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जामिया की छात्राओं का आरोप, 'पुलिस ने निजी अंगों पर हमले किए'
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
क़रीब दो महीनों से नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दिल्ली पुलिस पर छात्रों पर हमला करने और महिला प्रदर्शनकारियों का उत्पीड़न करने के आरोप लगाए हैं. हालाँकि दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है. सोमवार को जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने यूनिवर्सिटी से लेकर संसद तक मार्च का आह्वान किया था. इस दौरान जब छात्रों ने पुलिस बैरिकेडिंग से आगे जाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोका.छात्रों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने कई छात्रों को चुन-चुन कर निशाना बनाया और उनके निजी अंगों पर हमले किए. कई छात्रों ने पुलिस पर रसायन इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए हैं.
सोमवार को घायल हुए छात्र होली फ़ैमिली अस्पताल, अल-शिफ़ा अस्पताल और अंसारी क्लिनिक में भर्ती हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सोमवार को तीन दर्जन से अधिक छात्र घायल हुए हैं जिनमें से कई को गंभीर चोटें हैं.
अल-शिफ़ा अस्पताल के बाहर मिली एक छात्रा जुनैदा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पुलिस के हमले में उनके परिवार के चार लोग घायल हैं.उन्होंने बताया, "मेरी एक बहन आईसीयू में है, एक अन्य बहन भी घायल है, अभी उसका एक्स-रे हुआ है, मेरे भाई के दोनों घुटनों में चोट है, मेरी माँ भी पुलिस एक्शन में घायल हुई हैं."जुनैदा कहती हैं, "सबसे ज़्यादा चोट मेरी बड़ी बहन को लगी है. उसके निजी अंगों पर मर्द पुलिसवालों ने हमले किए हैं. वो अभी आईसीयू में है. आज हमने पुलिस की ओर से एक नया टैक्टिक्स इस्तेमाल होते हुए देखा है. पुलिस ने लड़कियों को चुन-चुन कर निशाना बनाया है."वो कहती हैं, "ऐसा लगता है जैसे पुलिस को एक नया क़ानून मिल गया हो जिसके तहत वो जामिया के छात्रों पर पूरी बेशर्मी से हमले कर रही है."
पुलिस ने कहा आरोप निराधार
वहीं दिल्ली पुलिस ने जामिया के छात्रों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. दक्षिण पूर्वी दिल्ली पुलिस के डीसीपी की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया, "मीडियाके एक वर्ग में ख़बरें आई हैं कि पुलिस ने ज़हरीले रसायन का इस्तेमला किया और महिला प्रदर्शनकारियों को घायल किया. ये दुखद है कि ऐसी ख़बरों के प्रकाशन से पहले पुलिस से जानकारी नहीं ली गई."
पुलिस ने कहा, "सभी आरोप निराधार हैं और जवाब देने लायक भी नहीं है. पुलिस पूरे संयम से प्रदर्शनों से निबट रही है और प्रदर्शनकारियों समेत सभी की सुरक्षा का ध्यान रख रही है."जुनैदा कहती हैं, "हमने संसद के लिए मार्च बुलाया था. हमें रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किए गए थे जो पूरी तरह से लैस थे. हम सुबह से ही कह रहे थे कि पुलिस पूरी तरह तैयार होकर आई है और आज हम पर हमला किया जा सकता है. लेकिन हमें ये नहीं पता था कि पुलिस इतनी बेशर्मी पर उतर आएगी और महिला प्रदर्शनकारियों का इस तरह उत्पीड़न करेगी."
'निजी अंगों पर हमले किए'
अस्पताल के भीतर से वीडियो के ज़रिए भेजे गए संदेश में उनकी घायल बहन ने बताया, "मैं बैरिकेड के पास थी. एक महिला पुलिसकर्मी ने मुझे खींचा और मैं नीचे गिर गई. चार-पाँच मर्द पुलिसवालों ने मुझे घेर लिया. मैं ज़मीन पर पड़ी थी. उन मर्द पुलिसवालों ने मुझ पर बूटों से हमला किया. एक पुलिसवाले ने मेरे निजी अंगों पर हमला किया. मेरी एक पसली टूट गई है."
