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अमरनाथ यात्राः आख़िर सुरक्षा में चूक कहाँ हुई?
- Author, बीनू जोशी
- पदनाम, जम्मू से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
सोमवार को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में हिंदू तीर्थयात्रियों पर हुए चरमपंथी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियां इस जांच में जुट गई हैं कि आखिर चूक कहां हुई.
यात्रा का संचालन करने वाली अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर राज्यपाल एन. एन. वोहरा द्वारा बुलाई गई आपातकालीन बैठक में इस पर विचार-विर्मश किया गया. बताया जा रहा है कि ख़ुफिया एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा की शुरुआत से पहले ही हमले की चेतावनी दी थी.
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, 'अमरनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए सेना, सीआरपीएफ़, बीएसएफ़ और राज्य पुलिस के क़रीब एक लाख जवान तैनात किए गए हैं." हालांकि उन्होंने और कुछ बताने से इंकार कर दिया. प्रशासन इस यात्रा पर नज़र रखने के लिए पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल भी कर रहा है.
अमरनाथ यात्रा पर लगभग 15 वर्षों के दौरान पहली बार चरमपंथी हमला हुआ है. इससे पहले 1 अगस्त 2000 को इस तीर्थयात्रा पर सबसे बड़ा चरमपंथी हमला हुआ था. समुद्र तट से 13,888 फीट की ऊंचाई पर पहलगाम में स्थित श्राइन बोर्ड के बेस कैंप पर हुए हमले में तब 45 लोगों की मौत हुई थी.
सोमवार को हुए चरमपंथी हमले में मृतक सभी सात तीर्थयात्री पश्चिमी गुजरात से हैं.
निंदा
अमरनाथ यात्रा पर हुए चरमपंथी हमले की बहुत निन्दा की जा रही है.
भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार की रात अनंतनाग के अस्पताल का दौरा किया. उन्होंने इस दौरान घायलों की देखरेख कर रहे तीर्थयात्रियों से इस हमले को लेकर माफ़ी भी मांगी.
महबूबा ने कहा, "हमें माफ़ कर दें. यह नहीं होना चाहिए था." इससे पहले दिए एक बयान में उन्होंने कहा, "यह हमला कश्मीर के उस लोकाचार को लगा झटका है जो मेहमानों को मेज़बानों द्वारा सुरक्षा की मौखिक गारंटी देता है."
मुख्य विपक्षी पार्टी नेशनल कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी इस हमले की निंदा की है. उन्होंने कहा, "इस हमले की जितनी निंदा करें वो कम है."
अलगाववादी नेताओं सयैद अली शाह गिलानी, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और यासीन मलिक ने भी एक संयुक्त बयान में इस हमले की निंदा की है. उन्होंने कहा है कि यह हमला कश्मीर के स्वभाव के विपरीत है.
मृतक
इस बीच मृतकों के शव को दिल्ली होते हुए गुजरात भेज दिया गया है.
मंगलवार को तीर्थयात्रियों की मौत के विरोध में जम्मू लगभग पूरी तरह बंद रहा. प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सभी शिक्षण संस्थानों को भी बंद रखा.
कश्मीर ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक मुनीर खान ने मीडिया को बताया कि यह हमला लश्कर के चरमपंथियों ने किया है जिनकी जड़ें पाकिस्तान में मौजूद हैं. उन्होंने इस बारे में और जानकारी नहीं दी.
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