जिनका आधा सौंदर्य ही दिखा पाता था फ़िल्मी पर्दा

    • Author, इंदु पांडेय
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

कुछ चेहरे आँखों में बसते हैं. उन्हीं में एक चेहरा है मधुबाला का जो आज भी उनके चाहने वालों की आँखों में रहता है.

ज़िंदगी के महज़ 36 साल और एक लंबी कहानी, जिसको सुनते हुए कभी थकन नहीं होती. 14 फरवरी को दिल्ली में पैदा हुई मधुबाला सिल्वर स्क्रीन की वीनस कहलाईं.

मधुबाला जिनको आज भी पढ़ा जाता है और उससे कहीं ज्यादा देखा जाता है. आज भी उनके पोस्टर सबसे ऊपर रहते हैं.

फिल्म फेयर के एडिटर रहे बीके करंजिया के लिखे एक लेख में इस बात का ज़िक्र है, "मधुबाला ने अपने कॉन्ट्रैक्ट में ये भी लिखना शुरू कर दिया था कि उनके साथ नायक की भूमिका कौन करेगा इसका फैसला उन्हीं का होगा."

इतना ही नहीं आज बहुत से फिल्म स्टार अपने साथ बॉडीगार्ड रखते हैं. बॉलीवुड में इसकी शुरुआत मधुबाला ने ही की थी.

मधुबाला जिनकी हर कहानी सच्ची लगती है. बीके करंजिया अनुसार, 'जब वो पहली बार मधुबाला से मिले तब लगा फ़िल्मी पर्दा मधुबाला का आधा सौंदर्य ही दिखा पाता है. वास्तव में वो कहीं ज्यादा सुंदर थीं.'

आज भले ही हॉलीवुड में प्रियंका चोपड़ा काम कर नाम कमा रही हों, लकिन सालों पहले मधुबाला को हॉलीवुड के प्रसिद्ध निर्माता फ्रैंक काप्रा फिल्मों का ऑफर दे चुके थे.

वैलेंटाइंस डे पर पैदा हुईं मधुबाला के बचपन का नाम था मुमताज जहाँ बेगम था.

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 'मधुबाला' सिर्फ एक नाम नहीं है. उन्‍हें उनकी बेदाग खूबसूरती के लिए 'वीनस ऑफ इंडियन सिनेमा' कहा जाता है.

उनकी पहली फिल्‍म 'बसंत' (1942) थी. देविका रानी इस फिल्‍म में उनकी एक्‍टिंग से बहुत प्रभावित हुईं और उनका नाम मुमताज से बदलकर 'मधुबाला' रख दिया.

खदीजा अकबर ने मधुबाला पर 'आई वांट टू लिव' नाम से किताब लिखी. उनके अनुसार मधुबाला अपनी समय की ऐसी अदाकारा थीं जो समय की बेहद पाबंद रहीं, जो स्टूडियो समय पर पहुंचा करती थीं.

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