क्या राष्ट्रवाद के भरोसे कंगना रनौत राजनीति में आना चाहती हैं?

- Author, सूर्यांशी पांडेय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
आंदोलन के रथ पर सवार होकर झांसी की रानी की तरह वो अपने रास्ते में आने वाले भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म), पक्षपात और आलोचनाओं का दमन करती गईं लेकिन हाल ही में मीडिया के प्रति अपने विचारों को व्यक्त करते वक़्त लोगों को पता ही नहीं चला कब मणिकर्निका के किरदार से निकलकर वो 'जजमेंटल है क्या' की बॉबी बन गईं.
ख़ैर यही तो कलाकार की ख़ूबी होती है लेकिन असल ज़िन्दगी की कंगना और उनके विचारों को समझने का प्रयास तो किया ही जा सकता है.
बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में कंगना से हमने उन सभी विवादों पर बात की, जिनकी वजह से वो आलोचनाओं में आई हैं.
07 जुलाई को 'जजमेंटल है क्या' फ़िल्म के प्रमोशन के दौरान मुंबई की अंधेरी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई थी, जहां कई पत्रकार पहुंचे थे.

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क्या था विवाद
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में फ़िल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर से लेकर कंगना के को-एक्टर राजकुमार राव और फ़िल्म के निर्देशक प्रकाश कोवेलामुदी भी मौजूद थे.
सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू ही हुआ था कि पीटीआई के एक पत्रकार ने कंगना को संबोधित करते हुए माइक हाथ में लेकर सवाल पूछना भी शुरू नहीं किया था कि कंगना उस पत्रकार पर भड़क उठीं.
उन्होंने स्टेज पर बैठे-बैठे उस पत्रकार से कहा. "जस्टिन तुम तो हमारे दुश्मन बन गए हो. बड़ी घटिया बातें लिख रहे हो. इतना गंदा सोचते कैसे हो?"
इन आरोपों को सुनकर उस पत्रकार ने सहजता से कंगना को उस आर्टिकल के बारे में बताने को कहा जिसको लेकर वो इतनी नाराज़ हैं लेकिन कंगना फिर चुप हो गईं.
पत्रकार ने उनपर बड़े स्टार होने पर बिना किसी बात के दबाव बनाने का आरोप लगाया और फिर एक बात से दूसरी बात निकलती चली गई.
वहां मौजूद कुछ पत्रकार भी कंगना के व्यवहार को देखर भड़क गए और किसी तरह से मामला थोड़ा शांत हुआ.
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बैन कर दी गईं कंगना
उसके बाद एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने कंगना को बैन कर दिया, जिसका समर्थन मुंबई प्रेस क्लब, प्रेस क्लब और प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने भी किया.
इसके बाद कंगना ने ट्विटर पर दो वीडियो जारी करते हुए मीडिया पर हमला किया और फिर लीगल नोटिस भी भेजा.
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जब बीबीसी ने कंगना से पूछा कि वो उस पत्रकार की किस आर्टिकल पर नाराज़ हुई थीं तो उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा. हालांकि कंगना कहती हैं कि उनको इस बात का बुरा लगा था कि उस पत्रकार ने मणिकर्निका के नाम को बिगाड़ा था. जबकि प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो में वह 'जिंगोइस्टिक' बताए जाने से नाराज़ दिखाई दे रही हैं.

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"राष्ट्रवादी होना क्या मूर्खता है"
कंगना ने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कहा कि बॉलीवुड में यूं तो डॉन, अबु सलेम, नशे के आदी लोगों पर फ़िल्में बनती हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है लेकिन अगर कोई भगत सिंह, जीजा बाई, छत्रपति शिवाजी या झांसी की रानी पर फ़िल्म बनाना चाहे तो उसे 'जिंगोइस्टिक' बताया जाता है.
उनका कहना है कि क्या भारत के वीरों और रत्नों पर फ़िल्म बनाना ग़लत है, उनकी कहानी भी सामने आनी चाहिए और किसी को तो इसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी. वह कहती है, "मुझे राष्ट्रवादी कहलाए जाने में कोई गुरेज़ नहीं है. राष्ट्रवादी होना कोई शर्म की बात नहीं है."
वह पूछती है कि क्या राष्ट्रवादी होना मूर्खता है?

