ब्लॉग: बिकिनी राउंड के बिना ब्यूटी कॉन्टेस्ट देखेंगे?

मिस अमरीका

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, दिव्या आर्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

अमरीका की सबसे ख़ूबसूरत औरत चुनने की प्रतियोगिता, 'मिस अमरीका' में अब 'बिकिनी राउंड' नहीं होगा. आयोजकों ने कहा है कि अब हिस्सा लेने वाली मॉडल्स को शारीरिक ख़ूबसूरती के पैमाने पर नहीं आंका जाएगा.

प्रतियोगिता में भाग लेने वाली औरतें 'बिकिनी राउंड' में कपड़े के दो हिस्सों की बनी 'टू-पीस बिकिनी' पहनकर रैम्प पर चलती हैं और उस पर उन्हें आंका जाता है.

पिछले साल 'मिस अमरीका' के बोर्ड के पुरुष सदस्यों की कुछ ई-मेल्स लीक हो गई थीं. उनसे पता चला कि सदस्यों ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाली मॉडल्स के बारे में भद्दी टिप्पणियां की थीं. इसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

'मिस अमरीका' के बोर्ड में अब सिर्फ़ औरतें हैं. बोर्ड की अध्यक्ष 1989 की विजेता ग्रेचन कार्लसन ने ये घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रतियोगियों को सूझबूझ, पसंद और जुनून के आधार पर जांचा जाएगा.

ऐश्वर्या राय

इमेज स्रोत, Getty Images

पर सौंदर्य प्रतियोगिताओं का मक़सद तो ख़ूबसूरती आंकना ही है, तो 'बिकिनी राउंड' पर इतनी असहजता क्यों? आख़िर भारत में भी इसका तजुर्बा पुराना है.

जब फ़ेमिना पत्रिका ने 1964 में पहली 'मिस इंडिया' प्रतियोगिता आयोजित की तब भी 'स्विमसूट राउंड' था.

फ़र्क़ इतना कि तब 'स्विमसूट' टू-पीस की जगह एक कपड़े के हुआ करते थे और बदन को ज़्यादा ढकते थे.

जब सुष्मिता सेन और ऐश्वर्या राय ने 1994 में ये प्रतियोगिता जीतीं तब भी भारत में 'स्विमसूट' का रूप नहीं बदला था.

पर तब इतना ही काफ़ी क्रांतिकारी था बल्कि सौंदर्य प्रतियोगिताओं को देखने की बड़ी वजह भी था.

मॉडल्स को छोटे कपड़ों में ऐसे औपचारिक कार्यक्रम में देखना आज आम महसूस हो सकता है पर 1980-90 के दशकों में जब केबल टेलिविज़न हमारे ड्राइंग रूम में दाख़िल नहीं हुआ था, ये बहुत ख़ास था.

मिस अमरीका

इमेज स्रोत, Getty Images

लड़कों के लिए ही नहीं, लड़कियों के लिए ये एक ऐसी दुनिया की खिड़की थे जो आम तौर पर बंद रहती थी.

समय के साथ बाज़ार ताकतवर होता गया. औरतों की ख़ूबसूरती का पैमाना चेहरे से उनके शरीर के आकार तक जुड़ गया और सौंदर्य प्रतियोगिताएं उस बदलाव का प्रतीक बन गईं.

स्टेज पर सैकड़ों लोगों के जमावड़े के बीच और टेलिविज़न स्क्रीन के उस तरफ़ बैठे करोड़ों दर्शकों के सामने 'स्विमसूट' में किए जाने वाला ये 'वॉक' ख़ूबसूरत बदन का मापदंड तय करने लगा.

'स्विमसूट' ख़ुद एक कपड़े से फटकर दो का हो गया. बहस छिड़ी कि औरत के बदन की ये 'नुमाइश' उसे एक वस्तु की तरह देखने के चलन को बढ़ावा देती है.

ये बदलाव 2000 के दशक से सौंदर्य प्रतियोगिताओं में ही नहीं मुख्यधारा के मीडिया में आम हो गया.

मिस अमरीका

इमेज स्रोत, Getty Images

अब कम कपड़ों में, एक ख़ास तरह के शरीर के आकार वाली महिलाएं आम तौर पर फ़िल्मों और म्यूज़िक वीडियो में दिखाई जाने लगीं.

'मिस इंडिया' भी आम हो गया. कई और सौंदर्य प्रतियोगिताएं, जैसे 'मिसेज़ इंडिया', 'मिस डीवा', 'मिस सुपरमॉडल' वगैरह की जाने लगीं.

एक तरह का शरीर और लोकप्रिय हो गया और औरतों को उनके शरीर के चश्मे से देखना और आम.

इस नए 'नॉर्मल' यानी आम पर कई बार बहस छिड़ी और मांग उठी कि 'बिकिनी राउंड' को बंद किया जाए.

साल 2014 में 'मिस वर्ल्ड' में ये राउंड हटाया गया और उसके दो साल बाद 'मिस इंडिया' प्रतियोगिता में.

मिस अमरीका

इमेज स्रोत, Getty Images

अब इस साल 'मी-टू' अभियान के बाद अमरीका में छिड़ी ताज़ा बहस के बाद 'मिस अमरीका' में भी बदलाव करने का फ़ैसला हुआ है.

पर क्या फ़र्क पड़ता है? स्विमसूट राउंड की वो खिड़की अब बड़ी होकर दरवाज़ा हो गई है.

एक दरवाज़ा नहीं कई दरवाज़े हो गए हैं. औरतों की ख़ूबसूरती को सौंदर्य प्रतियोगिता में चाहे उनके शरीर के आकार से ना आंका जाए पर आम ज़िंदगी में वो पैमाना और ज़रूरी बनता जा रहा है.

सवाल की सुई तो घुम-फिरकर हमारे आपके ऊपर ही टिकती है. बिकिनी राउंड के बिना ब्यूटी कॉन्टेस्ट देखेंगे? औरत की ख़ूबसूरती को उसके शरीर के आकार से आंकना बंद करेंगे?

लाइन

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)