संसद हंगामा: सदन में हुआ क्या था, सत्ता पक्ष और विपक्ष के अलग-अलग दावे

इमेज स्रोत, naveen0301
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
दिन बुधवार, 11 अगस्त. समय शाम के 6 बजकर 15 मिनट.
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन का ट्वीट आता है, जिसमें वो राज्यसभा के अंदर के माहौल को बयान करते हैं.
वो कहते हैं, "राज्य सभा टीवी आपको क्या नहीं दिखा रहा है- इस वक़्त सदन में सांसदों से ज़्यादा मार्शल मौजूद हैं. सरकार इंश्योरेंस बिल को ज़बरदस्ती पास कर रही है. ये है गुजरात मॉडल."
जब डेरेक ट्वीट कर रहे थे, उस समय राज्य सभा एक अप्रत्याशित हंगामे का गवाह बन रही था. विपक्ष के सदस्य जमकर नारेबाज़ी कर रहे थे, काले झंडे दिखा रहे थे और कुछ सदय काग़ज़ों को फाड़ते हुए नज़र आ रहे थे.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
सत्ता पक्ष का आरोप है कि राज्य सभा में विपक्ष के सदस्यों ने बिल को फाड़ा था और काग़ज़ के टुकड़ों को आसन की तरफ़ फेंका भी था.
गुरुवार को केंद्र सरकार के आठ मंत्रियों ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि इस मामले में विपक्ष को माफ़ी मांगनी चाहिए.
केंद्र ने संसद के मॉनसून सत्र को बीच में समाप्त करने और हंगामे को लेकर आरोपों को ख़ारिज करते हुए विपक्ष को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.
इस दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, "मॉनसून सत्र में विपक्ष का एकमात्र एजेंडा अराजकता पैदा करना था. वो जनता और करदाताओं के पैसे की चिंता नहीं करते. जो कुछ भी हुआ, वह शर्मसार करने वाला था. घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय उन्हें देश से माफ़ी मांगनी चाहिए."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
लेकिन टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने आठ मंत्रियों के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अपनी टिप्पणी में कहा कि विपक्ष के पास काफ़ी मज़बूत केस है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
ऊपरी सदन में जो कुछ हुआ, उसको लेकर राज्य सभा के अध्यक्ष वेंकैया नायडू का कहना था कि मॉनसून सत्र जिस तरह बाधित होता रहा और इस दौरान विपक्ष का जो आचरण रहा, उसको लेकर वो इतने दुखी हैं कि रात भर सो भी नहीं पाए.
नायडू ने कहा, "जो कुछ सदन में हुआ उसने लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र किया है". ऐसा बोलते बोलते नायडू भावुक भी हो गए थे.

इमेज स्रोत, RSTV
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला का कहना था कि वो इस बात से आहत हैं कि जनसरोकार के मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा नहीं हो पाई और सदन ठीक से नहीं चल सका. संसद के दोनों सदनों को हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.
अचानक सत्रावसान के ख़िलाफ़ गुरुवार को विपक्ष के सांसदों ने विजय चौक पर विरोध मार्च निकाला और फिर विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल नायडू से भी मिला.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 4
प्रतिनिधिमंडल ने एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें आरोप लगाया गया है कि राज्य सभा में इंश्योरेंस बिल जब पेश किया गया, उस समय सदन में बहरी लोगों को बुलाया गया था जो सुरक्षा विभाग के कर्मचारी नहीं थे.
ज्ञापन में कहा गया कि विपक्ष के सदस्यों, और ख़ास तौर पर महिला सदस्यों, के साथ बदसुलूकी भी की गई.
कांग्रेस की सदस्य छाया वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें 'पुरूष मार्शलों ने धक्का दिया' तो वो एक दूसरे सदस्य पर जा गिरीं.
लेकिन राज्य सभा में सदन के नेता पीयूष गोयल का आरोप है कि एक महिला मार्शल का किसी विपक्ष के सदस्य ने गला दबाने की कोशिश की.

