'अगर आंदोलन ब्लैकमेल है तो करता रहूँगा'

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समाज सेवी अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अगर देश की भलाई के लिए आंदोलन करना ब्लैकमेल है तो जबतक शरीर में जान है वो ऐसे ब्लैकमेल करते रहेंगे.
अन्ना हज़ारे ने ये बयान उन सवालों के जवाब में दिए जो समाज के एक तबक़े ने उनके आंदोलन को लेकर उठाये जा रहे हैं.
कुछ लोगों का कहना है कि वैसे लोग जिन्हें संविधान के भीतर क़ानून बनाने का हक़ नहीं दिया गया है किस तरह से किसी क़ानून को बनाने की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं?
ये आलोचना सरकार और अन्ना हज़ारे के बीच हुई सुलह के बाद सामने आई है जिसके भीतर लोकपाल बिल को तैयार करने के लिए एक ड्राफ्टिंग समिति बनेगी जिसमें नागरिक समाज के पाँच प्रतिनिधि शामिल होंगे.
इस समिति में सरकार की ओर से भी पाँच सदस्य मनोनीत किए गए हैं.
कुछ लोगों का तर्क ये भी है कि समिति में शामिल नागरिक समाज के लोग किसी को जवाबदेह नहीं हैं जैसे कि सांसद और विधायक होते हैं जिन्हें चुनाव के समय जनता के सामने जाना पड़ता है.
इन लोगों का कहना है कि अन्ना हज़ारे ने अनशन के ब्लैकमेल से हुकुमत को मजबूर कर दिया कि वो उनके प्रतिनिधियों को क़ानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल करे.
इन सवालों के जवाब में हज़ारे का कहना था कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि - यानि सांसद और विधायक जनता के सेवक हैं लेकिन नेता ऐसा समझने को तैयार नहीं इसीलिए जनता को हक़ है कि वो ऐसे आंदोलन करे.
































