सरकार सेना को उतार रही है: माओवादी

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, रायपुर
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के नारायणपुर इलाक़े में सेना की प्रस्तावित तैनाती से सरकार अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ना चाह रही है.
इस संबंध में संगठन की दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी ने एक बयान जारी कर इसका विरोध करने का ऐलान किया है.
यूँ तो नारायणपुर के अबूझमाड़ इलाके में कई वर्षों से सेना के प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव लंबित था, मगर हाल ही में सेना ने इस मामले में दिलचस्पी दिखानी शुरू की और वरिष्ठ अधिकारियों ने इलाके का सर्वे करना भी शुरू कर दिया है.
हालांकि सेना ने बार-बार कहा है कि वह माओवादियों के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान में शामिल नहीं हो रहे हैं लेकिन माओवादियों का आरोप है कि प्रशिक्षण केंद्र के बहाने इस लड़ाई में सरकार अब फ़ौज को लेकर आ रही है.
सेना को तैनात करने की प्रक्रिया
संगठन के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी नें बयान में कहा है, "माओवादी आन्दोलन का जड़ से सफाया करने के लक्ष्य से ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम से जारी फ़ांसीवादी हमले के तहत छत्तीसगढ़ में सेना को तैनात करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. जनवरी के दूसरे सप्ताह में बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र में सेना का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त जगह तलाशने के बहाने सैन्य बलों ने क़दम रखा है." पिछले माह सेना ने सरकार से पूछा था कि अगर उस पर माओवादी हमला करते हैं तो क्या वह जवाबी कार्रवाई कर सकती है? मगर अभी तक स्थिति कुछ स्पष्ट नहीं हुई है.
वैसे छत्तीसगढ़ सरकार के सूत्रों का कहना है कि अबूझमाड़ में सेना के लिए ज़मीन के अधिग्रहण का काम पूरा कर लिया गया है.
अब सरकार ये ज़मीन सेना के हवाले कर रही है. मगर इसमें कुछ शर्तें भी शामिल हैं. सूत्रों का कहना है सेना के प्रशिक्षण केंद्र के लिए लगभग 600 से 900 वर्ग किलोमीटर ज़मीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. उसेंडी का कहना है, "सेना की तैनाती के साथ ही यहाँ पर सशस्त्र बलों का विशेष अधिकार कानून एएफ़एसपीए लागू किया जाएगा. इससे छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा कानून, यूएपीए जैसे कानूनों के साए में पहले से ही हो रही ज्यादतियों और अत्याचारों में बेतहाशा वृद्धि होगी. इससे पिछले डेढ़ साल जारी जनता के ख़िलाफ़ युद्ध और ज़्यादा घातक और क्रूर रूप धारण करेगा. इसका भी खतरा भी बढ़ेगा कि सेना के हमलों की खबरें पूरी तरह दब जाएं. "
सरकार का प्रस्ताव

सरकार कहती है कि चार हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ का इलाक़ा दरअसल माओवादियों की राजधानी है.
ये माओवादियों के आधार वाला इलाक़ा कहलाता है जहाँ इनकी समानांतर सरकार भी चलती है. आज़ादी के पहले और बाद के 62 वर्षों में भी इन इलाक़ों का सर्वे नहीं हो पाया है.
पहले इस इलाक़े में अधिकारी खुद नहीं जाया करते थे, अब माओवादियों की वजह से नहीं जाते. अबूझमाड़ के अलावा सेना का औद्योगिक नगरी बिलासपुर के पास अपना 'बेस कमान मुख्यालय' स्थापित करने का प्रस्ताव है.
साथ ही भिलाई के पास नंदिनी के इलाके में वायु सेना के बेस की स्थापना के लिए ज़मीन अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया है.
































