'अदालत के साथ राजनीति न करें'

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले आदेश और चेतावनी के बावजूद लखनऊ में स्मारकों का निर्माण करने पर मायावती सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को की गई टिप्पणी में कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर राजनीति नहीं कर सकती.
उधर मायावती सरकार का कहना है कि वो कोर्ट के आदेशों का पालन कर रही है.
न्यायाधीश बीएन अग्रवाल और न्यायमूर्ति आफ़ताब आलम की खंडपीठ ने इस मामले पर कहा, "आप राजनीति मत करिए जैसा कि आप विधानसभा में अन्य दलों के साथ करते हैं."
खंडपीठ ने सलाह दी कि मायावती सरकार को जनहित से जुडे इस मामले को राजनीति में नहीं घसीटना चाहिए.
कोर्ट ने ये सलाह उस समय दी जब उत्तर प्रदेश सरकार ने ये दावा किया कि कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है.
खंडपीठ ने राज्य सरकार की इस दलील को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि इस मुद्दे पर कुछ उलझन थी और राज्य सरकार ने इस मामले में कोई उल्लंघन नहीं किया है.
कोर्ट का कहना था कि अगर राज्य सरकार को इस मामले में कोई उलझन नज़र आ रही थी तो उसे कोर्ट से स्पष्टीकरण लेनी चाहिए थी.
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर इलाहबाद हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं के दायरे में आने वाले निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी थी.
लेकिन बाद में मीडिया में ऐसी ख़बरें आईं कि कोर्ट के आदेश के बावजूद भी कहीं-कहीं निर्माण कार्य चल रहा है.
इसे संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव अतुल गुप्ता को तलब किया.
अतुल गुप्ता ने इस मामले पर राज्य सरकार की तरफ़ से स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि निर्माण का कोई काम नही हो रहा है.
इस जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं हुई. अब इस मामले पर मंगलवार को अगली सुनवाई होगी.
































