'भारतीय परमाणु सामग्री बहुत सुरक्षित नहीं'

निया में ऐसे देशों की तादाद बढ़ रही है जिनके पास बम बनाने लायक परमाणु सामग्री हो

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एक अमरीकी थिंक टैंक के आकलन के अनुसार भारत, चीन, इसराइल, पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया परमाणु सुरक्षा के मामलों में दुनिया के कम पारदर्शी देशों में से हैं.

अमरीका स्थित न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव का कहना है कि रिपोर्ट का उद्देश्य लोगों का इस बात की तरफ़ ध्यान खींचना है कि सरकारें दुनिया के सबसे घातक हथियारों को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कर सकती हैं.

इस रिपोर्ट में 32 ऐसे देशों का भिन्न पैमानों पर अध्ययन किया गया है, जिनके पास बम बनाने योग्य परमाणु सामग्री मौजूद है.

इस रिपोर्ट का कहना है कि परमाणु सामग्री के मामले में अधिक पारदर्शिता की सख्त ज़रूरत है ताकि दुनिया में लोगों को उनके सुरक्षित रहने का भरोसा रहे.

चरमंपथी खतरा

32 देशों की इस सूची में सबसे ऊपर ऑस्ट्रेलिया है और सबसे नीचे उत्तरी कोरिया. चीन को तमाम अध्ययन औसतों के आधार पर 27 वां स्थान दिया गया है जबकि भारत 28 वें स्थान पर है. पाकिस्तान का स्थान इस सूची में भारत से दो पायदान नीचे 31 पर है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्थिर अपारदर्शी सुरक्षा मानकों का मतलब है कि परमाणु सामग्री के आवंछित हाथों में पड़ने की ज़्यादा संभावनाएं.

दुनिया में कई तरह के चरमपंथी संगठन हैं, जो किसी भी क़ीमत पर परमाणु सामग्री को हथियाना चाहते हैं. इसके अलावा इंटरनेट पर विद्रोही वैज्ञानिकों की ओर से एक छोटा मोटा परमाणु बम बनाने लायक काफ़ी जानकारी छोड़ दी गई है .

इस रिपोर्ट में कहा गया है "चरमपंथियों का बम बनाना कतई आसान नहीं है लेकिन यह एकदम असंभव भी नहीं है."

पैमाने

संस्था ने देशों की रैंकिंग तय करते वक़्त पांच पैमानों पर देशों को परखा है.

इनमे से सबसे पहला पैमाना है परमाणु सामग्री की मात्रा और इसे उत्पादित करने के स्थान.

दूसरा मानक है सुरक्षा और नियंत्रण, जिसमें यह आंका गया है कि भिन्न देशों की अपनी परमाणु सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या ज़रूरतें हैं. इसके अलावा देशों को इस बात पर भी परखा गया है कि वो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर कितना खरे उतरते हैं.

इस रिपोर्ट को बनाने वालों ने इस बात का भी अध्ययन किया है कि इन देशों की सरकारें अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने में कितनी सक्षम हैं.

इस रिपोर्ट में अंतिम पैमाने के तौर पर इन देशों में सामाजिक स्थिति का आकलन किया गया है. सामाजिक आकलन के वक़्त इन देशों में भ्रष्टाचार और सरकारों की स्थिरता का भी अध्ययन किया गया है.

गंभीर हालात

इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में इस बात पर कोई आम सहमति नहीं है कि परमाणु सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए क्या क्या किया जा सकता है.

सरकारें जानबूझ कर परमाणु सामग्री के मामलों में पारदर्शिता नहीं बरतती हैं ताकि किसी तरह से किसी को जिम्मेवार ना ठहराया जा सके.

इस रिपोर्ट में इस बात का ख़तरा भी जताया गया है कि दुनिया में ऐसे देशों की तादाद बढ़ सकती हैं, जिनके पास बम बनाने लायक परमाणु सामग्री हो.