पुलवामा जैसा हमला टालने का कश्मीर पुलिस का दावा

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
- पढ़ने का समय: 3 मिनट
भारतीय सुरक्षा बलों का दावा है कि कश्मीर में पुलवामा जैसे हमले की योजना थी जिसे नाकाम कर दिया गया है.
अधिकारियों के मुताबिक़, पुलवामा ज़िले में विस्फोटक के भरी एक कार को सुरक्षा बलों पर हमले के लिए प्लांट किया गया था जिसकी पुलिस द्वारा सही समय पर जाँच करके हमले को नाकाम कर दिया गया.
यह घटना बुधवार रात की है.
पुलिस के मुताबिक़, यह कार एक चेकप्वाइंट की अनदेखी करके आगे बढ़ गई थी और फिर एक गाँव के पास मिली. जहाँ बम निरोधी दस्ते ने कार में मौजूद विस्फोटक को डिफ़्यूज़ कर दिया.

इमेज स्रोत, VIDEO GRAB
घाटी के पुलिस प्रमुख ने पत्रकारों को बताया कि चरमपंथी अंधेरे का फ़ायदा उठाकर उनके घटनास्थल पर पहुँचने से पहले ही भाग निकले लेकिन पुलिस को समय रहते विस्फोटकों से लदी कार बरामद करने में कामयाबी मिली, जिसे समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया.
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव
सूत्रों के अनुसार, चरमपंथियों के भागने से पहले हल्की गोलीबारी भी हुई. हालाँकि पुलिस ने चरमपंथियों के साथ किसी भी तरह के संपर्क की पुष्टि नहीं की है.
आईजीपी कुमार के अनुसार, "सुरक्षा बलों ने खुफ़िया सूचना और त्वरित कार्रवाई के चलते एक बड़ी त्रासदी को घटने से रोक दिया."
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ़ पर चरमपंथियों का हमला हुआ था.
इस हमले में 40 से अधिक जवान मारे गए थे. इस हमले से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था और नियंत्रण रेखा पर युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी.
हमले के लगभग दो सप्ताह बाद ही भारत ने बालाकोट में चरमपंथियों के प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने का दावा किया था. हालाँकि पाकिस्तान ने बालाकोट में ऐसे किसी भी प्रशिक्षण शिविर की मौजूदगी से इनकार किया था.
पाकिस्तान की ओर से सीमा उल्लंघन
बीते साल पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया गया जिसके बाद से चरमपंथियों के खिलाफ़ अभियान में तेज़ी देखी गई है.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक़, विभिन्न अभियानों में कम से कम 100 चरमपंथी मारे गए हैं और पाकिस्तान की ओर से सीमा उल्लंघन और चरमपंथी हमलों में 30 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई है.
बीते सप्ताह हिजबुल मुजाहिदिनी के कमांडर जुनैद सेहराई और उसके एक सहयोगी की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत हो गई. पुलिस का दावा है कि पुलवामा में बुधवार को निष्क्रिय कर दिए गए हमले के पीछे हिजबुल का हाथ था.
कोविड 19 के इस दौर में कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां चरमपंथियों के खिलाफ़ एक नई नीति का पालन कर रही हैं. इसके तहत मुठभेड़ में मारे गए लोगों के शव उनके परिजनों को नहीं सौंपे जाते हैं और उन्हें उनके पैतृक क़ब्रिस्तानों से दूर पुलिस की निगरानी में दफ़नाया जाता है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इससे सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने में मदद मिलती है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
कैसे और कब हुआ था पुलवामा हमला?
दक्षिणी कश्मीर का लडूमोड इलाक़ा 14 फ़रवरी 2019 की दोपहर 3 बजकर 10 मिनट से पहले तक बाक़ी कश्मीरी इलाक़ों की ही तरह था.
लेकिन अगले ही मिनट हमेशा के लिए सबकुछ बदल गया.
लडूमोड वो जगह बन गई जहाँ पर सीआरपीएफ़ के क़ाफ़िले की एक बस में आत्मघाती हमलावर मारुति सुज़ुकी ईको गाड़ी लेकर घुस गया और इससे हुए धमाके में सीआरपीएफ़ के 40 जवान मारे गए.
सीआरपीएफ़ के लिए कश्मीर में ऐसा संघर्ष या उसके क़ाफ़िले पर हमला कोई नई बात नहीं थी. लेकिन भारत प्रशासित कश्मीर में तीन दशकों से चले आ रहे चरमपंथ में ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था.

- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना महामारीः क्या है रोगियों में दिख रहे रैशेज़ का रहस्य
- कोरोना वायरसः वो शहर जिसने दुनिया को क्वारंटीन का रास्ता दिखाया
- कोरोना वायरस से संक्रमण की जांच इतनी मुश्किल क्यों है?
- कोरोना संकट: गूगल, फ़ेसबुक, ऐपल और एमेज़ॉन का धंधा कैसे चमका
- कोरोना वायरसः वो छह वैक्सीन जो दुनिया को कोविड-19 से बचा सकती हैं
- कोरोना वायरस: संक्रमण से बचने के लिए इन बातों को गाँठ बांध लीजिए
- कोरोना वायरस: सरकार का आरोग्य सेतु ऐप कितना सुरक्षित



(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















