You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ग़्यासुद्दीन बलबन: एक ग़ुलाम के सुल्तान बनने की कहानी - विवेचना
नासिरुद्दीन महमूद इल्तुतमिश के सबसे छोटे बेटे थे. उनके दिल्ली की गद्दी संभालते ही वहां राजनीतिक स्थिरता बहाल होनी शुरू हो गई थी.
मगर इसमें सुल्तान महमूद की कोई ख़ास भूमिका नहीं थी. ऐसा कहा जाता है कि ये काम उसके सबसे ख़ास मंत्री ग़्यासुद्दीन बलबन ने किया था.
उन्हें महमूद के शासनकाल में सबसे ज़्यादा ताक़त मिली हुई थी.
साल 1246 से 1287 तक उन्होंने इस ताक़त का इस्तेमाल भी किया. उन्होंने पहले दो दशक सुल्तान के प्रतिनिधि के तौर पर बिताए और फिर दो दशक दिल्ली के सुल्तान के तौर पर.
विवेचना में रेहान फ़ज़ल सुना रहे हैं ग़्यासुद्दीन बलबन की कहानी.
वीडियो: सदफ़ ख़ान
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.