किसी की विजय-पराजय नहीं-आरएसएस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा है कि इस फ़ैसले को किसी के विजय या पराजय के रुप में नहीं देखा जाना चाहिए.
उनका कहना है कि अब राष्ट्रीय मूल्यों के प्रतीक के रुप में राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए न कि किसी देवी-देवता के प्रतीक के रुप में.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच के फ़ैसले के बाद दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवकर संघ के मुख्यालय में अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा, "पिछले वर्षों में जो कुछ कटुता या विषमता पैदा हुई उसे भुलाकर राष्ट्रीय भावना के अनुरुप मिलजुलकर एक साथ सेवाभाव से मंदिर निर्माण जुट जाना चाहिए."
उन्होंने हिंदू गुटों से संयम और शांति की अपील करते हुए कहा, "इस फ़ैसले से आनंद होना स्वाभाविक है लेकिन सभी को शांति के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त करना चाहिए और ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे कि किसी के दिन को ठेस पहुँचे."
उन्होंने कहा,"मैं मुसलमानों सहित सभी से आव्हान करता हूँ कि सभी को राष्ट्रीय एकता के प्रदर्शन करने का अवसर मिला है."
उन्होंने इस बारे में पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि फ़ैसले का विवरण मिलने के बाद ही वे सवालों के जवाब दे सकेंगे.
'मथुरा-काशी भी सौंप दें'

विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया का कहना है कि इस फ़ैसले से देश के सौ करोड़ हिंदुओं की श्रद्धा का सम्मान हुआ है और वो इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं.
उन्होंने कहा, "हम विनती करते हैं कि लोग शांति क़ायम रखे."
तोगड़िया ने ये भी कहा कि मंदिर के निर्माण संबंधी 60 प्रतिशत पत्थरों पर नक्काशी का काम हो चुका है और जैसे ही आदेश आते हैं, मंदिर निर्माण का काम शुरु किया जा सकता है.
तोगड़िया के मुताबिक इस काम में अब तक 24 करोड़ रूपए ख़र्च किए जा चुके हैं.
विश्व हिंदू परिषद के ही एक अन्य नेता, 92 वर्ष के गिरिराज किशोर ने कहा है कि अब वो मुसलमानों से निवेदव करते हैं कि 'गुड-विल' का परिचय देते हुए वो मथुरा और काशी को भी हिंदुओं को सौंप दें.
































