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भारत से ताज़ा विवाद पर चीन की क्या है दलील
बीते कुछ हफ्तों से सिक्किम से लगी भारत और चीन की सीमा के पास तनाव की स्थिति बनी हुई है.
ये इलाक़ा भूटान की सीमा से भी लगा हुआ है.
दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाज़ी का दौर थमता हुआ नहीं दिख रहा है. बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भारत का मुद्दा इस कदर छाया हुआ था कि भारत का नाम 52 बार लिया गया.
बीजिंग का कहना है कि भारत-चीन सरहद के सिक्किम और तिब्बत वाले हिस्से में सीमाओं का निर्धारण ब्रिटिश काल (1890) में ही हो चुका है.
चीन का दावा है कि इस सिलसिले में सबूत के तौर पर उसके पास चीन के प्रीमियर जाउ इनलै को लिखी जवाहरलाल नेहरू की चिट्ठी भी है.
नेहरू की चिट्ठी
इसके अलावा चीन का कहना है कि 12 फरवरी, 1960 को बीजिंग के भारतीय दूतावास ने उसके विदेश मंत्रालय को एक नोट में लिखा था, "भारत सरकार सिक्किम, भूटान और तिब्बत सीमा को लेकर चीन की तरफ से भेजे गए नोट में दिए गए स्पष्टीकरण का स्वागत करती है. इस नोट में कहा गया है कि सिक्किम और चीन के तिब्बत के बीच सीमा का निर्धारण औपचारिक तौर पर काफी पहले तय हो गया है. नक्शे पर न तो किसी तरह की कोई खामी है और नही कोई विवाद मौजूद है. भारत सरकार ये भी कहना चाहती है कि ज़मीन पर भी सीमाओं का निर्धारण हो गया है."
बीजिंग का ये भी आरोप है कि उसके घरेलू मामलों में दखल देकर भारत 1950 के दशक में चीन, भारत और बर्मा के बीच हुए पंचशील समझौते का उल्लंघन कर रहा है.
हालांकि चीन के विदेश मंत्रालय के सामने नेहरू की उसी चिट्ठी का हवाला देकर ये सवाल भी रखा गया गया कि चीन के नक्शे में भूटान का एक बड़ा हिस्सा तिब्बत का दिखाया गया है और इस मसले पर भारत और चीन के बीच वार्ता की बात भी कही गई है.
जिसका जवाब चीन के प्रवक्ता ने ये कहकर टाल दिया कि उन्हें इस चिट्ठी के बताए गए पहलू के बारे में जानकारी नहीं है.
डोकलाम पर चीन का रुख
पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश से भारत-चीन विवाद की शुरुआत हुई. भारत में डोकलाम के नाम से जाने जाने वाले इस इलाके को चीन में डोंगलोंग नाम से जाना जाता है.
ये इलाका वहां है जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं. भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है.
चीन का कहना है कि 1890 के समझौते में भारत-चीन सीमा के सिक्किम वाले हिस्से का जिक्र है. इसके मुताबिक भारत-चीन सीमा का सिक्किम वाला हिस्सा पूरब में माउंट गिपमोची से शुरू होता है.
चीन दावा करता है कि भारतीय सैनिक सिक्किम सेक्शन में माउंट गिपमोची से दो किलोमीटर भीतर अवैध तरीके से दाखिल हुए हैं और इसका उस हिस्से से कोई लेनादेना नहीं है जहां तीनों देशों (भूटान सहित) की सीमाएं मिलती हैं.
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