पुलिस-वकील विवाद: पुलिसकर्मियों की मांगें अधिकारियों ने मानीं, धरना ख़त्म

पुलिसकर्मी

इमेज स्रोत, Reuters

पढ़ने का समय: 4 मिनट

दिल्ली में पुलिसकर्मियों का लगभग 11 घंटे तक चला विरोध प्रदर्शन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद मंगलवार रात ख़त्म हो गया.

दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट परिसर के बाहर शनिवार को पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद भारी संख्या में पुलिस के जवान मंगलवार सुबह से आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.

रात क़रीब आठ बजे के क़रीब दिल्ली पुलिसकर्मियों ने अपना धरना प्रदर्शन ख़त्म करने का एलान किया.

बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिसकर्मियों की मांगें मान ली गई हैं. हालांकि उन्हें कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है.

प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से बात करते हुए विशेष पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा ने उनसे ड्यूटी पर लौट जाने की अपील की और वादा किया कि तीस हज़ारी कोर्ट के बाहर हुई हिंसा पर दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका दाख़िल की जाएगी.

DelhiPolice, DelhiPoliceVSLawyers

इमेज स्रोत, ANI

धरने पर बैठे पुलिसकर्मियों की मांगें थीं- पुलिस संघ बनाने की मांगें, घायल पुलिसकर्मियों के लिए बेहतर इलाज, निलंबित पुलिसकर्मियों की बहाली, वकीलों की ख़िलाफ़ कार्रवाई और वकीलों के लाइसेंस वापस लिए जाएं.

इससे पहले शाम को दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों ने एक बार फिर से धरना दे रहे पुलिसकर्मियों को समझाने की कोशिश की.

दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी राजेश खुराना ने पुलिसवालों से धरना ख़त्म करने की अपील की. ज्वाइंट सीपी के सामने पुलिसकर्मियों ने 'वी वांट जस्टिस' के नारे लगाए हैं.

इससे पहले जवान अपने हाथ में काली पट्टी बांधकर पहुंचे और वकीलों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को शांत करने के लिए पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने संबोधित किया.

दिल्ली पुलिस प्रदर्शन, अमूल्य पटनायक, दिल्ली पुलिस कमिश्नर

इमेज स्रोत, ANI

लेकिन अमूल्य पटनायक की बातों से प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मी संतुष्ट नहीं हुए और वहां डटे जवान जोर शोर से नारे लगाने लगे कि "दिल्ली पुलिस कमिश्नर कैसा हो, किरण बेदी जैसा हो."

जवानों के प्रदर्शन और नारेबाज़ी के बीच दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने कहा कि ये हमारे लिए परीक्षा की घड़ी है.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

पटनायक ने कहा, "बीते कुछ दिनों के दौरान राजधानी में कुछ घटनाएं हुई हैं जिन्हें हमने बहुत अच्छे से संभाला है. उस दिन के मुक़ाबले स्थिति में सुधार हो रही है. यह स्थिति हमारे लिए परीक्षा की तरह है. हमें जो ज़िम्मेदारी दी गई है कि क़ानून को हम संभाले और क़ानून के रखवाले की तरह बर्ताव करें. इसे हम ध्यान में रखें. हम स्थिति को अच्छी तरह निपटाएंगे. यह हमारे लिए अपेक्षा की भी घड़ी है. सरकार और जनता की तरफ से हमसे बहुत उम्मीदें रखी जाती हैं. हमें अनुशासित फोर्स की तरह हमने जिस तरह क़ानून को अब तक संभाले रखा है उसी तरह आगे भी बनाए रखना होगा."

पटनायक ने बताया कि हाई कोर्ट इस पूरे मामले की जांच कर रही है.

उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए प्रतीक्षा की भी घड़ी है क्योंकि माननीय हाई कोर्ट की तरफ से एक जांच रखी गई है, हमें ईमानदार जांच की उम्मीद रखनी चाहिए."

उन्होंने जवानों से शांति बनाए रखने और ड्यूटी पर लौटने की अपील भी की.

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

पुलिस और वकीलों के बीच कैसे शुरू हुई झड़प?

शनिवार (2 नवंबर) को तीस हज़ारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच पार्किंग को लेकर विवाद के बाद झड़प हुई.

वीडियो कैप्शन, अपनी सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरे दिल्ली के हज़ारों पुलिस वाले क्या बोले?

दिल्ली (उत्तर) के अतिरिक्त डीसीपी हरेंद्र सिंह ने इस झड़प के बारे में बताया, "तीसरी बटालियन के जवान और कुछ वकीलों के बीच पार्किंग को लेकर विवाद हो गया था, इस बीच कुछ और वकील भी वहां आ गए. वो बदला लेने के लिए लॉक-अप के अंदर आना चाहते थे. हमने वकीलों को अंदर आने से रोका. हमने लॉक-अप को अंदर से बंद करके रखा जिससे हमारे जवानों के साथ-साथ कोर्ट में पेश होने आए क़ैदियों को भी सुरक्षित किया गया. वकील उस लॉक-अप को तोड़ना चाहते थे लेकिन जब वो इसमें कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने आग लगाकर उसे तोड़ने की कोशिश की. उन्होंने गेट के पास दो-तीन बाइकों को भी आग लगा दी थी."

कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई है और जमकर हंगामा हुआ. लेकिन वकील लोग पुलिस की बातों से सहमत नहीं हैं. वकीलों का दावा है कि उनके एक साथी इस झड़प में घायल हुए हैं जिन्हें नज़दीक के सेंट स्टीफ़ंस अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है.

दिल्ली पुलिस प्रदर्शन

इमेज स्रोत, ANI

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, "पार्किंग के विवाद पर पुलिस ने वकीलों के साथ बहुत ही बुरा बर्ताव किया. पुलिस ने मासूम वकीलों पर फ़ायरिंग शुरू कर दी. बार काउंसिल इसे बिलकुल बरदाश्त नहीं करेगा. हमने पुलिस के उच्च अधिकारियों और सरकार से मांग की है कि आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार किया जाए और उन्हें सस्पेंड किया जाए. अगर ऐसा नहीं होता है तो हालात और ज़्यादा ख़राब हो सकते हैं."

समाचार एजेंसी एएनआई का कहना है कि उनके एक पत्रकार के साथ भी तीस हज़ारी कोर्ट के वकीलों ने मार-पीट की. एएनआई के अनुसार शनिवार को उस दौरान वकीलों का समूह पत्रकारों को कवर करने से रोक रहा था और उनके मोबाइल फ़ोन भी छीने जा रहे थे.

ये भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)