पुलिस को नहीं मिले तबरेज़ अंसारी की ‘हत्या’ के सुबूत

तबरेज़ अंसारी

इमेज स्रोत, SARTAJ ALAM

इमेज कैप्शन, तबरेज़ अंसारी
    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, सरायकेला (झारखंड) से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

झारखंड के चर्चित तबरेज़ अंसारी लिंचिंग मामले की जांच कर रही पुलिस का मानना है कि उनकी हत्या नहीं की गई थी.

झारखंड पुलिस के अनुसार तबरेज़ की पिटाई की गई, इससे वे ज़ख्मी हो गए और फिर कार्डिएक अरेस्ट (ह्दय गति रुक जाना) के कारण उनकी मौत हो गई.

लिहाज़ा, पुलिस ने इस मामले के नामज़द अभियुक्तों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड विधान (आईपीसी) की दफ़ा-302 के बजाय दफ़ा-304 में चार्जशीट दाख़िल की है. अब कोर्ट को यह तय करना है कि वह पुलिस के इस तर्क से सहमत है या नहीं.

इस मामले की सुनवाई कर रहे कोर्ट ने इस आरोप पत्र (चार्जशीट) पर अभी तक संज्ञान नहीं लिया है.

सरायकेला खरसांवा के एसपी कार्तिक एस ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसेरा रिपोर्ट और डाक्टरों की प्राथमिकी जाँचने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि तबरेज़ अंसारी मामले में आइपीसी की दफ़ा-302 (हत्या का आरोप) फिट नहीं बैठ रही. हमें इसके साक्ष्य नहीं मिले. लिहाज़ा, हमने दफ़ा 302 की जगह दफ़ा 304 के तहत सुनवाई की अपील की है.''

एसपी कार्तिक एस ने कहा, ''इस मामले में 11 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ जांच पूरी कर ली गई है. उनके ख़िलाफ़ दफ़ा-304 और कुछ दूसरी धाराओं में चार्जशीट की गई है. इसमें भी उम्रक़ैद का प्रवाधान है. केस दर्ज करते वक़्त हमलोगों ने हत्या के आरोप में एफ़आइआर की थी. इसके दो अभियुक्त बाद में गिरफ़्तार किए गए थे. उनके ख़िलाफ़ जांच चल रही है. एक-दो हफ्ते में वह जांच भी पूरी कर ली जाएगी. अगर उनके ख़िलाफ़ हत्या के सुबूत मिले, तो वह धाराएं भी लगायी जा सकती हैं. पुलिस फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का भी अध्ययन करेगी ताकि पता चले कि घटना के वक़्त कौन-कौन लोग मौजूद थे.''

पुलिस की चार्जशीट

इमेज स्रोत, MOHAMMAD SARTAJ ALAM

इमेज कैप्शन, पुलिस की चार्जशीट

सीबीआई करे जांच

तबरेज़ अंसारी की विधवा पत्नी शाइस्ता परवीन को पुलिस की इस थ्योरी पर यक़ीन नहीं है.

सिर्फ 20 साल की उम्र में विधवा होने का दर्द झेलने वाली शाइस्ता का मानना है कि पुलिस उन्हें इंसाफ़ नहीं दिला पाएगी. इसलिए उन्होंने दफ़ा 302 हटने की ख़बर मिलते ही सरायकेला खरसांवा के उपायुक्त से मिलकर अपना विरोध जताया था. वे आज भी सहजता से नहीं बोल पातीं. बार-बार रोने लगती हैं.

शाइस्ता परवीन ने बीबीसी से कहा, ''सबलोग उनको रात-भर पीटते रहे. अगर उन्हें नहीं पीटा जाता, तो वे क्यों मर जाते. ख़ुशी-ख़ुशी घर से गए थे. बोले थे कि लौट आएंगे, लेकिन, पुलिस उन्हें जेल भेज दी. इलाज भी ठीक से नहीं कराया. अगर इलाज हुआ होता, तो वे ज़िंदा रहते. मेरे पेट (गर्भ) में उनकी आख़िरी निशानी थी. तनाव और बीमारी के कारण वह बच्चा भी नहीं बचा. अब अगर इंसाफ़ नहीं मिला, तो हम कैसे जियेंगे. इसकी सीबीआइ जांच करा दीजिए. ताकि, हम ज़िंदा रह सकें.''

