संदेह के घेरे में परमाणु दायित्व विधेयक

- Author, शालू यादव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद परमाणु दायित्व विधेयक को लेकर निश्चिंत हो चुकी सरकार के लिए फिर एक मुसीबत खड़ी हो गई है. सांसदों को सौंपी गई संशोधनों की सूची में उपबंध 17(बी) पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है.
सरकार ने असैन्य परमाणु दायित्व विधेयक के मसौदे में जो ताज़ा संशोधन किए हैं उसके अनुसार परमाणु हादसा होने की स्थिति में परमाणु संयंत्र के संचालक से क्षतिपूर्ति का दावा तभी किया जा सकता है जब यह साबित हो जाए कि परमाणु दुर्घटना इरादतन की गई है.
इस संशोधन पर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और वामदलों ने कड़ा विरोध जताया है. उनका कहना है कि इससे परमाणु दुर्घटना की स्थिति में सप्लायर यानि आपूर्तिकर्ता को कटघरे में लाना मुश्किल हो जाएगा.
विपक्ष के साथ धोखा
भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारामन ने कहा कि जिस मसौदे पर भाजपा ने इस विधेयक को मंज़ूरी दी थी, उसमें इस उपबंध का उल्लेख नहीं था. इस संशोधन को भाजपा के साथ धोखा बताते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी इसका संसद में विरोध करेगी.
निर्मला सीतारमन ने कहा, “कोई भी दुर्घटना इरादतन नहीं होती. ख़राब उपकरणों या दोषपूर्ण संयंत्रों के कारण ही दुर्घटनाएं होती है. हम इस संशोधन के ख़िलाफ़ हैं क्योंकि आपूर्तिकर्ता के ख़िलाफ़ कदम उठाने का प्रावधान इस कानून में होना ही चाहिए. ऐसा प्रावधान अगर नहीं होगा तो हम संसद में इसका विरोध करेंगें.”
वामदलों ने भी भाजपा के मत से सहमति जताई. मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता प्रसनजीत बोस ने आरोप लगाया कि सरकार अमरीका के दबाव में आ कर ये कदम उठा रही है.
अमरीकी दबाव
प्रसनजीत बोस का कहना है, “अगर भोपाल त्रासदी जैसी कोई दुर्घटना हो, तो हमें ये साबित करना पड़ेगा कि वॉरन ऐंडरसन जान बूझ कर भोपाल की जनता को मारना चाहता था. संशोधित उपबंध भारत की जनता के ख़िलाफ़ है. ऐसा लगता है कि अमरीकी दबाव सरकार पर काम कर रहा है. हमारे देश की संसद जनता के हित में चलेगी या बाहरी सप्लायर्स के हित में चलेगी?”
इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद किसी भी असैन्य परमाणु संयंत्र में दुर्घटना होने की स्थिति में संयंत्र के संचालक का उत्तरदायित्व तय किया जा सकेगा. साथ ही इस विधेयक में दुर्घटना से प्रभावित लोगों को उचित मुआवज़ा दिलाने का प्रावधान भी है.
संशोधित परमाणु दायित्व विधेयक इस सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा. देखना यह है कि सरकार ताज़ा विरोध के चलते फिर से विपक्ष का दिल जीतने में कामयाब हो पाएगी या नहीं.
