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उनसे पूछा गया कि बॉलीवुड इस बात के लिए बदनाम है कि जैसी भारत में सरकार होती है वैसी उनकी विचारधारा हो जाती है, तो क्या कंगना अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा सिर्फ़ इसलिए रखती हैं क्योंकि मौजूदा सरकार राष्ट्रवाद पर ज़ोर देती है?
इस सवाल पर उनका कहना था कि वह इस बार के लोकसभा चुनाव से पहले ही राष्ट्रवाद पर अपने विचार रखती आईं हैं.
तो क्या कंगना को भविष्य में राजनीति में देख सकते हैं?
इस सवाल के जवाब में कंगना कहती हैं कि उन्हें जो मुक़ाम फ़िल्मी जगत में हासिल है, उसकी राजनीति में उम्मीद नहीं की जा सकती है. फ़िल्मी दुनिया ने उन्हें अपनी बात कहने के लिए सार्थक मंच दिया है, उन्हें राजनीति में अपना भविष्य नहीं दिखता है.
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ट्विटर पर जारी किए वीडियों पर कंगना...
ट्विटर पर मीडिया को लेकर शेयर किए गए अपने वीडियो पर कंगना कहती हैं, "मैंने दो वीडियो जारी की थी, जिसमें से पहले वीडियो में साफ़ तौर पर बताया था कि मैं उस मीडिया के ख़िलाफ़ नहीं हूं जो अपना कर्तव्य निभा रहे हैं बल्कि उस मीडिया के ख़िलाफ़ हूं जो मूवी माफ़िया के साथ मिलकर मेरे ख़िलाफ़ लिखते हैं."
कंगना का मानना है कि कुछ मीडिया के लोग बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद करने वाले लोगों के साथ मिलकर उनको ऑनलाइन ट्रोल करते हैं और हमेशा उनके विरोध में लिखते हैं.
उन्हें इंग्लिश मीडिया वालों से भी शिकायत है जो उनके हिंदी भाषी होने के कारण उनका मज़ाक़ उड़ाते हैं.
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आलोचना पचा नहीं पाती कंगना?
आजकल बॉलीवुड कलाकार अपनी आलोचना पढ़कर जल्दी असहिष्णु क्यों हो जाते हैं? अगर उनकी एक फ़िल्म पर कोई पत्रकार आलोचनात्मक रिव्यू करता है तो वह आलोचना पचा क्यों नहीं पातीं, इन सवालों पर कंगना ने कहा, "फ़िल्म रिव्यू ख़राब मिलने से किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए. लेकिन मुझे फ़िल्म रिव्यू के नाम पर ट्रोल किए जाने से आपत्ति है."
मीडिया के कुछ कुनबे से ख़फ़ा कंगना से जब यह पूछा गया कि इतने विवादों से जुड़ने के कारण उनको अपनी इंडस्ट्री में दोस्त बनाने में दिक़्क़त तो नहीं होती, उन्होंने कहा कि उनके जैसे बहुत लोग हैं इस इंडस्ट्री में और उनके कई दोस्त हैं जैसे अनुपम खेर, किरण खेर और निर्देशक अश्वनी और उनका परिवार.
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रंगोली और उनके ट्वीट्स
उनकी बड़ी बहन रंगोली के ट्वीट्स पर सवाल करते हुए हमने उनसे तापसी पर साधे गए निशाने पर बात की, जहां तापसी ने जब 'जजमेंटल है क्या' फ़िल्म के ट्रेलर की तारीफ़ करते हुए ट्वीट किया था तो रंगोली ने लिखा था कि तापसी कंगना की कॉपी करती हैं.
इसपर कंगना ने अपनी बहन रंगोली का पक्ष लेते हुए कहा कि तापसी ने उनके बारे में कुछ ठीक बातें नहीं की थी. उन्होंने कहा कि तापसी ने एक बार कहा था कि "कंगना को डबल-फ़िल्टर की ज़रूरत है" और कंगना कहती हैं कि तापसी ने भाई-भतीजावाद को लेकर कहा था कि भाई-भतीजावाद का रोना वो रोते हैं जिनके पास कोई काम नहीं होता.
कुछ दबी तो कुछ खुले अंदाज़ में कंगना कई मुद्दों पर बात करती नज़र आईं. कंगना ने इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह दिल की सुनती हैं और ग़ुस्सैल भी हैं.
वह कहती हैं कि "कभी-कभी तो मुझे लगता है कि मैं सनकी हूं. मुझे अपने काम के प्रति अजीब सी सनक हैं और किसी के पीछे पड़ जाती हूं तो वो चीज़ सीख कर रहती हूं."
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