किसान आंदोलन पर पीएम मोदी ने लोकसभा में क्या-क्या कहा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाये गए धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का उत्तर दिया.

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण को 'प्रेरक संबोधन' बताया. उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति जी का भाषण भारत के 130 करोड़ लोगों की संकल्प शक्ति का परिचय कहा जा सकता है. उनका एक-एक शब्द देशवासियों को प्रेरणा देने वाला था. राष्ट्रपति जी का उद्बोधन मार्ग प्रशस्त करने वाला रहा."

पीएम मोदी ने संसद में हुई चर्चा में शामिल रहे सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया.

उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के भाषण पर चर्चा के दौरान महिला सांसदों की अच्छी भागीदारी रही. यह एक अच्छा संकेत है. इसके लिए मैं सभी महिला सांसदों का आभार व्यक्त करता हूँ."

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पीएम मोदी ने कहा कि 'जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष का जश्न मना रहा होगा, तो उसके अंतिम 25 वर्ष अब हमारे सामने हैं और इन्हीं वर्षों में हमें यह तय करना है कि भारत को हमें दुनिया में किस स्थान पर ले जाकर खड़ा करना है.'

उन्होंने कहा, "देश जब आज़ाद हुआ तो आख़िरी ब्रिटिश कमांडर यही कहते रहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है, कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा. परंतु भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा. आज हम विश्व के सामने एक राष्ट्र के रूप में खड़े हैं और विश्व के लिए एक आशा की किरण हैं."

मोदी

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कोरोना काल और आत्मनिर्भर भारत का ज़िक्र

पीएम मोदी बोले, "कोरोना के बाद, दुनिया में एक नया वर्ल्ड ऑर्डर तैयार हो रहा है, जिसमें भारत को अपनी जगह बनाने के लिए सशक्त होना पड़ेगा और उसी का रास्ता है 'आत्म-निर्भर भारत.' हमारे लिए आवश्यक है कि हम आत्मनिर्भर भारत पर बल दें. आज हिन्दुस्तान के हर कोने में 'वोकल फ़ॉर लोकल' दिखाई दे रहा है."

भारत के संदर्भ में पीएम मोदी ने कहा कि 'घर में अगर आप अपने बच्चे को स्वीकार नहीं करें और बाहर सोचें कि दुनिया उसे स्वीकार करे, तो ये नहीं हो सकता. इसलिए हमें ख़ुद के गौरव का गुणगान करना होगा.'

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की टिप्पणी का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 'वाक़ई सफ़ाईकर्मी, डॉक्टर, नर्सें और तमाम कर्मचारी भगवान का रूप बन गये थे, इसीलिए देश कोरोना से बच पाया.' मोदी सरकार को घेरने के लिए मनीष तिवारी ने संसद में कहा था कि 'भगवान की कृपा रही, इसलिए भारत कोरोना महामारी से बच पाया.'

उन्होंने कहा, "हम कोरोना से जीत पाए क्योंकि हमारे सफ़ाई कर्मचारी मौत और ज़िंदगी से जूझते हुए बीमार मरीज़ के पास जाते थे. कोई एंबुलेंस चलाने वाला ड्राइवर कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ को ले जाता था, वो भी भगवान का रूप था. भगवान अलग-अलग रूप में आया था."

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किसानों के प्रदर्शन पर पीएम मोदी क्या बोले?

सदन में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 'कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे किसान अफ़वाहों का शिकार हैं.'

कृषि क्षेत्र का ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 'कृषि क्षेत्र में हमारे सामने बहुत सारी चुनौतियाँ हैं. इन चुनौतियों से हमें लड़ना होगा. इसी इरादे से ये नये कृषि क़ानून लाये गए. विपक्ष ने सदन में इन क़ानूनों के रंग पर तो बहुत चर्चा की, उन्हें काला, लाल बताया, परन्तु अच्छा होता अगर वो इनके इंटेंट पर और इसके कंटेंट पर चर्चा करते.'

इस दौरान लोकसभा में हंगामा होने पर पीएम मोदी ने कहा, ''ये हो हल्ला, ये रुकावटें सोची समझी रणनीति के तहत हैं. ये रणनीति है कि जो झूठ फैलाया गया है, उसका पर्दाफ़ाश हो जाएगा.''

