कश्मीर: विश्वास बहाली के लिए कई फ़ैसले

भारत प्रशासित कश्मीर में सुरक्षाबलों के एकीकृत कमान की अहम बैठक में तय किया गया है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए ऐसे 50 युवकों के तुरंत रिहा किया जाएगा जिनपर सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकने के आरोप हैं.
एकीकृत कमान की इस बैठक में पुलिस अधिकारियों और अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधियों के अलावा राज्य के प्रधान गृह सचिव बी आर शर्मा भी मौजूद थे.
आश्वासन के बाद रिहा
इस फ़ैसले के बारे में बताते हुए गृह सचिव ने कहा कि इन युवकों को दोबारा हिंसा में शामिल न होने के उनके माता-पिता के आश्वासन के बाद रिहा किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि बाकि 49 पत्थर फेंकने वाले ‘जन सुरक्षा कानून (पीएसए)’ के तहत जेलों में बंद हैं. जेलों में बंद दूसरे कैदियों सहित बाकि 49 युवकों के बारे में छ:अक्टूबर को विचार किया जाएगा.
एकीकृत कमान की ये बैठक कश्मीर में हालात को बेहतर बनाने की कोशिश के तहत की गई.
कुछ दिनों पहले सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए आठ सूत्रीय आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए गिरफ़्तार लोगों को रिहा किए जाने के संकेत दिए थे.
विशेषाधिकार क़ानून
इस मसले को लेकर भारत सरकार ने राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से कहा था कि वो एकीकृत कमान के साथ बातचीत कर राज्य में सेना की बहाली को कम करने और सेना के विशेषाधिकार क़ानून (एएफ़एसपीए) को कुछ ज़िलों से हटाने पर विचार करें.
बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए गृह सचिव ने कहा कि एकीकृत कमान ने भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से सुरक्षाबलों के 16 बंकर हटाने का फ़ैसला भी किया है.
हटेंगे बंकर
हालांकि उन्होंने इस बारे में जानकारी नहीं दी कि शहर के अलग-अलग इलाकों में फ़िलहाल कितने बंकर मौजूद हैं.
गृह सचिव ने कहा कि एकीकृत कमान की दो अलग-अलग समितियां जम्मू और कश्मीर के उन इलाकों की समीक्षा करेंगी जिन्हें विशेषाधिकार क़ानून के तहत संवेदनशील माना जाता है.

ये समितियां मुख्यमंत्री को इस बारे में राय देंगी कि किन इलाकों को इस क़ानून के दायरे से बाहर लाया जा सकता है.
सेना के विशेषाधिकार क़ानून को हटाने की मांग अलगाववादियों और घाटी के नेताओं की एक प्रमुख मांग है.
मोबाइल सेवा बहाल
इसके अलावा एकीकृत कमान ने हिंसा प्रभावित सोपोर और बारामूला इलाकों में मोबाइल सेवा फिर से शुरु किए जाने का फै़सला भी किया है.
थोक में भेजे जाने वाले भारत विरोधी एसएमएस और संदेशों पर रोक लगाने के लिए कुछ समय पहले इन इलाकों में मोबाइल सेवा पर रोक लगा दी गई थी.
जानकारों का मानना है कि पत्थर फेंकने वालों को रिहा करने के फ़ैसले के अलावा एकीकृत कमान के इन फ़ैसलों का आम लोगों पर कोई खास असर नहीं होगा.
अलगाववादियों का कहना है कि इस तरह के फ़ैसलों के ज़रिए लोगों को भ्रमित कर सरकार फिर भारत प्रशासित कश्मीर की आज़ादी जैसे मुद्दों को दरकिनार कर रही है.
































