क़साब के आक़ा कब पकड़े जाएंगे?

- Author, ज़फ़र आग़ा
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
'कालिया' की तो छुट्टी हो गई. जी हाँ, मुंबई के 26/11 हमलों के 'कालिया' अजमल आमिर क़साब की वाक़ई छुट्टी हो गई. उसे सज़ा-ए-मौत सुनाई गई है.
क़साब अब फाँसी पर लटकाया जाएगा. वैसे तो क़साब अब भी हाई कोर्ट में अपील कर सकता है, पर जज एमएल तहलियानी ने कुछ ऐसा फ़ैसला सुनाया है कि अजमल आमिर क़साब अब बच नहीं सकेगा. आज नहीं तो कल 'कालिया' मारा ही जाएगा. बेगुनाहों को मारने वाला आख़िरकार ख़ुद मौत के फंदे में फँसता ही है. ऐसे में क़साब फाँसी से कैसे बचता.
चलिए, एक चरमपंथी फंसा. कम से कम अजमल आमिर क़साब को फाँसी पर चढ़ा दिया जाएगा. लेकिन प्रश्न तो यह है कि क्या अजमल आमिर क़साब की फाँसी से 'आतंकवाद' भी फांसी पर चढ़ जाएगा?
अजमल आमिर क़साब की 'सज़ा-ए-मौत' से यह संदेश तो चला गया कि भारत पर आतंकवादी हमला करना कोई हंसी खेल नहीं है.
पर चरमपंथी भी कुछ ऐसे भोले भाले नहीं कि एक फांसी से डर जाएं. फिर लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन से जुड़े चरमपंथियों का क्या कहना. उनके गुरु हाफ़िज़ सईद, अजमल आमिर क़साब जैसों को जिहाद का पाठ पढ़ाने के लिए अब भी बैठे हैं.
आक़ा कब पकड़ा जाएगा?

सच तो यह है कि अजमल आमिर क़साब पाकिस्तान में चल रही 'आतंकवाद' की फ़ैक्टरी का केवल एक मोहरा है. अब तो सारी दुनिया यह मानती है कि पाकिस्तान की सरज़मीन से चलने वाले चरमपंथी गतिविधियों की कमान फ़ौज और ख़ुफि़या एजेंसी 'आईएसआई' के हाथों में है.
आख़िर हाफ़िज सईद जैसे जिहादी मुखिया का बाल बांका क्यों नहीं होता. इसका कारण सिर्फ़ यह है कि हाफ़िज़ सईद को आईएसआई का संरक्षण मिला हुआ है.
ऐसी स्थिति में क्या एक अजमल आमिर क़साब की फाँसी भारत को आतंकवाद से बचा सकती है? सच पूछिए तो मुझको आशा कम ही दिखती है. कल को कोई 'लश्कर' जैसा संगठन आईएसआई के इशारे पर फिर कोई चरमपंथी षड्यंत्र रच ले तो हम और आप क्या कर सकते हैं. क्या अब भी हाथ मलते रह जाएंगे.
पर अब ऐसा संभव नहीं है. पाकिस्तान भी अब कुछ बुरा फंसा है. भले ही पाकिस्तान ने जिहाद की फ़ैक्टरी में अब भी पूरी तरह ताला नहीं लगाया है. पर अब पाकिस्तानी जिहाद की दुम अमरीका की पकड़ में आ चुकी है.
वह कैसे? भाई अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को साल भर में अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी फ़ौजियों को वापस बुलाना पड़ा है. पाकिस्तान अमरीका के आर्थिक सहायता के बिना चल नहीं सकता है. यही कारण है कि अमरीका ने पाकिस्तानी फ़ौज की लगाम पूरी तरह कस दी है.
इन दिनों पाकिस्तानी फ़ौज के लगभग 80 प्रतिशत फ़ौजी अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर जूझ रहे है. यह तब ही संभव हुआ जब भारत ने हाल में अपने एक लाख फ़ौजी पाकिस्तान सीमा से पीछे हटा लिए. स्पष्ट है कि भारत ने यह अमरीका के आश्वासन पर ही किया है. आश्वासन यही है कि पाकिस्तान से भारत पर चरमपंथी हमला नहीं होगा.
मुंबई हमले के बाद केवल अजमल आमिर क़साब जैसे 'कालिया' की ही छुट्टी नहीं हुई. बल्कि अब तो आतंकवाद की भी दुम फँस चुकी है. अब देखते हैं क़साब के बाद क़साब के गुरु हाफ़िज़ सईद जैसे चरमपंथी कब फंदे में फंसते है.
































