व्यवस्था के मारे खेल और खिलाड़ी

अभिनेता जॉन अब्राहम भारतीय खेल और खिलाड़ियों की ख़राब हालत के लिए व्यवस्था को ज़िम्मेदार मानते हैं.
ये पूछे जाने पर कि भारतीय एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़िया प्रर्दशन क्यों नहीं कर पाते, अब्राहम कहते हैं, "सिर्फ़ भारतीय एथलीट ही नहीं, सभी खेलों में यही हाल है. आज भारतीय फ़ुटबॉल या हॉकी कहां है? इसके लिए व्यवस्था और ट्रेनिंग भी ज़िम्मेदार है. व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत है. साफ़ बात ये है कि खेलों में नौकरशाही बहुत ज़्यादा है और उसे ख़त्म करने की आवश्यकता है."
दूसरी ओर अभिनेता राहुल बोस मानते हैं कि इसकी एक वजह संस्कृति और एक वजह शारीरिक संरचना है.
राहुल कहते हैं, "भारतीयों की शारीरिक संरचना अफ़्रीकी या यूरोपीय खिलाड़ियों से अलग होती है. साथ ही आप 21 साल की उम्र में भागना शुरू करके 24 साल तक विश्व स्तरीय धावक बनने की उम्मीद नहीं कर सकते. इसके लिए बचपन से ही शुरुआत करना ज़रूरी है."
कार्यक्रम
हाल ही में जॉन अब्राहम और राहुल बोस जनवरी 2011 में होने वाली मुंबई मैराथन के प्रचार के लिए एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने ये बातें कहीं.

राहुल बोस और मिलिंद सोमन कई वर्षों से मुंबई मैराथन से जुड़े हैं जबकि जॉन अब्राहम इसके ब्रैंड एम्बैसेडर हैं.
जॉन कहते हैं, "मुंबई मैराथन से जुड़ना बहुत सम्मान की बात है चाहे आप इससे प्रतियोगी या ब्रैंड एम्बैसेडर के तौर पर जुड़े. मुझे उम्मीद है कि किसी भी कार्यक्रम या सामाजिक मुद्दे से किसी जानी-मानी हस्ती, ख़ासकर फ़िल्मी हस्ती के जुड़ने से युवा वर्ग को आकर्षित करने में मदद मिलती है."
लेकिन राहुल बोस मानते हैं कि किसी भी मुद्दे के साथ सिर्फ़ किसी जानी-मानी हस्ती का जुड़ना ही काफ़ी नहीं है.
राहुल कहते हैं कि मुंबई मैराथन या ऐसे ही किसी मुद्दे के साथ सिर्फ़ किसी सेलेब्रिटी का जुड़ना ही काफ़ी नहीं है. ज़रूरी ये है कि वो सही हस्ती हो जो उस मुद्दे पर भरोसा करती हो.
































