मूर्तियों के लिए पाँच अरब का प्रावधान

मायावती
इमेज कैप्शन, मायावती ने स्मारकों के लिए अलग से बजट में प्रावधान किया है
    • Author, रामदत्त त्रिपाठी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

मायावती सरकार ने सोमवार को विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश करके लखनऊ में निर्माणाधीन स्मारकों, पार्कों और मूर्तियों के लिए पाँच अरब रूपए से अधिक की अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया है.

लेकिन इसमें राज्यव्यापी सूखे से निबटने के लिए कोई अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान नही किया गया है.

विपक्षी दलों ने मिलकर इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की बहुत कोशिश की लेकिन सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी ने बहुमत के बल पर अपना एजेंडा नही बदला. लोकसभा चुनाव में बसपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद यह विधानसभा का पहला अधिवेशन है और विरोधी दलों ने सरकार को घेरने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है.

सोमवार को अधिवेशन शुरू होते ही विपक्ष आक्रामक हो गया.

हाथों में 'हाय सूखा हाय बिजली' लिखे बैनर लेकर विपक्ष के विधायक अपनी सीटों पर आ गए और सीटों से उठकर अध्यक्ष सुखदेव राजभर के आसन के सामने खड़े होकर ज़ोरशोर से सूखे पर चर्चा की मांग करने लगे.

अध्यक्ष ने उनकी माँग नामंजूर कर दी और कार्यवाही सवा घंटे के लिए स्थगित कर दी. दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष फिर सूखे पर चर्चा के लिए ज़ोर देने लगा.

लेकिन सरकार ने निर्धारित एजेंडे के अनुसार पहले अनुपूरक बजट पेश किया. इसमे चालू वित्तीय वर्ष के लिए सात हज़ार पांच सौ साठ करोड़ रुपए की माँग की गई है.

मूर्तियों पर ज़ोर

बजट को पढ़ने से पता चलता है कि लखनऊ में डॉक्टर अंबेडकर और कांशीराम के नाम पर बन रहे विभिन्न स्मारकों,पार्कों और मूर्तियों आदि के लिए लगभग साढ़े पाँच अरब रूपए की अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है.

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इमेज कैप्शन, मूर्तियाँ और पार्क बनवाने की काफ़ी आलोचना हो रही है

इन स्मारकों में स्वयं मुख्यमंत्री मायावती की भी कई मूर्तियाँ लगाई गई हैं और लगाई जा रही हैं.

इनमे जेल गिराकर प्रस्तावित ईको पार्क पर लगभग दो सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे. यह ईको पार्क कांशीराम स्मारक स्थल से सटकर बन रहा है.

इसके बाद सूखे पर चर्चा करते हुए विपक्ष ने सरकार पर तीखे प्रहार किए. कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने अफ़सोस प्रकट किया कि सरकार ने स्मारकों और मूर्तियों के लिए तो अतिरिक्त बजट माँगा है जबकि सूखे की उपेक्षा की गई है.

उनका कहना था,''इन स्मारकों से भूखों का पेट नही भरने वाला है. किसानों की फ़सल नही लहलहाने वाली है. इन स्मारकों के बन जाने से यह नही होने वाला है कि किसी भूखे को खाना मिल जाए.''

मुख्य विरोधी दल समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि सरकार किसानों को न तो नहर में पानी दे रही है न सिंचाई के लिए बिजली.

उन्होंने आरोप लगाया कि मूर्तियों और स्मारकों के लिए जो भारी धनराशि दी जा रही है उसमे भारी लूट खसोट और घोटाला है जिसमे मुख्यमंत्री शामिल हैं.

जाँच की माँग

शिवपाल सिंह यादव ने सारे खर्चों की जांच केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई से कराने की मांग की.

उन्होंने कहा, '' हम सड़क से लेकर विधानसभा तक इसका विरोध करेंगे और सीबीआई से जांच हो यह हमारी मांग है.''

लोक दल के कोकब हमीद ने आरोप लगाए कि जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने में सरकार राजनीति कर रही है, जिसके कारण बागपत को सूखाग्रस्त नही घोषित किया गया है.

भारतीय जनता पार्टी के ओमप्रकाश सिंह ने सूखे से भुखमरी की संभावना बताई और ज़रूरी बंदोबस्त करने की मांग की.

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री लालजी वर्मा ने जवाब दिया कि सरकार ने पहले ही 58 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मायावती ने सूखाग्रस्त इलाकों में राहत कार्य के लिए निर्देश दे दिए हैं. उन्होंने केंद्र की कांग्रेस सरकार पर लोकसभा चुनाव के तुंरत बाद डीज़ल के दाम बढ़ाने की आलोचना की.

अनुपूरक बजट पर मंगलवार को विधानसभा में चर्चा होगी. सरकार का बहुमत देखते हुए इसका पास होना तय है.