क्या है भारत का 'कोल्ड स्टार्ट' जिससे डरा पाकिस्तान?

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    • Author, भरत शर्मा और वात्सल्य राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाक़ान अब्बासी का कहना है कि उनका देश भारतीय सेना की 'कोल्ड स्टार्ट' रणनीति से निपटने के लिए छोटी रेंज के परमाणु हथियार बना रहा है.

उन्होंने कहा, ''जहां तक टेक्टिकल परमाणु हथियारों की बात है, तो हमने ऐसे कोई हथियार अभी फ़ील्ड नहीं किए है. हमने शॉर्ट रेंज परमाणु हथियार विकसित किए हैं ताकि भारत की 'कोल्ड स्टार्ट' रणनीति का सामना किया जा सके.''

पाकिस्तान बार-बार जिस 'कोल्ड स्टार्ट' रणनीति का नाम ले रहा है, वो आख़िर है क्या? क्या वाकई भारत ऐसी किसी सैन्य रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है? और अगर कर रहा है तो इससे पाकिस्तान को क्या नुकसान है?

कोल्ड स्टार्ट का मतलब क्या?

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ऐसा कहा जाता है कि ये रणनीति कई सालों से अमल में है, लेकिन भारत की सरकार और सशस्त्र बलों ने ये बात कभी स्वीकार नहीं की है.

एक इंटरव्यू में चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत ने जब इस साल की शुरुआत में कार्यभार संभाला था तो सार्वजनिक तौर पर इस मिलिट्री डॉक्टरिन के वजूद में होने की बात कही थी.

लेकिन ये डॉक्टरिन आख़िर है क्या? कोल्ड स्टार्ट का मतलब है 'हॉट वॉर' से बचने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति. ऐसा कहा जाता है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के साथ संभावित जंग में इसे इस्तेमाल करने के लिए अपनाया है.

इसके तहत भारतीय सेना की अलग-अलग शाखाएं, एकीकृत बैटल ग्रुप की तरह ऑफ़ेंसिव ऑपरेशन चलाती है.

पाकिस्तान से कैसे निपटा जाएगा?

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इस डॉक्टरिन का लक्ष्य टकराव की स्थिति में भारत के पारंपरिक सुरक्षा बलों को सीमित हमले करने की स्थिति में लाना है ताकि पाकिस्तान की तरफ़ से परमाणु प्रतिक्रिया को भी रोका जा सके.

इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार और रक्षा मामलों के जानकार सुशांत सिंह से जब इस डॉक्टरिन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बीबीसी हिंदी को कोल्ड स्टार्ट के बारे में तफ़्सील से बताया.

उन्होंने कहा, ''जब साल 2001 में संसद पर हमले के बाद भारतीय सेना मोबिलाइज़ (हरकत में आई) हुई तो उन्हें इसमें काफ़ी वक़्त लगा. ऐसा इसलिए क्योंकि वो देश के अंदरूनी क्षेत्रों से आई थी.''

सेना को मोबिलाइज़ करने की कवायद

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''इसके बाद भारतीय सरकार और सेना में इस बात का विचार हुआ कि ऐसा क्या किया जाए कि जब पाकिस्तान की तरफ़ से हमला हो तो भारतीय सेना को जल्द से जल्द मोबिलाइज़ किया जा सके.''

उन्होंने कहा, ''इस पर जो योजना बनाई गई, उसे कोल्ड स्टार्ट कहा गया. सेना की सारी टुकड़ियों को बॉर्डर के और नज़दीक लगाने की बात हुई. प्लानिंग, लॉजिस्टिक में बदलाव लाने की बात हुई.''

सिंह के मुताबिक जिस तरह गाड़ी को गर्म किए बिना स्टार्ट किया जाता है, उसी तरह सेना को भी तैयार किया जाता है.

क्या बदलाव होते हैं?

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इसके तहत कुछ ब्रिगेड, बटालियन आगे आ जाती हैं. पटरी और रास्तों को सही तरह से इस्तेमाल करने की कोशिश होती है. कुछ योजनाएं बनाई जाती हैं और कुछ यूनिट के ऑपरेशनल रोल बदले जाते हैं.

इसे लेकर पाकिस्तान क्यों चिंतित है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''भारत सरकार ने ये बात कभी नहीं मानी कि वो कोल्ड स्टार्ट डॉक्टरिन पर अमल कर रही है, उसके इसे कभी स्वीकार नहीं किया, सेना ने एक-दो बार किया लेकिन सरकार ने कभी नहीं.''

''ऐसे में ये कहना कि इस वजह से पाकिस्तान छोटी रेंज की मिसाइल तैयार कर रहा है, तो ये गलत है. वो इसे बहाने की तरह इस्तेमाल कर रहा है. टेस्टिंग करने के लिए ये सब कह रहा है.''

साल 2001 में क्यों सोचा गया?

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क्या दूसरे मुल्क़ भी कभी ऐसा करते हैं, सिंह ने कहा, ''ऐसा कोई वाकया तो देखने को नहीं मिलता. दरअसल कोल्ड स्टार्ट का मकसद है सेना को मोबिलाइज़ करने में लगने वाले वक़्त को कम करना.''

एक और जानकार ने भी इस डॉक्टरिन के बारे में कुछ-कुछ यही बात कही.

सुशांत सरीन ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''डॉक्टरिन और बैटल प्लान में काफ़ी फ़र्क होता है. जब 2001 में संसद पर हमला हुआ तो पाकिस्तान को दंडित करने की बात हुई और सेना को तैयार होने के लिए कहा गया. जब तक सेना तैयार हुई तब तक हालात बदल चुके थे.''

हमला कैसे करेंगे?

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उन्होंने कहा, ''तब ये बात महसूस की गई जब मोबिलाइज़ करने में इतना वक़्त लगता है तो सेना की पहल का मकसद ही ख़त्म हो जाता है. तो एक बैटल प्लान बनाया गया कि अगर पाकिस्तान कोई हिमाकत करता है तो भारत की सेना 24 से 48 घंटे में सीमा के अलग-अलग हिस्सों में हमले कर सके.''

सरीन के मुताबिक ऐसा होने पर जब तक दुश्मन इन हमलों पर प्रतिक्रिया देता है, तब तक बाकी सेना को भी हमले की मुद्रा में लाया जा सकता है.

पाकिस्तान क्या बोला?

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उन्होंने कहा, ''अब पाकिस्तान ने इसका ये तोड़ टेक्टिकल परमाणु हथियारों के रूप में निकाला जो एक सीमित दायरे में हमला करते हैं और इनकी क्षमता भी कम होती है.''

सरीन ने बताया कि इसमें कोई नहीं बात नहीं है क्योंकि पाकिस्तान ये पहले भी कहता रहा है. ना तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जंग छेड़ सकते हैं और ना ही उसे रोक सकते हैं. वो अधिकार फ़ौज के पास है.

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