'कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दोषी'

कपिल सिबल
इमेज कैप्शन, कपिल सिबल पहले से ही विपक्ष के पूर्व संचार मंत्रियों पर इस घोटाले का हिस्सा होने का आरोप लगाते रहे हैं

टू-जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस के वितरण की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियो की जांच के लिए बनाई गई समिति ने कहा है कि वर्ष 2001 से 2009 के दौरान इस संबध में लिए गए फैसले ग़लत थे और मंत्रिमंडल के निर्णयों के विरूद्ध थे.

समिति ने कहा है कि इस संबंध में मंत्रालय के निर्णय सरकार की नीतियों ओर निर्देशों से मेल नहीं खाते हैं जिसमें साफ़ है कि लाइसेंस नीलामी के आधार पर दिए जाएंगे न कि 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर.

इस एक-सदस्यीय समिति का कहना है कि मंत्रालय ने इस संबध में टेलीकॉम क्षेत्र की नियामक संस्था ट्राई के सिफ़ारिशों की भी अनदेखी की थी.

ये एक-सदस्यीय समिति दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद बनाई थी.

कबिल सिब्बल ने शिवराज पाटिल समिति की रिपोर्ट के कुछ अंश शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेस के दौरान पढ़कर सुनाए और कहा कि इसे अब सीबीआई के हवाले किया जाएगा.

पहले की प्रक्रिया

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा बार-बार कहते रहे हैं कि उन्होंने लाइसेंस के मामले में वही प्रक्रिया अपनाई है जो पहले के मंत्री अपनाते रहे हैं.

कपिल सिब्बल भी यही बात कहते रहे हैं.

शिवराज पाटिल समिति की रिपोर्ट से उनकी बातों को और बल मिलेगा.

ये भारतीय जनता पार्टी के लिए भी थोड़ी दिक़्कतें बढ़ा सकती हैं क्योंकि 2001 से 2004 (के पहले कुछ महीनों तक) के बीच केंद्र में एनडीए की सरकार थी. कपिल सिब्बल का कहना था कि समिति ने अधिकारियों को भी इस मामले में दोषी पाया है.

लेकिन उन्होंने इन लोगों का नाम बताने से इंकार कर दिया.