दिल्ली धमाका: मृतकों की संख्या बढ़ी, गिरफ़्तारी

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पिछले हफ़्ते दिल्ली उच्च न्यायालय के सामने हुए बम धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है.
धमाके में गंभीर रूप से घायल हुए 34-वर्षीय मृदुल बख्शी की गुरुवार तड़के मौत हो गई. डॉक्टरों के मुताबिक बख्शी के सिर, छाती, हाथ और पाँव में चोटें लगी थीं.
दक्षिणी दिल्ली के ओखला इलाके के रहने वाले मृदुल की पत्नी और छह महीने का एक बेटा है.
मृदुल के भाई विनोद ने पीटीआई को बताया कि मृदुल मार्केटिंग क्षेत्र में काम करते थे और वो सात सितंबर को किसी सरकारी काम से दिल्ली उच्च न्यायालय गए थे.
विनोद के मुताबिक मृदुल को शादी के छह साल बाद लड़का हुआ था.
गिरफ़्तारी
उधर सुरक्षा एजेंसियों ने भारत-प्रशासित कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले से चरमपंथी संगठन हूजी से कथित तौर से जुड़े हिलाल अमीन को हिरासत में लिया है.
पीटीआई के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को लगता है कि बम धमाके की ज़िम्मेदारी लेने वाला एक ईमेल भेजने में हिलाल का हाथ है. हिलाल अमीन से पूछताछ जारी है.
ग़ौरतलब है कि दिल्ली धमाके मामले में बुधवार को भारत-प्रशासित कश्मीर से ही दो स्कूली छात्रों को हिरासत में लिया गया है.
शरीक़ अहमद और आबिद हुसैन को बम धमाके की ज़िम्मेदारी लेने वाला एक ईमेल भेजने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
सायबर कैफ़े से भेजे गए इस ईमेल में धमाकों के लिए हरकत-उल-जेहादी ने धमाके की ज़िम्मेदारी ली थी.
इन दोनों लड़कों पर आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस का कहना है कि इन गिरफ़्तारियों से धमाकों की जाँच आगे बढ़ेगी.
दूसरा हमला
सात सितंबर को उच्च न्यायालय पर किया गया हमला पिछले पाँच महीनों में इसी जगह किया गया दूसरा हमला था.
हालाँकि अभी तक धमाके मामले की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है, भारतीय गृह मंत्री पी चिदंबरम कह चुके हैं कि हो सकता है कि हमले के पीछे कोई स्थानीय गुट ज़िम्मेदार हो.
बुधवार रात गृह सचिव आरके सिंह ने कहा था कि धमाके मामले में कुछ सूत्र मिले हैं और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है. ‘लेकिन हम कुछ नहीं बताना चाहते क्योंकि इससे जाँच में बाधा आएगी.’
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक हूजी एक आतंकवादी संगठन है जिसका ताल्लुक अल-कायदा से है. हूजी पर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हमलों का आरोप है.
बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक पिछले हफ़्ते के हमले ने भारत के लिए मुश्किल प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिनमें से एक ये है कि भारत अपने सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों को सुरक्षित रखने में कितना सक्षम है.
2008 के मुंबई हमलों के बाद सरकार ने सुरक्षा तंत्र में बड़े बदलाव के दावे किए थे.
