इमेज स्रोत, Hindustan Times
उन्होंने राज्यसभा के सभापति से पूरे घटनाक्रम की जाँच सदन की एक विशेष समिति से कराने की मांग की. वो कहते हैं, "पहले भी लोक सभा में इस तरह की समितियाँ बनाई गई हैं. सिर्फ निलंबन से काम नहीं चलेगा."
विपक्ष के सदस्यों का आरोप है कि जान बूझ कर मॉनसून के सत्र को ठीक से संचालित नहीं किया गया, जबकि विपक्ष पेगासस जासूसी मामले सहित, कृषि क़ानून और बेरोज़गारी पर चर्चा करना चाहता था.
संसद में मॉनसून सत्र के अचानक ख़त्म हो जाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं.
संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि सीसीटीवी कैमरों से देखा जा सकता है कि दोनों सदनों में क्या कुछ हुआ. वो कहते हैं कि इन कैमरों के फुटेज देखकर ही पता चल जाएगा कि विपक्ष झूठ बोल रहा है.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 5
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार का कहना था कि 55 सालों से वो संसद के सदस्य हैं, लेकिन उन्होंने संसद में इस तरह के दृश्य कभी नहीं देखे हैं.
बुधवार को राज्य सभा में हुए हंगामे की चर्चा करते हुए कांग्रेस पार्टी के मुख्य सचेतक जयराम रमेश का कहना था ये सबकुछ सरकार ने 'जनरल इंश्योरेंस बिल' को ज़बरदस्ती पारित करवाने के लिए किया था. वो कहते हैं कि विपक्ष इस बिल को संसद की सेलेक्ट कमेटी के पास भिजवाने की मांग कर रहा था.

इमेज स्रोत, PRAKASH SINGH
गुरुवार को विजय चौक पर प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी कह रहे थे, "आज हम यहाँ आपसे बात करने आए हैं क्योंकि हमें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है."
जो कुछ दोनों सदनों में मॉनसून सत्र के दौरान होता रहा उसे लोक सभा और राज्य सभा के अध्यक्ष 'लोकतंत्र पर हमला' कह रहे हैं. सत्ता पक्ष भी यही कह रहा है और विपक्ष भी यही कह रहा है.
संसद का मॉनसून सत्र
लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला का कहना था कि सदन के पटल पर रखे गए विधेयकों पर स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए. लेकिन उन्होंने कहा कि पूरे मॉनसून सत्र के दौरान लोक सभा सिर्फ़ 21 घंटे ही चल पाई, जो पूरे समय का सिर्फ़ 22 प्रतिशत ही है.
लोकसभा को विधायी कार्यों के लिए बुधवार तक 96 घंटों तक चलना चाहिए था. इस दौरान दोनों सदनों में 20 विधेयक भी पारित हुए, जिनमें से ज़्यादातर विधेयक बिना बहस के ही पारित हो गए.
जहाँ लोकसभा में एक विधेयक को पारित होने में औसतन सिर्फ़ 10 मिनटों का ही समय लगा, राज्य सभा में एक विधेयक को पारित होने में औसतन 34 मिनट लगे.
टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने इसको लेकर ट्विटर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जितनी तेज़ी से 'विधेयक पारित हो रहे हैं' वो 'पापड़ी चाट' बनाने जैसा है.

इमेज स्रोत, Hindustan Times
शिव सेना सांसद संजय राउत का कहना था कि यही मानकर चला जाए कि इस बार मॉनसून का सत्र हुआ ही नहीं.
गुरुवार को हुए प्रदर्शन में वाम दलों और क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ प्रमुख विपक्षी पार्टियों के सदस्य भी शामिल थे. विपक्ष के सदस्य आगे की रणनीति बनाने के लिए और भी बैठकें करने जा रहे हैं. आगामी 20 अगस्त को कांग्रस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष की पार्टियों की बैठक बुलाई है. लगभग 15 विपक्षी दल इसमें आमंत्रित हैं.
इसके अलावा ग़ैर भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ये बैठक 'वर्चुअल' ही होगी, लेकिन इसके बाद विपक्षी दल के सभी नेता भोजन पर साथ आएँगे.
ऐसा राहुल गाँधी ने मॉनसून सत्र के दौरान भी किया था जब उन्होंने विपक्षी नेताओं को सुबह के नाश्ते पर बुलाया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













