विहिप:मंदिर निर्माण में अभी समय लगेगा

एएसआई का चित्र

विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि यदि अयोध्य मामला सुप्रीम कोर्ट में जाता है और फ़ैसला उनके हक़ में नहीं होता तब भी वो प्रजातांत्रिक तरीके से वहां मंदिर बनाने का ही प्रयास करेंगे.

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता डॉक्टर सुरेंद्र जैन ने कहा है कि मंदिर निर्माण में अभी बहुत समय बाक़ी है क्योंकि मुस्लिम पक्षकार सुप्रीम कोर्ट जा रहा है. उसके बाद रिव्यू पेटीशन भी हो सकती है, फिर मामला संवैधानिक पीठ को भी जा सकता है.

उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए वहां तुरंत ज़मीन मिल जाएगी इसकी संभावना कम ही दिखती है.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, '' हमने मुस्लिम समाज से कहा है कि आप वहां मस्जिद बना नहीं सकते. वहां मस्जिद नहीं थी यह कोर्ट ने भी कह दिया है. इसलिए आप आगे आएँ और हमें ज़मीन दें और साथ में मिलकर मंदिर का निर्माण करें."

सवाल ही पैदा नहीं होता

जब उनसे पूछा गया कि अदालत ने जो एक तिहाई हिस्सा मुसलमानों को दिया है उस पर क्या मुसलमान मस्जिद बना सकते हैं तो सुरेंद्र जैन ने कहा, "सवाल ही पैदा नहीं होता, बना ही नहीं सकते."

क्या अदालत के फ़ैसले के बावजूद वे मस्जिद नहीं बना सकते हैं तो उन्होंने कहा, "हाँ, यह असंभव है."

जब उनसे कहा गया कि एक ओर तो आप अदालत के फ़ैसले का स्वागत करते हैं और दूसरी ओर मस्जिद निर्माण को नहीं मानेंगे ऐसा क्यों, तो उन्होंने कहा, "कारण यह है कि अभी तक उनको दी जाने वाली ज़मीन मार्क नहीं हुई और अगर वह मार्क भी हो जाती है तो उसके चारों तरफ़ क्या बना हुआ है."

जब उनसे पूछा गया कि क्या मुसलमान वहां क़ानूनी तौर पर मस्जिद नहीं बना सकते या विश्व हिंदू परिशद और अन्य हिंदू गुट उन्हें मस्जिद नहीं बनाने देंगे तो उन्होंने गोल मोल जवाब देते हुए कहा, "मुसलमान वहां मस्जिद बनाना ही नहीं चाहेंगे क्योंकि बार बार उनके नेता कह रहे हैं कि हम यहां पर क्या करेंगे. आपने राशिद अलवी और दूसरे लोगों की बात पढ़ी होगी. मुसलमानों में एक लहर चली है और वह अब इस बात को निपटाना चाहती है."

काशी मथुरा

काशी और मथुरा पर आपके क्या विचार हैं का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "अभी तो इसी को निपटने दीजिए, अभी इसी का आनंद लेने दीजिए."

लेकिन विश्व हिंदू परिषद का नारा था कि अयोध्या तो सिर्फ़ झांकी है काशी मथुरा बाक़ी है उसका क्या का जवाब देते हुए विहिप के प्रवक्ता ने कहा, "उसके लिए क़ानून में संशोधन करना होगा क्योंकि नरसिंह राव की सरकार के ज़माने में क़ानून बना था कि 1947 बाद की स्थिति को बरक़रार रखना है और राम जन्म भूमि उसमें एक अपवाद था. इसलिए वह प्रश्न अभी कहीं सामने ही नहीं है."

क्या काशी मुथुरा की यथास्थिति बनाए रखने की आप गारंटी दे सकते हैं का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "हिंदू समाज की तरफ़ से सब लोग गारंटी कैसे दे सकते हैं क्योंकि ये सिर्फ़ विश्व हिंदू परिषद का विषय नहीं है बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज का आंदोलन है. इसलिए मैं समझता हैं कि यह प्रश्न ही अभी असंगत है."

उन्होंने यह भी कहा, "अभी तो राम जन्म भूमि का मंदिर बनना है और सब उसीके फ़ैसले के आनंद में डूबे हैं और सब कोशिश कर रहे हैं कि सौहार्दपूर्ण वातावरण में ये विषय निपटे."

सदबुद्धि

अगर अदालत मुसलमानों को ज़मीन देती है और मुसलमान मस्जिद बनाना चाहते हैं तो विश्व हिंदू परिषद क्या करेगा पर उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मुसलमानों में सदबुद्धि आएगी. और मुस्लिम समाज इस बात पर अड़े उसका कोई कारण नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ही उस पर कुछ टिप्पणी कर सकते हैं."

क्या आप सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को मानने का अपनी ओर से वचन देते हैं पर उन्होंने कहा, "नहीं, ये हमने कभी नहीं कहा. हम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं. लेकिन जहां आस्था का प्रश्न है जैसा कि इस कोर्ट ने भी कह दिया है कि हिंदुओं के अनुसार राम ने इस स्थान पर जन्म लिया, और आस्था और क़ानून दोनों साथ-साथ चलते हैं. तीन बार कोर्ट इस बात को स्वयं स्वीकार कर चुका है तो वहां कुछ हो ही नहीं सकता."

बहरहाल उन्होने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करेंगे. लेकिन अगर वह हमारे विरोध में आया तो भी हम प्रजातांत्रिक तरीक़े से वहां मंदिर निर्माण का ही प्रयास करेंगे."