मनमोहन सिंह बयान वापस लें : एस पी उदय कुमार

कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के खिलाफ 'पीपुल्स मूवमेंट' के संयोजक एसपी उदय कुमार ने परियोजना में देरी का ठीकरा अमरीका के गैर सरकारी संगठनों के सिर फोड़ने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आड़े हाथों लेते हुए उनसे अपना बयान वापस लेने या इस्तीफा देने की मांग की है.
उदय कुमार ने कहा, ''प्रधानमंत्री अपना बयान वापस लें. उन्होंने जो कहा, उसका उन्हें सबूत देना चाहिए, वरना इस्तीफा देना चाहिए.''
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री को ये साबित करना चाहिए कि कुडनकुलम परियोजना का विरोध अमरीका प्रायोजित है. हम राजनीतिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं.''
अमरीका और अन्य देशों से आर्थिक मदद मिलने के आरोपों पर, टाइम्स नॉउ न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, ''ये एकदम बकवास बात है. हमें किसी से कोई धन नहीं मिल रहा है.''
'शर्मनाक और दर्दनाक'
उदय कुमार ने कहा, ''ये बड़ी बिडम्बना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री ने उन लाखों लोगों को सांत्वना देने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा जो बीते सात महीने से इसके खिलाफ जूझ रहे हैं. वे उल्टे आरोप लगा रहे हैं जो निराधार हैं, ये बेहद शर्मनाक और दर्दनाक है.''

अपने खिलाफ लगे आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उदय कुमार ने कहा, ''इन आरोपों का कोई आधार नहीं है. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री नारायण सामी ने मुझ पर आरोप लगाया था कि मैंने भी 1.5 करोड़ रूपए लिए हैं.''
उन्होंने कहा, ''लेकिन मैंने जब कानूनी नोटिस भेजा तो सामी ने कहा कि मैंने ऐसा कभी नहीं कहा था. इस व्यक्ति की न कोई प्रतिष्ठा है न कोई भरोसा.''
कुडनकुलम परियोजना की सुरक्षा संबंधी चिंताओं की पड़ताल के लिए सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी की राय के बारे में पूछने पर उदय कुमार ने कहा, ''ये कमेटी चंद घंटों के लिए परियोजना स्थल पर गई थी. कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट देने से पहले ही परियोजना को क्लीन चिट दे दी थी. ये सही नहीं है. हमने कमेटी से कहा कि परियोजना का दूसरा पहलू भी है, कृपया हमारे विशेषज्ञों की राय भी सुनिए. लेकिन वे हमें सुनना ही नहीं चाहते थे.''
क्या बोले मनमोहन
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुडनकुलम परमाणु संयंत्र शुरू होने में देरी के लिए अमरीका के गैर सरकारी संगठनों को जिम्मेदार बताया है.
मनमोहन सिंह ने प्रतिष्ठित 'साइंस' जर्नल से कहा है कि ये समूह भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को नहीं समझ पा रहे हैं.
कुडनकुलम परमाणु संयंत्र तमिलनाडु के तिरुनलवेली जिले में स्थित है जहां एक हजार मेगावॉट के दो संयंत्र शुरू होना है.
सुरक्षा चिंताओं पर स्थानीय लोगों के विरोध की वजह से कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का काम बाधित होता रहा है.
आलोचकों का कहना है कि मनमोहन सिंह की ये टिप्पणियां भारत में उदारवाद के पहले के दिनों की याद दिलाते हैं जब यहां के नेता देश की हर समस्या के लिए विदेशी मुल्कों को जिम्मेदार बताते थे.
'हम चीन की तरह नहीं'
कुडनकुलम का विरोध कई महीनों से हो रहा है. इसका विरोध का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ''आप जानते हैं कि कुडनकुलम में क्या हो रहा है.''
उन्होंने कहा, ''भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम गैर सरकारी संगठनों की वजह से मुश्किलों में पड़ गया है. मेरा मानना है कि इनमें से ज्यादातर अमरीकी है जो हमारे देश की ऊर्जा आपूर्ति की बढ़ती जरूरतों को नहीं मानते.''
मनमोहन सिंह ने ये भी कहा कि भारत में जैनेटिक्ली मोडिफ़ाइड फ़सलों की पैदावार का भी अमरीका और स्कैंडिनेविया के मुल्कों में विरोध हुआ है.
आनुवांशिक रूप से परिवर्तित बीटी बैंगन की कारोबारी स्तर पर खेती को टालने के सरकार के वर्ष 2010 के एक फैसले का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि जैव-तकनीक के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत को इसका इस्तेमाल करना चाहिए.
उन्होंने कहा, ''लेकिन इसमें विवाद भी हैं. कुछ गैर सरकारी संगठन हैं जो विकास की उन चुनौतियों को पूरी तरह नहीं मानते जिनका सामना हमारा देश करता है. इन संगठनों को अमरीका और स्केंडिनेवियन देशों से अक्सर वित्तीय मदद मिलती है.''
मनमोहन सिंह ने ये भी कहा, ''लेकिन हम एक लोकतंत्र हैं, हम चीन की तरह नहीं हैं.''
































