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ईरान ने अब लाल सागर के एक अहम जल मार्ग को बंद करने की धमकी दी, किन देशों पर कैसा असर
लाल सागर के एक बेहद अहम शिपिंग रूट को लेकर ईरान की धमकियों ने वैश्विक व्यापार में दिक्कत और ज़्यादा बढ़ने को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
ईरान पहले ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर चुका है, जिससे समुद्री यातायात फ़ारस की खाड़ी में ही फंस गया है.
अब वह अदन की खाड़ी और लाल सागर के बीच स्थित बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यापार को बाधित करने की धमकी दे रहा है, जो आगे स्वेज़ नहर तक जाता है.
ईरान ने कहा है कि अगर ज़मीन पर अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए तो वह युद्ध में 'दूसरे मोर्चे खोल' सकता है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़ी तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने एक ईरानी सैन्य सूत्र के हवाले से कहा, "बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य को दुनिया के रणनीतिक स्ट्रेट्स में गिना जाता है, और ईरान के पास इसे ख़तरे में डालने की न सिर्फ़ मंशा है बल्कि प्रामाणिक क्षमता भी है."
ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर हमला करता है तो वह इस जलडमरूमध्य को बाधित कर देगा.
खार्ग द्वीप पर एक बड़ा तेल टर्मिनल मौजूद है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान का तेल 'लेना' चाहते हैं और इस द्वीप पर कब्ज़ा करने पर विचार कर रहे हैं.
बाब अल मंदेब इतना अहम क्यों है?
बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर के अरब वाले किनारे पर यमन और अफ़्रीकी किनारे पर जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित है. हिंद महासागर और अदन की खाड़ी से आने वाले समुद्री यातायात को स्वेज़ नहर तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते से गुज़रना होता है.
115 किलोमीटर लंबा और 36 किलोमीटर चौड़ा यह जलडमरूमध्य 1869 में स्वेज़ नहर खुलने के बाद वैश्विक व्यापार की एक अनिवार्य कड़ी बन गया, क्योंकि इससे यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री रास्ता बन गया.
लाल सागर का यह कॉरिडोर अब दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है, और दुनिया के कुल समुद्री यातायात का करीब एक चौथाई हिस्सा इसी से होकर गुज़रता है.
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल परिवहन होता है और यह रास्ता युद्ध की वजह से लगभग बंद है. अगर बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य बंद होता है, तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति का 12 प्रतिशत हिस्सा और प्रभावित होगा.
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक, मध्य पूर्व और एशिया के देशों से पश्चिमी देशों की ओर जाने वाला करीब 50 लाख बैरल तेल हर रोज़ इसी रास्ते से गुज़रता है.
इसके अलावा, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की वैश्विक खेप का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा भी इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है, जिससे यह दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद अहम मार्ग बन जाता है.
होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के बाद से वैश्विक व्यापार में लाल सागर का महत्व और बढ़ गया है. सऊदी अरब ने यनबू बंदरगाह से सऊदी तेल की आवाजाही के लिए बाब अल मंदेब को एक ट्रांज़िट पाइंट के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. सऊदी अरब अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों से हर दिन पाइपलाइन के ज़रिए वहां लाखों बैरल कच्चा तेल भेजता है.
कच्चे तेल और गैस के अलावा, बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य पूर्व और पश्चिम के बीच मुख्य कारोबारी संपर्क का भी हिस्सा है, जहां से हर दिन दर्जनों मालवाहक जहाज़ गुजरते हैं.
अगर यह जलडमरूमध्य बंद हुआ, तो इसका असर 2021 की उन घटनाओं जैसा होगा, जब पनामा के झंडे वाले मालवाहक जहाज़ एवर गिवेन के फंस जाने से स्वेज़ नहर बंद हो गई थी. इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारी रुकावट पैदा हुई थी, जिसके चलते तेल और कई तरह के सामान की लागत बढ़ गई थी और डिलीवरी में देरी हुई थी.
हूती विद्रोहियों की भूमिका
बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य पर किसी भी तरह का हमला संभवतः हूती विद्रोही करेंगे, जो यमन में ईरान समर्थित एक राजनीतिक और सैन्य समूह है.
नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स से बात करते हुए हूतियों के एक नेता ने कहा कि समूह ईरान के समर्थन में बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य को निशाना बनाने के लिए 'सैन्य रूप से तैयार' है.
28 मार्च को हूतियों ने इसराइल पर हमला किया, जो ईरान के साथ चल रहे अमेरिका-इसराइल युद्ध में उनकी पहली भागीदारी थी. इसराइल ने कहा कि उसने यमन से आई दो मिसाइलों को मार गिराया है.
यह समूह यमन के लाल सागर से लगी समुद्री तटरेखा को नियंत्रित करता है और ग़ज़ा युद्ध के दौरान भी बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य को निशाना बना चुका है. अकेले काम करते हुए, हूतियों ने मिसाइलों और ड्रोन के ज़रिये 100 से ज़्यादा व्यावसायिक जहाज़ों पर हमला किया. इस दौरान दो जहाज़ डूब गए और चार नाविकों की मौत हो गई.
नवंबर 2023 में, इस समूह ने एक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करके लाल सागर में जापान द्वारा संचालित और ब्रिटेन के मालिकाना हक़ वाले एक मालवाहक जहाज़ को हाईजैक कर लिया था.
हालांकि हूतियों का दावा था कि वे सिर्फ़ इसराइल से जुड़े जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन इन्हें बड़े पैमाने पर अंधाधुंध हमले बताया गया. इसके बाद दुनिया की कई सबसे बड़ी शिपिंग और तेल कंपनियों ने इस इलाक़े से होकर जाने वाले अपने जहाज़ रोक दिए.
अमेरिका के इस दावे के बीच कि हूतियों ने घुटने टेक दिए हैं, और इसके जवाब में हूतियों के इस दावे के बीच कि पीछे हटने वाला अमेरिका था, हमले आखिरकार थम गए. लेकिन विश्लेषकों को चिंता है कि वे फिर से शुरू हो सकते हैं.
बीबीसी की मुख्य अंतरराष्ट्रीय संवाददाता लीस डुसेट कहती हैं, "यह हमेशा से उम्मीद की जा रही थी कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो यमन के हूती इसमें शामिल होंगे."
वह आगे जोड़ती हैं, "हूतियों का उत्तर पश्चिमी यमन पर गहरा प्रभाव है और उन्होंने अब तक अपना सबसे ताक़तवर हथियार इस्तेमाल नहीं किया है- और वह है बाब अल मंदेब के ज़रिए गुजरने वाले यातायात को बाधित करने की उनकी क्षमता. यह रास्ता लाल सागर को वैश्विक व्यापार मार्गों से जोड़ने वाला एक अहम समुद्री चोकपाइंट है."
26 फ़रवरी को अमेरिकी परिवहन विभाग के मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन ने एक नोटिस में कहा, "हालांकि अक्तूबर 2025 में इसराइल और ग़ज़ा के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद से हूती आतंकवादी समूह ने किसी व्यावसायिक जहाज़ पर हमला नहीं किया है, लेकिन हूती इस क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों, जिसमें व्यावसायिक जहाज़ भी शामिल हैं, के लिए अब भी एक ख़तरा बने हुए हैं."
दबाव में वैश्विक शिपिंग
बाब अल मंदेब का अरबी में मतलब होता है 'आंसुओं का दरवाज़ा' या 'दुख का द्वार'. यह नाम वहां मौजूद ख़तरों को दर्शाता है, जिनमें तेज़ समुद्री धाराओं और अनिश्चित हवाओं से लेकर समुद्री डकैती और संघर्ष तक शामिल हैं.
2008 से 2012 के बीच बाब अल मंदेब जलडमरूमध्य और इसके आस-पास के जल क्षेत्र में कई समुद्री डकैती की घटनाएं हुईं-जिन्हें ज़्यादातर सोमाली समूहों ने अंज़ाम दिया, जो फ़िरौती के लिए जहाज़ों के चालक दल का अपहरण करते थे. इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय और शिपिंग कंपनियों ने इस क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी थी.
आज अगर इस मार्ग को बंद कर दिया गया, तो इससे ऊर्जा बाज़ार का संकट और गहरा जाएगा, जो पहले ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति से दबाव में है.
खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग बाधित होने से ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतें संकट से पहले के लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 115 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं.
उपभोक्ता वस्तुओं से लेकर कृषि उत्पादों तक, कई तरह के सामान से जुड़ा वैश्विक व्यापार भी इसका असर महसूस कर रहा है. किसी और समुद्री मार्ग में नया व्यवधान कीमतों को और ऊपर पहुंचा सकता है और ईरान के साथ संघर्ष से पैदा हुए आर्थिक प्रभाव को और गहरा कर सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.