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कोविड 19 से बचाव के लिए टीकाकरण का लक्ष्य क्या 2021 के आख़िर तक पूरा होगा?
भारत में कोविड-19 के वैक्सीनेशन का अभियान शुरू हुए छह महीने पूरे हो गए हैं. छह महीने पूरे होने तक कितने लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लगाई जा चुकी है और वैक्सीनेशन की दर क्या है? बीबीसी ने इन सवालों की पड़ताल की.
क़रीब 6% भारतीयों ने वैक्सीन की दोनों डोज़ ले ली है और 17% लोगों ने वैक्सीन की कम से कम एक डोज़ ले ली है.
इस लिहाज से इस साल के अंत तक भारत को अपनी आबादी के 70% लोगों को वैक्सीन देने के लिए प्रतिदिन कम से कम 85 से 90 लाख डोज़ की आवश्यकता है.
मौजूदा वैक्सीनेशन की दर के साथ, ये नहीं लगता है कि भारत 2021 के अंत तक वैक्सीनेशन के अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएगा.
एक दिन में वैक्सीन दिए जाने के औसत में गिरावट
21 जून से सभी वयस्कों के लिए मुफ़्त वैक्सीन की घोषणा के बाद भारत ने पहले दिन ही वैक्सीनेशन का एक नया रिकॉर्ड बना डाला.
उस दिन देश के विभिन्न राज्यों में 80 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन की डोज़ दी गई.
हालांकि, अगले कुछ दिनों में, वैक्सीनेशन की दर में गिरावट देखने को मिली.
23-29 जून के बीच, औसतन 55 लाख से अधिक लोगों को कोविड वैक्सीन की डोज़ दी गई. इस दरम्यान भी दैनिक वैक्सीन डोज़ में गिरावट देखने को मिली और यह घट कर 40 लाख पर आ पहुंची.
वहीं 15 जुलाई 2021 तक वैक्सीन की डोज़ घटकर दैनिक 37 लाख पर आ गई.
सभी आयुवर्ग के वैक्सीनेशन में गिरावट
वैक्सीनेशन की दर में गिरावट लगभग सभी आयु वर्ग में देखी जा सकती है.
21 जून को 18-44 आयुवर्ग के क़रीब 65 लाख लोगों को वैक्सीन दी गई, जो अब 15 जुलाई को कोविन डैशबोर्ड के मुताबिक घटकर 21 लाख पर आ पहुंची है.
ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में वैक्सीनेशन में गिरावट
वैक्सीनेशन दर में शहरी और ग्रामीण दोनों ही जगह गिरावट आई है. कोविड डैशबोर्ड के डेटा के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में 21 जून को वैक्सीनेशन में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई, लेकिन धीरे-धीरे वैक्सीनेशन की दर का ग्राफ़ ऊपर जाने की तुलना में अधिक नीचे की तरफ़ ही आया है.
भारत के अधिकतर राज्यों ने कोविड के मामलों में गिरावट देखने के फ़ौरन बाद चरणबद्ध अनलॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी.
(16 जुलाई को) भारत में 38 हज़ार से अधिक कोविड के मामले सामने आए वहीं 542 दैनिक मौतें दर्ज की गईं.
लेकिन जानकारों का मानना है कि कुछ हफ़्ते में एक और लहर देश में आ सकती है.
यह कम से कम समय में पूरी आबादी को वैक्सीन दिए जाने की ज़रूरत पर बल देता है.
वैक्सीनेशन की वर्तमान दर के साथ, भारत में साल के अंत तक हर्ड इम्यूनिटी को पाने के अपने लक्ष्य के काफ़ी दूर है.
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