रुश्दी को लेकर स्थिति अब भी साफ़ नहीं

सलमान रुश्दी

इमेज स्रोत, Getty

इमेज कैप्शन, रुश्दी का उपन्यास 'सैटेनिक वर्सेस' काफ़ी विवादित रहा है और उन्हें इसके कारण दुनिया भर में विरोध का सामना भी करना पड़ा

लेखक सलमान रुश्दी के जयपुर साहित्य समारोह में आने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. उधर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि रुश्दी की यात्रा से सुरक्षा को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है.

गौरतलब है कि दारुल उलूम ने भारत सरकार से मांग की है कि वो विवादित लेखक का वीज़ा रद्द कर दे ताकि वे यहाँ न आ सकें, लेकिन रश्दी का कहना है कि भारत आने के लिए उन्हें वीज़ा की ज़रूरत नहीं है.

पूर्व कार्यक्रम के अनुसार सलमान रुश्दी 20 से 24 जनवरी तक राजस्थान की राजधानी जयपुर में होने वाले साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने भारत आने वाले थे, लेकिन अब आयोजकों का कहना कि वो 20 जनवरी को भारत नहीं आ रहे हैं.

जयपुर समारोह की वेबसाइट पर सलमान रुश्दी का नाम अभी भी भाषण देने वालों की सूची में है.

आयोजकों द्वारा जारी वक्तव्य से स्थिति साफ़ नहीं हो पा रही है. उन्होंने कहा है कि सलमान रुश्दी को भेजा न्यौता वापस नहीं लिया गया है.

आयोजक संजय रॉय ने कहा कि उनके ऊपर केंद्र और राज्य सरकार दोनो का कोई दबाव नहीं है कि वो रुश्दी को भेजा गया निमंत्रण वापस ले लें.

उन्होंने ये भी कहा कि सलमान रुश्दी 20 जनवरी को भारत नहीं आ रहे हैं.

मुख्यमंत्री की गृहमंत्री से मुलाकात

उधर मुख्यमंत्री गहलोत ने गृहमंत्री चिदंबरम से मुलाकात की है.

चिदंबरम से मुलाकात के बाद गहलोत ने पत्रकारों को बताया, “मुझे आधिकारिक तौर पर पता नहीं है कि रुश्दी आ रहे हैं या नहीं. इस बारे में हमारे पास कोई आधिकारिक संदेश नहीं आया है. स्थानीय लोगों नहीं चाहते हैं सलमान यहाँ आएँ.”

गहलोत ने कहा कि राज्य से प्रमुख सचिव आयोजकों के संपर्क में हैं.

उन्होंने कहा, “कोई भी राज्य सरकार खराब कानून व्यवस्था नहीं चाहती. मैने केंद्र सरकार को स्थानीय भावनाओं से अवगत करवा दिया है.”

सवालों के जवाब में गहलोत ने ये भी कहा कि सलमान रश्दी पर्सन ऑफ़ इंडियन ओरिजिन (यानि उन्हें भारतीय मूल के नागरिक का दर्जा हासिल) हैं और सरकार उन्हें भारत आने से नहीं रोक सकती, ना ही आयोजकों को कोई सलाह दे सकती है, लेकिन गहलोत ने लोगों की भावनाओं को महत्वपूर्ण बताया.

दारुल उलूम देवबंद का कहना है कि सलमान रुश्दी ने अपने उपन्यास से मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाई है.

रुश्दी का उपन्यास 'सैटेनिक वर्सेस' काफ़ी विवादित रहा है और उन्हें इसके कारण दुनियाभर में विरोध का सामना भी करना पड़ा.

दारुल उलूम उत्तर प्रदेश में है जहाँ फ़रवरी में चुनाव होने हैं. संवाददाताओं का कहना है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी मुसलमानों को नाराज़ नहीं करना चाहती.

वैसे सलमान रुश्दी पहले भारत आ चुके हैं. वे कई बार निजी दौरों पर और 2007 में जयपुर साहित्य समारोह में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं.