नज़रियाः क्या तेजस्वी और तेज प्रताप के रास्ते अलग हो रहे हैं?

    • Author, सुरूर अहमद
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

लालू यादव के परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आधिकारिक निवास पर 11 सितंबर को हुई पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में उनके बड़े बेटे तेज प्रताप की अनुपस्थिति ने अटकलों के बाज़ार को गरम कर दिया है.

दिलचस्प तो यह है कि तेज प्रताप उसी बंगले में थे लेकिन बैठक में नहीं आए.

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान उन्होंने खुद को एक कमरे के भीतर बंद कर रखा था.

यह बैठक अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई थी और इसकी अध्यक्षता बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और तेज के छोटे भाई तेजस्वी यादव कर रहे थे.

पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी सांसद बेटी मीसा भारती भी इस बैठक में मौजूद थीं.

यह पहली बार नहीं है कि तेज प्रताप ख़बरों में हैं.

आरजेडी में अलग थलग पड़े तेज प्रताप

रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के महागठबंधन के बाद जब तेजस्वी ने 20 नवंबर 2015 को उपमुख्यमंत्री का पद संभाला तो उनके शपथ लेने से पहले भी तेज ने हंगामा खड़ा कर दिया था.

आखिर उन्हें उनके माता-पिता ने स्वास्थ्य मंत्रालय संभालने के लिए राजी कर लिया.

लेकिन पिछले 22 महीनों के दौरान आरजेडी की अंदरुणी राजनीति में बहुत कुछ हुआ है.

तेज प्रताप की अब शादी हो चुकी है. मीडिया रिपोर्टों मुताबिक पहले उन्हें अपनी मां का समर्थन प्राप्त था लेकिन अब मामला बदल गया है.

अब वो अलग-थलग पड़ गए हैं, जिसके सबूत 11 सितंबर को हुई पार्टी की यह बैठक खुद ही है.

तेज से कैसे निबटेगी आरजेडी?

यहां तक कि कुछ समय पहले तेज़ प्रताप ने अपनी एक फ़ेसबुक पोस्ट में भी यह शिकायत की थी कि अब उनकी मां भी नहीं सुनती हैं. बाद में उन्होंने इस बात से इंकार कर दिया कि उन्होंने ऐसा कुछ लिखा था और इस पोस्ट के लिए दूसरों पर आरोप मढ़ दिया.

आरजेडी के मुखिया के परिवार को निश्चित ही उनके बर्ताव की वजह से कइयों बार शर्मिंदा होना पड़ा है, लेकिन पार्टी के दिग्गज इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि वो संकट के इस दौर पर काबू पा लेंगे और बड़े बेटे को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया जाएगा.

पार्टी के एक बड़े नेता ने अपना नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर इस स्थिति की तुलना डीएमके पार्टी से किया, जहां पिता करुणानिधि ने छोटे भाई स्टालिन को अपना सियासी वारिस बना दिया और बड़े भाई अलागिरी को पार्टी के बाहर कर दिया था.

वो लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के उस फ़ैसले का उदाहरण देते हैं कि किस तरह से आरजेडी सुप्रीमो ने परेशानी का सबब बने अपने सालों साधु यादव और सुभाष यादव से पार पाया था.

वास्तव में, खुद पार्टी के भीतर यह आम राय थी कि उन दोनों ने पार्टी को फ़ायदा पहुंचाने की जगह ज़्यादा नुकसान पहुंचाया था.

फ़ायदा उठाने की फिराक में भाजपा

हालांकि, इसे देखते हुए कि भारतीय जनता पार्टी आरजेडी की किसी भी चूक का फ़ायदा उठाने के लिए तैयार है, बड़े बेटे की चुनौती पर काबू पाना उतना मुश्किल नहीं होगा.

वैसे ये बता दें कि बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे, जिन्होंने 2013 में उनसे मिलने गांधीनगर पहुंचे साधु यादव का तब अपने घर पर स्वागत किया था.

भारतीय जनता पार्टी हमेशा ही तेज प्रताप को लेकर नरम रही है. बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की तरफ से 12 सितंबर को हुई उस बैठक पर जल्द ही प्रतिक्रिया भी आ गई जिसमें उन्होंने अगले चुनाव में आरजेडी के विघटन और महागठबंधन के हार की भविष्यवाणी की.

इस सब के बीच यह एक बेहद दिलचस्प पहलू है कि राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा और हेमा (लालू-राबड़ी की एक और बेटी) पर सुशील मोदी पहले भी आरोप लगाते रहे हैं लेकिन तेज प्रताप के ख़िलाफ़ उन्होंने कभी भी कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं मढ़े.

मोदी पर हमले के बावजूद क्यों नरम रही भाजपा?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का यह मानना है कि केंद्रीय एजेंसियों का किसी भी जांच से तेज प्रताप को बाहर रखना इस तथ्य की ओर इशारा करता है कि आरजेडी सुप्रीमो के परिवार के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे इस पूरे अभियान के राजनीतिक मायने भी हैं.

एक आम राय है कि "यदि परिवार में हर कोई भ्रष्ट है तो तेज प्रताप भला कैसे साफ़ हो सकते हैं."

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरु गोविंद सिंह की 350वीं जयंती में भाग लेने के लिए 5 जनवरी, 2017 को पटना गए थे तब उन्होंने कृष्ण की अराधना के लिए तेज प्रताप की प्रशंसा करने के लिए समय निकाला था.

संयोग से, भाजपा और उसकी सहयोगी जेडीयू की चुप रहने और तेज़ की आलोचना से बचने की रणनीति तब भी जारी रही जब तेज ने सार्वजनिक रूप से एनडीए नेताओं की आलोचना की. एक बार उन्होंने यह भी कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खाल उधड़वा देंगे.

हालांकि भगवा पार्टी के नेताओं ने इसकी आलोचना की लेकिन उनकी प्रतिक्रिया उतनी तीखी नहीं थी. बिहार की राजनीतिक गतिविधियों पर नज़र रखने वालों के अनुसार भाजपा भविष्य में तेज के साथ संबंधों का फायदा उठाएगी.

कुछ निष्पक्ष विश्लेषकों का मानना है कि आरजेडी या महागठबंधन को बाहर यानी एनडीए से कोई ख़ास ख़तरा नहीं है, बल्कि समस्याएं तो पार्टी के भीतर से ही हो सकती है.

लेकिन आरजेडी नेताओं को भरोसा है कि वो इस चुनौती से उबर जाएंगे. वास्तव में परिवार के सभी सदस्यों ने तेज के कार्यक्रमों से खुद को अगल करना शुरू कर दिया है.

तेज के साथ समस्या यह है कि उनका आरजेडी के पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या से शादी हुई है.

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