "यह मामला सेंसिटिव है, इसलिए इसे अलग-अलग एजेंसियां देख रही हैं और जो भी फ़ैसला लिया जाएगा वह पाकिस्तान के क़ानून के मुताबिक़ होगा."
सरबजीत के वकील ने कहा कि 15 नवंबर को उन्होंने "दोनों को अपने चैंबर में बुलाया था ताकि वे दोनों देशों की एजेंसियों के अधिकारियों के सामने अपने बयान दर्ज करा सकें, लेकिन वादे के बावजूद दोनों पति-पत्नी नहीं आए और नासिर हुसैन का मोबाइल फ़ोन भी बंद हो गया है."
इस्लाम धर्म अपनाना और शादी
सरबजीत कौर 4 नवंबर को सिख तीर्थयात्रियों के साथ पाकिस्तान आई थीं और अगले दिन बाबा गुरु नानक की जयंती के मौक़े पर उन्हें ननकाना साहिब जाना था.
हालांकि, 7 नवंबर को शेखूपुरा के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास महिला के दिए बयान के मुताबिक, उन्होंने पाकिस्तान आने के बाद अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म अपना लिया था और नासिर हुसैन नाम के एक पाकिस्तानी नागरिक से शादी कर ली थी.
इस बयान में उनके वकील अहमद हसन पाशा एडवोकेट का कहना है कि शादी शेखूपुरा की संबंधित यूनियन काउंसिल में रजिस्टर्ड कराई गई थी.
शेख़ूपुरा के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मुहम्मद ख़ालिद महमूद वड़ैच की अदालत में जो दस्तावेज़ जमा करवाए गए थे, उनके मुताबिक़ सरबजीत कौर ने क़ारी हाफ़िज़ रिज़वान भट्टी के आगे इस्लाम क़ुबूल किया, जिसके बाद उनका इस्लामी नाम 'नूर' रखा गया.
उन्हें पांच नवंबर को इस्लाम धर्म क़ुबूल करने का प्रमाण पत्र जारी किया गया था.
अदालत में जो निकाहनामा जमा करवाया गया, उसके मुताबिक़ नासिर हुसैन की उम्र 43 साल, जबकि दुल्हन की उम्र साढ़े 48 साल है. निकाहनामे के मुताबिक़, हक़ मेहर दस हज़ार रुपये मुक़र्रर की गई थी.
इसमें ये भी दर्ज है कि नासिर हुसैन पहले से शादीशुदा हैं और उन्हें दूसरी शादी की इजाज़त की ज़रूरत नहीं.
भारतीय महिला की ओर से अदालत में एक शिकायत भी दायर की गई है, जिसमें पुलिस पर धमकियां देने और झूठा मुक़दमा दर्ज करने के इल्ज़ाम लगाए गए हैं.
उन्होंने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मुहम्मद ख़ालिद महमूद वड़ैच की अदालत में पाकिस्तान की दंड संहिता 200 के तहत दायर किए केस में कहा है कि 'उन्होंने अपनी ख़ुशी से नासिर हुसैन से निकाह किया.'
वो कहती हैं कि "मुझे किसी ने अग़वा नहीं किया, मैंने अपनी आज़ाद मर्ज़ी से शादी की है. मैं अपने माता-पिता के घर से सिर्फ़ तीन कपड़ों में आई हूं और कोई चीज़ अपने साथ नहीं लाई हूं."
इस बयान में उन्होंने दावा किया कि "पुलिस मेरी निकाह करने की वजह से सख़्त नाराज़ है और पांच नवंबर को रात नौ बजे पुलिस अधिकारी ज़बरदस्ती हमारे घर में दाख़िल हुए. अधिकारियों ने कहा कि हमारे साथ चलो, मगर मेरे इनकार पर वो ग़ुस्सा हो गए."
उनका कहना है कि "मेरे शोर मचाने पर पड़ोसी भी आ गए." सरबजीत ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें और उनके पति को पुलिस से सुरक्षा प्रदान की जाए.
सरबजीत कौर नासिर हुसैन को नौ साल से जानती थीं
सरबजीत का ताल्लुक़ भारत के पंजाब के ज़िला कपूरथला से है. कपूरथला की पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच जारी है. सरबजीत क़रीब दो हज़ार सिख यात्रियों के जत्थे में शामिल थीं.
ये जत्था 10 दिन के दौरे के बाद 13 नवंबर को भारत वापस आ गया था, लेकिन सरबजीत कौर उनके साथ वापस नहीं आईं.
बीबीसी पंजाबी के अनुसार नवंबर में कपूरथला के सहायक पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र वर्मा ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी. इस्लाम धर्म अपनाने और शादी करने के बारे में किसी तरह की जानकारी से वर्मा ने इनकार किया था.
उन्होंने कहा कि मीडिया में ऐसी ख़बरें हैं लेकिन पुलिस के पास इस बारे में कोई ठोस सबूत या जानकारी नहीं है.
बीबीसी पंजाबी के सहयोगी संवाददाता रविंदर सिंह रॉबिन से बात करते हुए, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के सचिव प्रताप सिंह ने कहा था कि समिति ने इस मामले की जांच करने के बाद फ़ैसला किया है कि अब से किसी भी अकेली महिला को ऐसे समूहों में नहीं भेजा जाएगा.
भारतीय मीडिया में छपी ख़बरों के मुताबिक़, सरबजीत का तलाक़ हो चुका है और उनकी पिछली शादी से दो बेटे हैं. ख़बरों के अनुसार सरबजीत के पति क़रीब तीन दशकों से इंग्लैंड में रह रहे हैं.
ज़िला कपूरथला के गाँव तलवंडी चौधरियां के एसएचओ निर्मल सिंह के मुताबिक़ उन्हें इस बारे में गाँव के सरपंच से पता चला था.
उधर पाकिस्तान में वकील अहमद हसन पाशा का कहना है कि नासिर हुसैन पेशे से ज़मींदार हैं.
उन्होंने बीबीसी के साथ एक वीडियो शेयर किया, जिसमें सरबजीत को ये कहते सुना जा सकता है कि उनका भारत में तलाक़ हो गया है और उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम क़ुबूल कर नासिर हुसैन से शादी का फ़ैसला किया है.
सरबजीत का दावा है कि वो नासिर हुसैन को नौ साल से जानती हैं.
वकील अहमद हसन पाशा ने बताया कि सरबजीत और नासिर की बातचीत इंस्टाग्राम पर होती रही है और छह महीने पहले दोनों ने शादी करने का फ़ैसला किया था.
वकील ने बताया कि ये दोनों उनके पास क़ानूनी मदद के लिए आए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.