कौन है मनवीर सिंह तेवतिया

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कौन है यह व्यक्ति, जिसे पकड़वाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 हज़ार रुपए का इनाम घोषित कर रखा है. पुलिस उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मार रही है. फिर भी वह उसकी पकड़ में नहीं आ रहा है.
तेवतिया अब से केवल 10 महीने पहले सुर्ख़ियों में आए. पिछले साल अलीगढ के टप्पल में हुए किसान आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के नेता राम बाबू कठेलिया के साथ ‘समझौते’ का ऐलान कर दिया था.
अलीगढ़ के किसान नोएडा के बराबर 870 रूपए प्रति वर्ग मीटर मुआवज़ा मांग रहे थे. लखनऊ से सरकार के आदेश पर पुलिस ने किसानों के नेता राम बाबू को गिरफ़्तार कर लिया.
इस पर बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई. दबाव में आकर सरकार ने किसानों के नेता राम बाबू को जेल से बुलाकर बात की. कठेलिया ने अलीगढ़ के गेस्ट हाउस में रात के अँधेरे में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 570 रूपए वर्ग मीटर पर कि डर से मुआवज़े पर समझौता कर लिया.
तब टप्पल के किसानों ने राम बाबू को नकार कर मनवीर सिंह तेवतिया को अपना नेता चुन लिया और आंदोलन जारी रखा.
उसके बाद जब राहुल गाँधी ने अचानक टप्पल का दौरा किया तो तेवतिया उनके साथ थे. फिर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह तेवतिया को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलाने दिल्ली ले गए.
आरोप
तेवतिया की पत्नी नूतन का कहना है कि इसके बाद ही उत्तर प्रदेश सरकार उनके पति से नाराज़ हो गई और उनके इर्द-गिर्द पुलिस का पहरा बैठा दिया.

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छह नवंबर को पुलिस उन्हें घर से उस समय पकड़ ले गई, जब वह पूजा कर रहे थे. कुछ घंटे थाने में रखने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.
इसके बाद दिसंबर में तेवतिया किसानों के मसले पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने जा रहे थे, तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन से शांति भंग के अंदेशे में पकड़ लिया और चार दिन बाद रिहा कर दिया.
पुलिस ने अलीगढ़ के टप्पल में किसानों का तम्बू उखड़वा दिया. इसके बाद पिछले जनवरी से तेवतिया सर्वदलीय किसान संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रेटर नोएडा के भट्टा ग्राम में भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ धरने का आयोजन कर रहे हैं.
तेवतिया ग्रेटर नोएडा से लेकर बुलंदशहर, अलीगढ, मथुरा और आगरा तक दौरा करके भूमि अधिग्रहण से नाराज़ किसानों को संगठित करने का काम कर रहे थे.
पिछले मार्च महीने में रबूपुरा कोतवाली पुलिस ने क़रीब 300 किसानों पर दो अधिकारियों को बंधक बनाने और प्राइवेट और सरकारी वाहनों को जलाने का मुक़दमा कायम किया. इनमें 10 नामजद किसानों में तेवतिया भी शामिल थे.
मनवीर सिंह बुलंद शहर के गुलावटी इलाक़े के नत्थूगढी गाँव के रहने वाले हैं.
राजनीति
मनवीर ने ग्रेजुएट स्तर तक पढाई की. देव नागरी डिग्री कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मनवीर भारतीय जनता पार्टी समर्थक अखिल विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे. तेवतिया के सामाजिक कार्यों में ग़रीब लड़कियों की शादी कराना भी शामिल था.

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इसके बाद वे समाजवादी पार्टी और समाजवादी जनता पार्टी से होते हुए बहुजन समाज पार्टी में पहुंचे.
मनवीर सिंह ने पांच साल पहले 2006 में बहुजन समाज पार्टी कार्यकर्ता के रूप में गुलावटी टाउन एरिया चेयरमैन का चुनाव लड़ा. लेकिन हार गए.
कुछ समय बाद वे कांग्रेस और फिर 2009 में लोक दल में शामिल हो गए. पिछले साल अगस्त तक वे लोक दल में थे. लेकिन टप्पल में किसान आंदोलन के नेता चुने के बाद से तेवतिया किसी पार्टी में नही हैं.
तेवतिया अब अपने परिवार के साथ ग्रेटर नोएडा में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं. आजीविका के लिए वह लोहे के फैब्रिकेशन का कम करते हैं.
उनकी पत्नी नूतन का आरोप है कि क़रीब ढाई महीने पहले पुलिस ने उनकी दूकान पर कर्मचारियों को मारपीट कर अब उनका बिजनेस बंद करा दिया है. नूतन इस बात से बेहद नाराज़ हैं कि पुलिस ने उनके पति को पकडवाने के लिए 50 हजार का इनाम घोषित कर दिया है.
नूतन एक शिक्षित महिला (एमए, बीएड) हैं. नूतन जोर देकर कहती हैं, "तेवतिया एक सोशल वर्कर हैं और वह ग़रीबों, किसानों की लड़ाई लड़ते हैं. मुझे इस बात का दुख है कि सरकार ने उस इंसान पर इनाम घोषित किया है जो किसानों की लड़ाई लड़ रहा है."
नूतन सवाल पूछती हैं कि ग़रीबों और किसानों के लिए आंदोलन करना कैसे अपराध हो गया.
हिंसा भड़काने का आरोप
लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह कहते हैं कि मनवीर सिंह तेवतिया और उनके साथी अवांछनीय तत्व हैं और इन्होंने भोले-भाले किसानों को भड़काकर हिंसा के लिए प्रेरित किया.

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लखनऊ में मुख्यमंत्री के क़रीबी एक अधिकारी का यह भी कहना है कि तेवतिया शोहरत हासिल कर विधान सभा चुनाव का टिकट चाहते हैं.
नोएडा में तैनात एक अधिकारी का कहना है कि तेवतिया ने अपने साथ 40-50 गुंडे किस्म के लोग पाल रखे हैं और यहीं घूम-घूम कर जगह-जगह आंदोलन करते हैं. अधिकारियों को बंधक बनाते हैं और कंपनियों से रकम वसूलते हैं.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त महा निदेशक गुरबचन लाल का कहना है कि मनवीर सिंह तेवतिया पर पिछले पांच-छह सालों से हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और फ़िरौती वसूलने के मुक़दमे बुलंदशहर, अलीगढ और नोएडा ज़िलों में दर्ज हैं.
लेकिन तेवतिया कि पत्नी नूतन कहती हैं कि ये सारे झूठे मुक़दमे हाल ही में आंदोलन के दौरान क़ायम किए गए हैं. नूतन सवाल पूछती हैं कि अगर उनके पति पर कई साल से इतने संगीन मुक़दमे क़ायम हैं तो पुलिस ने पहले कोई कार्रवाई क्यों नही की और बड़े-बड़े अफ़सर उनसे समझौता वार्ता क्यों करते थे?
पुलिस तेवतिया के गाँव में भी दबिश दे रही है. तेवतिया की माँ श्रीमती हरवीरी गांव में रहती हैं और खेती किसानी का काम करती हैं. उनका कहना है कि उनके बेटे ने किसानों का नेतृत्व करके कोई गुनाह नही किया है.
उनका कहना है कि किसान जब शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, तो उनकी सुधि नही ली गई और पुलिस आई तो सीधे लाठीचार्ज करने. तेवतिया की माँ हरवीरी ने एक स्थानीय पत्रकार से बातचीत में आशंका ज़ाहिर की कि कहीं उनके बेटे का एनकाउंटर न कर दिया जाए.
































