दिल तो बच्चा है जी !

स्टैनली का डब्बा

इमेज स्रोत, official website

विशाल भारद्वाज की फ़िल्म इश्किया का गीत 'दिल तो बच्चा है जी' अच्छा ख़ासा मशहूर हुआ. गुलज़ार ने इस गाने को लिखा है. विशाल ख़ुद भी इस गाने के बोलों से पूरी तरह से सहमत हैं.

मुंबई में अमोल गुप्ते की बाल फ़िल्म 'स्टैनली का डब्बा' को प्रमोट करने पहुंचे विशाल भारद्वाज ने कहा, "इंसान चाहे जितना बड़ा हो जाए, लाख गंभीर दिखने की कोशिश करे. वो अंदर से हमेशा बच्चा ही होता है. उम्र सिर्फ़ शारीरिक तौर पर बढ़ती है. मानसिक तौर पर इंसान बच्चा ही होता है."

'स्टैनली का डब्बा' के बारे में बात करते हुए विशाल ने इसके निर्देशक अमोल गुप्ते की जमकर तारीफ़ की और कहा कि ये फ़िल्म बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी काफ़ी पसंद आएगी.

विशाल भारद्वाज कहते हैं, "ये एक ज़बरदस्त फ़िल्म बन पड़ी है. अब अमोल भी चाहें तो दोबारा ऐसी फ़िल्म नहीं बना पाएंगे. इसे देखते हुए मैं अपने बचपन में खो गया."

अमोल गुप्ते विशाल की फ़िल्म 'कमीने' में अभिनय भी कर चुके हैं. इसमें उन्होंने नकारात्मक भूमिका निभाई थी जिसे ख़ूब वाहवाही मिली.

विशाल भारद्वाज

इमेज स्रोत, bbc

इमेज कैप्शन, विशाल फ़िल्म 'स्टैनली का डब्बा' से बहुत प्रभावित हैं.

'स्टैनली का डब्बा' के बारे में अमोल ने बताया कि स्कूल में खाने की छुट्टी के दौरान बच्चों के टिफ़िन से जो ख़ुशबू आती है उसी से उन्हें ये फ़िल्म बनाने का आइडिया आया.

उन्होंने आगे कहा, "शिक्षा को मनोरंजक बनाना बेहद ज़रूरी है. अगर शिक्षक बच्चों के साथ लुत्फ़ उठाने लगें तो क्लासरूम से बेहतर जगह कुछ नहीं हो सकती."

अमोल ने बताया कि फ़िल्म बनाने के दौरान उन्हें लोगों का ज़बरदस्त सहयोग मिला और शंकर महादेवन, विशाल डडलानी, सुखविंदर, शान और हंसिका अय्यर जैसे गायकों ने इसमें गाने गाए और एक पैसा भी नहीं लिया. 'स्टैलनी का डब्बा' 13 मई को रिलीज़ हो रही है.

'तारे ज़मीन पर' और अमोल गुप्ते

अमोल गुप्ते

इमेज स्रोत, official website

इमेज कैप्शन, 'स्टैनली का डब्बा' के निर्देशक अमोल गुप्ते. फ़िल्म में उन्होंने एक शिक्षक का रोल भी निभाया है.

'स्टैनली का डब्बा' बतौर निर्देशक अमोल गुप्ते की पहली फ़िल्म है. इससे पहले वो आमिर ख़ान की 'तारे ज़मीन पर' का कहानी लिख चुके हैं. वो इसके क्रिएटिव डायरेक्टर भी थे.

दरअसल अमोल पहले इसका निर्देशन करने करने वाले थे. लेकिन बाद में कथित तौर पर आमिर के साथ रचनात्मक मतभेदों के चलते वो निर्देशन की ज़िम्मेदारी से हट गए और आमिर ने फ़िल्म का निर्देशन किया.

मीडिया में ख़बरें आईं कि इसकी वजह से अमोल आमिर से नाराज़ हैं.

इस बारे में पूछने पर अमोल कहते हैं, "इंसान का काम है आगे बढ़ना. बीती बातों को याद करने से कोई फ़ायदा नहीं. मैं सब कुछ भूल चुका हूं."