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ब्लॉग: कौवा तो कान ले उड़ा, अब सहलाते रहें राहुल गाँधी
- Author, राजेश जोशी
- पदनाम, संपादक, बीबीसी हिंदी रेडियो
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
अब सफ़ाई देते रहें राहुल गाँधी. कहते रहें कि उन्होंने सिर्फ़ मुसलमानों को न्याय दिलाने की बात कही थी. कहते रहें कि उनकी बात को उर्दू अख़बार इंक़लाब ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. पर कौवा तो कान ले उड़ा.
पहले दिल्ली में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा- कौवा कान ले उड़ा. अगले दिन और ऊँची आवाज़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज़मगढ़ में कहा— भाइयों, बहनों, कौवा कान ले उड़ा है.
अब ये पता लगाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि कौवा कान क्यों ले उड़ा. और अगर ले उड़ा है तो किस डाल पर जा बैठा है!
और सब उस कौवे की तलाश में निकल पड़े जो कान ले उड़ा था.
राहुल गांधी से मिलने वाले मुसलमानों में से एक डॉक्टर अबुसालेह शरीफ़ से बातचीत यहां देखिए-
आम चुनाव भले ही एक साल बाद हो पर नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने रणभेरी बजा दी है. एक बार फिर से प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों में राहुल गाँधी को उनके नाम से संबोधित करना बंद कर दिया है. इस बार उन्हें राहुल गाँधी को मोदी युवराज नहीं बल्कि एक नए नाम से पुकार रहे हैं— श्रीमान नामदार.
ये सब आने वाले चुनावों से पहले की आहट है. आहट नहीं बल्कि गड़गड़ाहट कहिए.
नियंत्रण हमारा, लेकिन गड़बड़ी की ज़िम्मेदारी कांग्रेस की
केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. देश के 22 राज्यों में बीजेपी (एनडीए) सत्ता में है. पुलिस, फ़ौज, ख़ुफ़िया एजेंसियाँ बीजेपी सरकार के नियंत्रण में हैं, फिर भी देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019 तक इस देश में होने वाले किसी भी संभावित सांप्रदायिक दंगे के लिए एडवांस में काँग्रेस को ज़िम्मेदार ठहरा दिया है.
उन्होंने कहा, "अगर काँग्रेस पार्टी 2019 के चुनाव धर्म के आधार पर लड़ना चाह रही है, तो हमें डर है कि अब से सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाक़ों में अगर तनाव होता है तो ज़िम्मेदारी काँग्रेस की होगी."
शुक्रवार को निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्फ़्रेंस और शनिवार को आज़मगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव का घोषित मुद्दा भले ही विकास हो, लेकिन दरअसल चुनाव हिंदू-मुसलमान ध्रुवीकरण पर ही लड़ा जाएगा.
भारतीय जनता पार्टी ने डंके की चोट पर इसकी शुरुआत कर दी है और काँग्रेस से एक चाल आगे चल कर उसी पर आरोप भी लगा दिया है कि दरअसल अगला चुनाव काँग्रेस धर्म के आधार पर लड़ना चाह रही है.
काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी है?
क़िस्सा शुरू हुआ दैनिक जागरण समूह के उर्दू अख़बार डेली इंक़लाब की सुर्ख़ी से.
जिस दिन राहुल गाँधी ने दिल्ली में मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात की उसके अगले दिन उर्दू अख़बार इंक़लाब ने उनके हवाले से सुर्ख़ी लगाई - 'हाँ, काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी है.'
अब भले ही ये ख़बर किसी टीवी चैनल, किसी राष्ट्रीय अख़बार में न छपी हो, पर राजनीति के जूस से लबालब भरे इंक़लाब अख़बार की उस सुर्ख़ी को भारतीय जनता पार्टी निचोड़े बिना कैसे छोड़ती? नरेंद्र मोदी ब्रैंड की राजनीति में क्या ये संभव है कि ऐसी रसभरी ख़बर छपे और बीजेपी उसे नज़अंदाज़ कर जाए?
