संथानम से असहमत कलाम

पोखरण-II
इमेज कैप्शन, पोखरण में 1998 में किए गए परीक्षणों ने दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़ का विवाद भी खड़ा किया था

वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है कि 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण सफल थे और विस्फोट से उत्पन्न ऊर्जा अपेक्षा के अनुरुप थी.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के परमाणु वैज्ञानिक के संथानम की परमाणु परीक्षणों के पूरी तरह से सफल न होने की टिप्पणी से असहमति जताते हुए कलाम ने कहा है कि परीक्षणों के बाद प्राप्त नतीजों का विस्तृत विश्लेषण किया गया था.

11 और 13 मई 1998 को जब भारत ने पाँच परमाणु परीक्षण किए थे तब एपीजे अब्दुल कलाम डीआरडीओ के महानिदेशक थे और इस नाते वे परमाणु परीक्षण कर रही टीम का नेतृत्व कर रहे थे.

इन परीक्षणों के समय भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्रा ने भी के संथानम की टिप्पणी से असहमति जताते हुए इसे ग़लत बताया है.

उल्लेखनीय है कि पोखरण में 1974 में किए गए पहले परीक्षण के बाद 1998 में दूसरी बार परीक्षण किया गया था और उस समय की एनडीए सरकार ने इसे अपनी एक बड़ी उपलब्धि बताया था.

इसके बाद भारत को अमरीका सहित कई देशों से प्रतिबंध झेलना पड़ा था और भारत कई जगह कूटनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़ गया था.

कलाम असहमत

एपीजे अब्दुल कलाम
इमेज कैप्शन, अब्दुल कलाम परीक्षणों के समय रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार भी थे

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए एपीजे अब्दुल कलाम ने परमाणु वैज्ञानिक संथानम की टिप्पणी से असहमति जताई है.

उन्होंने कहा, "परीक्षणों के बाद नतीजों की विस्तृत समीक्षा की गई थी. ये समीक्षा दो स्तरों पर की गई थी, एक - परीक्षण स्थल और आसपास भू-कंपन की माप और दूसरा- विस्फोट के बाद टेस्ट साइट पर रेडियोएक्टिव परीक्षण."

उनका कहना है, "इस समीक्षा से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर प्रोजेक्ट टीम ने साबित किया था कि थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस से निर्धारित ऊर्जा हासिल कर ली गई थी."

ब्रजेश मिश्रा की आपत्ति

एनडीए सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्रा ने भी डीआरडीओ के वैज्ञानिक के संथानम की टिप्पणी को ख़ारिज कर दिया है.

एक निजी टेलीविजन चैनल से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि 1998 में हुए परमाणु परीक्षण पूरी तरह सफल थे.

ब्रजेश मिश्रा ने कहा, "डॉ एपीजे अब्दुल कलाम उस समय रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार थे और उन्होंने सार्वजनिक रुप से कहा था कि 1998 में पोरखण में किए गए परीक्षण पूरी तरह से सफल रहे हैं. यह पर्याप्त है कि डॉ कलाम ने कहा था कि परीक्षण सफल रहे हैं. डॉ संथानम उस समय डॉ कलाम के मातहत थे और इससे सब कुछ स्पष्ट हो जाता है."

उधर भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी डॉ संथानम की टिप्पणी को ख़ारिज करते हुए कहा है कि भारत के पास पर्याप्त संख्या में परमाणु हथियार हैं और उनके उपयोग के लिए प्रभावशाली साधन भी उपलब्ध हैं.

समाचार एजेंसियों के अनुसार भारत के नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुरीश मेहता ने कहा, "जहाँ तक हमारा सवाल है, हम वैज्ञानिकों के विचारों के मुताबिक चलते हैं. उन्होंने हमें इस क्षेत्र में सक्षम होने के प्रमाण दिए हैं."

टिप्पणी

डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ के संथानम की टिप्पणी की विभिन्न राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है.

परमाणु वैज्ञानिक संथानम 11 और 13 मई 1998 को किए गए पाँच परमाणु परीक्षणों के दौरान राजस्थान में पोखरण में मौजूद थे.

उन्होंने भारत के अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए साक्षात्कार में कहा है, "विश्व भर में विशेषज्ञों ने जो अनुमान लगाए हैं, उससे स्पष्ट है कि एक मात्र थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस (या हाइड्रोजन बम) के धमाके से निकलने वाली ऊर्जा दावों से कहीं कम थी. इसीलिए मैं ज़ोर देकर कह रहा हूँ कि भारत को परमाणु परीक्षण निषेध संधि(सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर करने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए."

उन्होंने कहा है कि परीक्षण के दस्तावेज़ मौजूद हैं और इसी के आधार पर वे ये दावा कर रहे हैं.

उनका कहना है कि भारत को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को पुख़्ता बनाने के लिए और परमाणु परीक्षणों की ज़रुरत है और इसलिए उसे सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कुछ विदेशी वैज्ञानिकों ने पोखरण में 1998 में किए गए परमाणु परीक्षणों के पर्याप्त शक्तिशाली होने को लेकर सवाल उठाए थे.

उनका कहना है कि इन परीक्षणों से 45 किलोटन की उर्जा उपेक्षित थी लेकिन जो उर्जा उत्पन्न हुई वह मात्र 20 किलोटन थी.

यह पहली बार है कि किसी इन परीक्षणों से जुड़े किसी भारतीय परमाणु वैज्ञानिक ने इन परीक्षणों की सफलता पर सवाल उठाए हैं.