हमले में घायल एक छात्र मोहम्मद दानिश ने बताया, "पुलिसवालों ने मुझे खींचकर भीड़ से अलग किया और मुझे एक बैरिकेड के नीचे गिरा दिया. मैं बैरीकेड के नीचे था और वो उसके ऊपर चढ़ गए. चार-पाँच पुलिसवालों ने फिर मुझ पर बूटों से हमला किया. ख़ासतौर से मेरे निजी अंगों को निशाना बनाया गया. कई और प्रदर्शनकारियों को भी ठीक ऐसे ही निशाना बनाया."वहीं एक छात्र अतीब ख़ान का कहना था कि पुलिस ने एक रसायन का इस्तेमाल किया जिसकी चपेट में आने से छात्रों के पेट में दर्द होने लगा और सांस उखड़ने लगी. इस रसायन के इस्तेमाल के बाद छात्रों में अफ़रातफ़री मच गई और इस दौरान पुलिस के जो हत्थे चढ़ा उसे बुरी तरह पीटा गया.अल-शिफ़ा अस्पताल में घायल छात्रों से मिलने आए केरल से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद इटी मोहम्मद बशीर ने कहा, "कई छात्र घायल हैं, उन्होंने बताया है कि पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा है. पुलिस ने नए तरीक़ों का इस्तेमाल किया है. लड़कियों पर भी हमले किए गए हैं."
उन्होंने कहा, "सरकार बर्बर और असंवेदनशील हो गई है. लेकिन इससे ये आंदोलन रुकेगा नहीं और मज़बूत होगा. सरकार को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए."जुनैदा कहती हैं, "पुलिस एक-एक छात्र को अलग कर रही थी और फिर उन्हें नीचे गिराकर उनके सीने पर, निजी अंगों पर हमले कर रही थी. एक नए तरीक़े से मारा गया है."जामिया में प्रदर्शन को अब लगभग दो महीने हो चुके हैं लेकिन सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून पर पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है. जुनैदा कहती हैं कि अब प्रदर्शन और तेज़ होगा. वो कहती हैं, "जिस तरह की बर्बरता पुलिस ने लड़कियों के साथ की है, उसके बाद लोगों का ग़ुस्सा और भड़केगा. ये आंदोलन अब और तेज़ होगा और पुलिस की हिंसा से हम डरने वाले नहीं हैं. जब तक हममें जान है हम लड़ते रहेंगे."
वो कहती हैं, "एक तो हम लड़कियाँ हैं, दूसरा हममें से कई ने बुर्के़ पहन रखे थे. पुलिस ने ख़ासतौर पर हमें निशाना बनाया. प्रधानमंत्री कह ही चुके हैं लोगों को कपड़ों से पहचानो. पुलिस ने हमें हमारे कपड़ों से पहचाना और फिर हम पर हमला किया."घायल छात्रों से मिलने आईं जामिया यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर नजमा अख़्तर को छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा. उन्हें देखते ही छात्रों ने उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की. पत्रकारों ने उनसे सवाल करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. छात्र वीसी गो-बैक और शर्म करो-शर्म करो के नारे लगा रहे थे.सोमवार को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कवरेज कर रहे एक पोर्टल जामिया वर्ल्ड के पत्रकार मोहम्मद तसलीम ने बताया कि पुलिस ने अचानक छात्रों को निशाना बनाया जिसमें कई छात्र घायल हुए. तसलीम के मुताबिक़ कई छात्राओं ने उन्हें बताया कि मर्द पुलिसवालों ने उनके निजी अंगों पर हमले किए और उन्हें बुरी तरह नोचा.
उनके मुताबिक़ घायल छात्रों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस को भी नहीं आने दिया जा रहा था.
पहले भी हुए हैं हमले
ये पहली बार नहीं है जब दिल्ली पुलिस पर जामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला करने के आरोप लगे हैं. इससे पहले 15 दिसंबर को जब छात्रों ने संसद मार्च की कोशिश की थी तब भी उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया था.इस दौरान कई बसें और गाड़ियाँ जला दी गईं थीं. बाद में पुलिस ने जामिया के कैंपस में घुस कर कार्रवाई की थी.छात्रों ने पुलिस पर लाइब्रेरी में घुसकर हमला करने और लड़कियों को भी निशाना बनाने के आरोप लगाए थे.
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