मोदी का उपवास, दंगा पीड़ित नाराज़

इमेज स्रोत, Reuters
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का उपवास सोमवार को खत्म हो रहा है लेकिन इस दौरान उन्हें दंगा पीड़ितों की कटु आलोचना का सामना करना पडा है.
दंगा पीड़ितों ने रविवार को एक पत्र लिखकर कहा है कि इस तरह के उपवास से उन्हें किसी तरह की सद्भभावना नहीं मिलने वाली है.
उल्लेखनीय है कि दंगों के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ निचली अदालत फैसला करे जिसके बाद मोदी ने इसे क्लीन चिट के तौर पर प्रचारित किया और तीन दिन उपवास रखने की घोषणा की थी.
दंगा पीड़ितों ने रविवार को अहमदाबाद के नरोडा पाटिया में सांकेतिक उपवास रखने की कोशिश की लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर ले गई.
दंगा पीड़ितों ने पत्र लिखकर मोदी के उपवास को पब्लिसिटी स्टंट करार दिया है और कहा है, ‘‘ आप अगर इतने ही बड़े मुख्यमंत्री हैं जिसका आप दावा करते हैं तो साबरमती एक्सप्रेस में मारे गए 58 लोगों की जान आपने क्यों नहीं बचा ली. इस घटना के बाद इतने मुसलमान क्यों मारे गए आपके समय में.’’
हालांकि मुख्यमंत्री मोदी इन आरोपों से विचलित नहीं दिखाई दिए और बात बात पर गुजरात के विकास की दुहाई देते रहे. इन तीन दिनों में टीवी चैनलों के साथ इंटरव्यू में उन्होंने बार बार यही कहा कि लोग गुज़रात में हो रहे विकास पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.
मोदी के उपवास के दौरान सभी धर्मों के नेताओं को भी बुलाया गया था और उनसे स्टेज पर मिलने वालों में कुछ मुसलिम नेता भी थे.
दंगा पीड़ितों ने मोदी से मिलने गए मुसलिम नेताओं की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ये नेता बिकाऊ हैं.
मुसलिम नेता मोदी से मिलने गए लेकिन मोदी ने मुसलिम नेताओं की तरफ से भेंट की गई टोपी नहीं पहनी. हालांकि मोदी पिछले दो दिनों में हर समुदाय की तरफ से भेंट की गई अलग अलग टोपियों में देखे गए हैं.
विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने भी मोदी की आलोचना करते हुए कहा है कि ये छवि बदलने का तरीका मात्र है.
मोदी के उपवास के जवाब में कांग्रेस पार्टी के नेता शंकर सिंह वाघेला भी साबरमती आश्रम के सामने अनशन पर बैठे हैं.
































