'भ्रष्ट हैं या नहीं, वेबसाइट पर बताएँ'

- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
टीआर रघुनंदन एक वेबसाइट के ज़रिए, भ्रष्टाचार से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
उनकी वेबसाइट, www.ipaidabribe.com पर लोगों से रिश्वत देने, या रिश्वत मांगे जाने के बावजूद ना देने के उनके अनुभव मांगे गए हैं.
इन अनुभवों से ऐसे सरकारी विभागों और शहरों की जानकारी जुटाई जा रही है जहां भ्रष्टाचार सबसे ज़्यादा है.
रघुनंदन कहते हैं, "हम इस जानकारी के साथ सरकारी विभागों के पास जाएंगे और उन्हें बताएंगे कि उनके विभाग में किस तरह का भ्रष्टाचार है और उसे कम करने के लिए उन्हें अपनी कार्य-प्रणाली में क्या बदलाव लाना चाहिए."
बंगलौर में पहली कामयाबी
तीन महीने पहले शुरु की गई इस वेबसाइट पर अब तक करीब ढाई हज़ार लोग अपने अनुभव लिख चुके हैं.
रघुनंदन के मुताबिक वेबसाइट पर इन अनुभवों को पढ़कर कर्नाटक के परिवहन विभाग के आयुक्त ने अपने विभाग से जुड़ी शिकायतें मांगीं, और अब काम के तरीकों में बदलाव लाने के लिए भी राज़ी हुए हैं.
रिश्वत ना देने का अपना संस्मरण वेबसाइट पर लिखने वाली बंगलौर की शर्मिष्ठा भी मानती हैं कि अपनी बात दुनिया को बताना भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने का एक अच्छा तरीका है.
शर्मिष्ठा कहती हैं, "मैं उन सब लोगों को बताना चाहती थी, जो रोज़ भ्रष्टाचार का सामना करते हैं, कि क़ायदे के हिसाब से चलने की गुंजाइश अब भी बाकी है."
भ्रष्टाचार - बड़ी समस्या
बदलाव कि ये छोटी कोशिश मायने तो रखती है पर बड़े घोटालों के सागर में ये बूंद समान ही लगता है.
पिछले एक महीने से भारत की संसद के अंदर और बाहर केवल घोटालों की ही गूंज सुनाई दी है.
पहले राष्ट्रमंडल खेलों में घोटाले, फिर आदर्श सोसाइटी स्कैम और फिर सबसे बड़ा हज़ारों करोड़ रुपए का टू-जी स्पेक्ट्रम घोटाला.
चारों तरफ़ से भ्रष्ट कहलाए जाने पर सरकार ने आनन-फ़ानन में अपने मंत्रियों से इस्तीफ़े लिए, सीबीआई और सीवीसी से जांच के आदेश दिए और कुछ गिरफ़्तारियाँ भी हुईं.
लेकिन भ्रष्टाचार के विरोध में काम करने वाले कार्यकर्ताओं के मुताबिक ये सब ढकोसला है.
मेगसेसे पुरस्कार से सम्मानित अरविंद केजरीवाल कहते हैं, "नेता कोई बदलाव नहीं चाहते, क्योंकि हर पार्टी भ्रष्टाचार में लिप्त है. ज़रूरत है पूरा सिस्टम बदलने की."
केजरीवाल के मुताबिक केंद्रीय जांच आयोग एक निष्पक्ष संस्था नहीं है और केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास सज़ा देने का अधिकार नहीं है, इसलिए ये सभी कारगर तरीके से काम नहीं कर पाते.
केजरीवाल ने अब कई कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल नाम से एक नया ढांचा बनाने के लिए एक मसौदा तैयार किया है, जो स्वायत्त हो और जिसके पास सज़ा देने का अधिकार भी हो.
सरकार, पिछले 30 साल से लोकपाल के विधेयक पर चर्चा कर रही है, लेकिन अबतक इसे संसद में पेश नहीं कर पाई है.