इस मामले में तबरेज़ अंसारी के परिजनों की तरफ़ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अख्तर हुसैन ने बीबीसी को बताया कि कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट पर कोई संज्ञान नहीं लिया है.

उन्होंने कहा, ''जब इस पर संज्ञान की बात होगी, तो हमलोग कोर्ट में इसका विरोध करेंगे. यह पूरी तरह से इरादतन हत्या का मामला है. इसलिए अभियुक्तों के ख़िलाफ़ हत्या की दफ़ाओं में ही मुक़दमा चलना चाहिए. उम्मीद है कि कोर्ट इंसाफ़ करेगा.

शाइस्ता, तबरेज़ की विधवा पत्नी

इमेज स्रोत, MOHAMMAD SARTAJ ALAM

इमेज कैप्शन, शाइस्ता परवीन, तबरेज़ की विधवा पत्नी

मौत का गवाह वह खंभा

इधर, घटनास्थल धातकीडीह में वह खंभा आज भी झाडियों से घिरा है, जिसमें बांधकर तबरेज़ अंसारी की पिटाई की गयी थी.

बीते 17 जून की रात गांव वालों ने तबरेज़ पर चोरी का आरोप लगाकर इसी खंभे से बांधकर पीटा था. उसके बाद उन्हें पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया.

वे जेल भेजे गए. 22 जून की सुबह जेल में ही तबरेज़ की तबीयत ख़राब हुई. अस्पताल लाए जाने पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

इसके बाद पूरे देश में इसकी चर्चा हुई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि एक घटना के लिए पूरे झारखंड को बदनाम करना उचित नहीं है.

पुलिस की चार्जशीट के बाद इस गांव के लोग खुश हैं.

इस मामले के एक अभियुक्त महेश के पिता अशोक महली ने बीबीसी से कहा कि पुलिस की चार्जशीट से उन्हें अपने बेटे के छूटने की उम्मीद बढ़ी है.

उन्होंने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है. दुश्मनों ने उसे फंसा दिया. एक और अभियुक्त की रिश्तेदार ममता देवी ने कहा कि दोषी लोग तो बाहर घूम रहे हैं. जो निर्दोष है, उसे जेल भेज दिया गया. ऐसी ही बात दूसरे अभियुक्तों के परिजन भी कहते हैं.

इसी खंभे से बांधकर तबरेज़ को पीटा गया था

इमेज स्रोत, MOHAMMAD SARTAJ ALAM

इमेज कैप्शन, इसी खंभे से बांधकर तबरेज़ को पीटा गया था

कर्बला बना दिया बीजेपी ने

इस बीच हैदराबाद के सांसद और चर्चित मुस्लिम नेता असद उद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भाजपा शासन में मुसलमानों के लिए कर्बला बना दिया गया है.

पहलू ख़ान को मारने वाले बच गए. तबरेज़ अंसारी को सात घंटे मारा गया, लेकिन पुलिस उन्हें बचाने नहीं पहुंची.

अब झारखंड सरकार और पुलिस तबरेज़ के अभियुक्तों को बचाने की कोशिश कर रही है. इसलिए दफ़ा 302 हटा दिया है.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

औवेसी ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि कोर्ट इस चार्जशीट का संज्ञान नहीं लेगी. मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ क़ानून बनाकर 'राइट टू लाइफं' का हक़ सुनिश्चित किया जाना चाहिए. जिन्हें मारा जा रहा है, उन्हें राइट टू लाइफ़ नहीं मिल रहा, जो कत्ल कर रहे हैं उन्हें यह अधिकार दिया जा रहा है.''

ये भी पढ़ेंः

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)