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लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर पीएम मोदी के भाषण के दौरान कांग्रेस पार्टी के सांसदों ने वॉकआउट किया. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सदन से बाहर आकर कहा कि 'हमें पीएम मोदी से इससे बेहतर की उम्मीद थी. पर वे इन क़ानूनों को किसानों के फ़ायदे का बता रहे हैं.'

वहीं दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने सदन में कहा कि "आंदोलन कर रहे सभी किसान साथियों का यह सदन और यह सरकार, दोनों आदर करते हैं और आदर करते रहेंगे. जब यह आंदोलन पंजाब में चल रहा था, तब भी सरकार के लोग किसान संगठनों से बात कर रहे थे. सरकार लगातार बात करती रही है. बातचीत में किसानों की शंकाओं को ढूंढने का भी काफ़ी प्रयास किया गया. उनसे कहा गया कि बिन्दुवार ढंग से इस पर चर्चा की जाये. किसान इन क़ानूनों में कमियाँ बतायें और उनमें कैसे सुधार होगा यह भी बतायें, तो सरकार सुधार करेगी."

'नये क़ानून किसानों को विकल्प देंगे'

पीएम मोदी ने कहा कि 'नये क़ानून लागू होने के बाद ना तो देश में कोई मण्डी बंद हुई है, ना एमएसपी पर रोक लगी है, बल्कि फ़सलों की ख़रीद बढ़ी है. ये क़ानून किसी किसान के लिए बंधन नहीं हैं. बल्कि ये उन्हें विकल्प देते हैं. पुरानी मण्डियों को इनसे कोई ख़तरा नहीं है. हमने इन मण्डियों को आधुनिक बनाने का संकल्प लिया है. इनके लिए बजट बढ़ाया गया है. मैं किसानों से पूछना चाहता हूँ कि क्या कोई हक़ इस क़ानून ने छीन लिया है क्या?'

उन्होंने कहा, "कहते हैं कि हमने कृषि क़ानून माँगा नहीं, तो दिया क्यों? मैं कहता हूँ कि ये वैकल्पिक है. माँगा और दिये का कोई मतलब नहीं होगा. इस देश में दहेज, तीन तलाक, बाल विवाह के ख़िलाफ़ क़ानून बने. किसी ने माँग नहीं की, फिर भी प्रगतिशील समाज के लिए क़ानून लाये गए. किसी ने स्वच्छ भारत की माँग नहीं की थी. माँगा जाये, सरकार तभी काम करे, ये सामंतशाही नहीं है, ये लोकतंत्र है. माँगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती है."

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'कृषि में निवेश लाने की ज़रूरत, निजीकरण ज़रूरी'

पीएम मोदी ने कृषि क्षेत्र में निवेश की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि 'सरकार पूरी तरह से मदद नहीं कर पा रही है, इसलिए हमें इस क्षेत्र में निवेश लेकर आना होगा. कृषि करने का स्टाइल बदलना होगा. किसानों को सिखाना होगा कि वो कैसे मौक़ों का सही अवसर उठा सकते हैं.'

उन्होंने कहा, "केवल गेहूँ और चावल पैदा करने से आगे बढ़ना होगा. हमारा किसान दुनिया के हिसाब से खेती करे. हमारे किसान ने विपरीत परिस्थितियों में रिकॉर्ड उत्पादन किया है. हमारी ज़िम्मेदारी है कि किसान की परेशानियाँ कम हों. इन कृषि सुधारों से हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं."

"पुरानी सोच, पुराने मानदंड किसानों की बेहतरी कर पाते तो काफ़ी पहले कर चुके होते. 21वीं सदी में 18वीं सदी के हिसाब से उन चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते हैं. कोई नहीं चाहता है कि हमारा किसान ग़रीबी में फंसा रहे. हमारी सरकार ने छोटे किसानों के लिए बीज से लेकर बाज़ार तक पिछले 6 वर्षों में अनेक ऐसी कोशिशें की हैं जो छोटे किसानों का लाभ कर सकते हैं."

सदन में पीएम मोदी बोले, "जब तक हमारे छोटे किसानों को उनके नये अधिकार नहीं मिलते, तब तक उनकी आज़ादी अधूरी रहेगी. हमारी सरकार ने हर क़दम पर छोटे किसानों की मदद करने का काम किया है. हमें किसानों को विकल्प देने ही होंगे."