क्या राहुल गाँधी ने वाक़ई मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ हुई मुलाक़ात में काँग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताया?
इससे पहले कि काँग्रेस पार्टी मामले को समझ पाती, पहले दिल्ली में रक्षा मंत्री और बीजेपी नेता निर्मला सीतारमण ने इंक़लाब अख़बार के पन्ने का नेज़ा (भाला) बनाकर काँग्रेस पार्टी के सीने में टांग दिया. अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नेज़े को और तीखा किया.
मोदी ने किया तंज
आज़मगढ़ में शनिवार को एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "श्रीमान नामदार ने कहा काँग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है. मुझे आश्चर्य नहीं हो रहा है. पहले जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तो स्वयं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है. मैं काँग्रेस पार्टी के नामदार से पूछना चाहता हूँ - काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी है, आपको ठीक लगे आपको मुबारक. पर आप बताइए (मुसलमान) पुरुषों की है या महिलाओं की."
शायद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने मुसलमानों के प्रति कथित हमदर्दी को एक इल्ज़ाम के तौर पर सामने रखा और सीधे-सीधे ऐलान किया कि अगर काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी होना ठीक समझती है तो उसे मुबारक हो. उनसे पहले दिल्ली में निर्मला सीतारमण ने भी यही सवाल उठाया - क्या काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी है. अगर राहुल गाँधी ऐसा कहते हैं तो ये संविधान के ख़िलाफ़ है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो ख़ैर खुली प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पत्रकारों के सवालों का सामना करने से अब तक बचते रहे हैं, पर निर्मला सीतारमण से भी किसी पत्रकार ने सवाल नहीं किया कि क्या भारतीय जनता पार्टी हिंदू हित का समर्थन करती है या नहीं? क्या वो कह सकती हैं कि बीजेपी हिंदू समर्थक पार्टी नहीं है?
ख़ुद काँग्रेस जैसे अब तक नरेंद्र मोदी की बीजेपी से हर क़दम पर जिस तरह मात खाती आ रही है, वैसे ही इस मुद्दे पर भी वो पिछड़ गई. बीजेपी एक भी ऐसा मौक़ा नहीं छोड़ती जिसमें राहुल गाँधी किसी न किसी कारण उलझ जाएँ या उन्हें सफ़ाई देनी पड़े. ये भारतीय जनता पार्टी की सफलता है.
फिर कांग्रेस ने क्या किया?
पर जब दिल्ली और आज़मगढ़ में बीजेपी ढोल-नगाड़े पीटकर ऐलान कर रही थी कि कौवा कान ले गया तो काँग्रेस ने क्या किया? काँग्रेस पार्टी ने ट्वीट किया— "प्रधानमंत्री भारत की जनता से लगातार झूठ बोल रहे हैं. असुरक्षा की भावना उन पर हावी हो रही है. किस बात से डरे हुए हैं आप मोदी जी?"
काँग्रेस पार्टी ने अपने एक प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल से कहलवाया, "अब किसी छोटे से अख़बार के कोने में कुछ ख़ुद ही छपवा लो और छपवाने के बाद उस न्यूज़ की सच्चाई देखे बिना प्रधानमंत्री ऐसे बयान दें ये हम सब के लिए शर्म की बात है. कल मैं भी उनकी निजी ज़िंदगी के बारे में कुछ लिखवाऊँ और कहूँ कि ये अख़बार में छपा है?"
एक ओर बीजेपी के सबसे क़द्दावर नेता — ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण काँग्रेस पर मुस्लिम राजनीति खेलने के आरोप लगा रही है, मुक़ाबले में काँग्रेस की ओर से शक्तिसिंह गोहिल मिमियाते नज़र आ रहे हैं.
ख़ैर जाने दीजिए, काँग्रेस में वैसे भी क़द्दावर नेता है कौन?
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