कोई हिंदुत्ववादी बने प्रधानमंत्रीः ठाकरे

शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे का कहना है कि भारत का अगला प्रधानमंत्री हिंदू विचारधारा का कोई व्यक्ति होना चाहिए.
समझा जा रहा है कि उनका ये बयान विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी जनता दल (युनाईटेड) को नापसंद हो सकता है जिसने अगले चुनाव में एक धर्मनिरपेक्ष नेता को प्रधानमंत्री बनाने की हिमायत की है.
इसी सप्ताह जेडी(यू) नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने इशारों में ये कहा था कि 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार ‘धर्मनिरपेक्ष‘ होना चाहिए.
अब बाल ठाकरे ने अपनी पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने संपादकीय में लिखा है – "एक कट्टर हिंदुत्ववादी को भारत का प्रधानमंत्री होना चाहिए."
उन्होंने साथ ही नीतिश कुमार के बयान की ओर इशारा करते हुए कहा है कि धर्मनिरपेक्षवादी लोग नहीं चाहते कि हिंदू विचारधारा का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री पद तक पहुँचे.
ठाकरे ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष शब्द एक ‘गाली’ के समान बन गया है.
एनडीए की घटक दल शिव सेना ने बीजेपी की अगुआई वाले विपक्षी गठजोड़ की राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी का नाम घोषित ना करने के लिए उनकी आलोचना भी की है.
ठाकरे ने लिखा है – "चूँकि उनका कोई अपना उम्मीदवार नहीं है, इसलिए उन्होंने पी ए संगमा को उधार ले लिया."
शिव सेना प्रमुख ने फिर से राष्ट्रपति पद के यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को अपनी पार्टी का समर्थन दिए जाने की बात कही और लिखा है कि ये फ़ैसला देश के हित में लिया गया है.
लेकिन साथ-साथ उन्होंने कहा है कि पी ए संगमा को समर्थन नहीं देने का मतलब ये नहीं है कि एनडीए बँटा हुआ है और कांग्रेस को यदि ऐसा लगता है तो ये ग़लत है.
उन्होंने साथ ही नीतिश कुमार के बयान की ओर इशारा करते हुए कहा है कि धर्मनिरपेक्षवादी लोग नहीं चाहते कि हिंदू विचारधारा का कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री पद तक पहुँचे.
ठाकरे ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष शब्द एक ‘गाली’ के समान बन गया है.
राष्ट्रपति चुनाव
एनडीए की घटक दल शिव सेना ने बीजेपी की अगुआई वाले विपक्षी गठजोड़ की राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी का नाम घोषित ना करने के लिए उनकी आलोचना भी की है.
ठाकरे ने लिखा है – "चूँकि उनका कोई अपना उम्मीदवार नहीं है, इसलिए उन्होंने पी ए संगमा को उधार ले लिया."
शिव सेना प्रमुख ने फिर से राष्ट्रपति पद के यूपीए उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को अपनी पार्टी का समर्थन दिए जाने की बात कही और लिखा है कि ये फ़ैसला देश के हित में लिया गया है.
लेकिन साथ-साथ उन्होंने कहा है कि पी ए संगमा को समर्थन नहीं देने का मतलब ये नहीं है कि एनडीए बँटा हुआ है और कांग्रेस को यदि ऐसा लगता है तो ये ग़लत है.
