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भाषण में चौधरी चरण सिंह का ज़िक्र

"हमने कोरोना काल में किसान रेल का प्रयोग किया. यह ट्रेन चलता-फिरता एक कोल्ड स्टोरेज है. ऐसे और प्रयोग हमें करने होंगे. कृषि के अंदर जितना निवेश बढ़ेगा, उतना ही रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे. हमारा किसान आत्मनिर्भर बने, उसे अपनी उपज बेचने की आज़ादी मिले, उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है."

पीएम मोदी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री और किसान-मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह की किताब 'भारत की अर्थनीति' का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि 'चौधरी साहब ने भी लिखा है कि देश के किसानों को अपनी फ़सल कहीं भी बेचने की आज़ादी होनी चाहिए.'

उन्होंने किसानों के आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ के संदर्भ में कहा कि "जब 'आंदोलनजीवी' किसानों के पवित्र आंदोलन को अपवित्र करने के लिए निकलते हैं, तो देश को नुक़सान होता है. मैं किसानों के आंदोलन को पवित्र मानता हूँ. लेकिन आंदोलनजीवियों ने 'पवित्र आंदोलन' को हाईजैक कर लिया है. जो टोल प्लाज़ा और टेलीफ़ोन के टावर तोड़ने का काम कर रहे हैं, वो आंदोलनकारी नहीं, आंदोलनजीवी हैं. वे किसानों के आंदोलन में जाकर नक्सलवादियों की तस्वीरें दिखाते हैं. इसलिए देश को आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों के बारे में फ़र्क करना बहुत ज़रूरी है."

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'देश के विकास में प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भूमिका'

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि "एक वर्ग है जो सही बातें करने की बात तो करता है, पर वो सही काम करने का विरोध करता है. वो वन नेशन, वन इलेक्शन का विरोध करता है. वो ट्रिपल तलाक़ का विरोध करता है."

निजीकरण की अहमियत बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, "पब्लिक सेक्टर अगर ज़रूरी है, तो प्राइवेट सेक्टर की भूमिका भी बहुत बड़ी है. कोई भी सेक्टर ले लीजिये - चाहे टेलीकॉम, फ़ार्मा या कोई अन्य - हर जगह हमने प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी देखी है. अगर भारत मानवता की सेवा करने में सक्षम हो पाया है, तो उसमें प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भूमिका है."

अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने कहा, "हमारा फ़ोकस है कि देश को एक संतुलित विकास की ओर ले जाना है. ईस्टर्न इंडिया को लेकर हम मिशन मोड पर काम कर रहे हैं. जिनका राजनीतिक एजेंडा है, वो उस पर रहें. हम देश का एजेंडा लेकर आगे बढ़ रहे हैं."

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उन्होंने कहा, "हमें हमारे देश की सेना पर गर्व है, वीरों पर हमें गर्व है, उनके सामर्थ्य पर गर्व है."

संसद में पीएम मोदी के भाषण के दौरान, प्रेस से बात करते हुए शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा, "जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब मुख्यमंत्रियों की कमेटी बनी थी. इस कमेटी का नेतृत्व नरेंद्र मोदी ने किया था. उस कमेटी के हेड ने कहा था कि एमएसपी को स्टेच्युटरी लीगल होना चाहिए था. पर वो आज इससे मुकर गये."

मंगलवार को भी संसद में किसानों का मुद्दा गरमाया रहा था. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा था. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 'आंदोलनजीवी' और 'परजीवी' वाले बयान पर कड़ी नाराज़गी जताई थी और कहा था कि "अगर आंदोलन करने वाले परजीवी हैं, तो बीजेपी वाले 'रक्तजीवी' हैं."

इससे पहले, पीएम मोदी ने सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते समय, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में हुए प्रयासों का हवाला देकर नये कृषि क़ानूनों का बचाव किया था. इसके साथ ही, उन्होंने फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसानों के डर को दूर करने की कोशिश की थी. पीएम मोदी ने कहा था कि 'एमएसपी जारी थी, एमएसपी जारी है और एमएसपी जारी रहेगी.'

BBC ISWOTY

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