उर्दू प्रेस रिव्यूः 'कुलभूषण मामले में पाकिस्तान की पैरवी के लिए वकील को दिए गए 20 करोड़ रुपये'

कुलभूषण जाधव

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इमेज कैप्शन, कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में मौत की सज़ा दी गई है
    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान का सालाना बजट और 29 अप्रैल को लाहौर में इमरान ख़ान की पार्टी की रैली से जुड़ी ख़बरों ने सुर्ख़ियां बटोरीं.

सबसे पहले बात पाकिस्तान के सालाना बजट की. इसी हफ़्ते पाकिस्तान का सालाना बजट भी पेश हुआ. केंद्रीय वित्त मंत्री मिफ़्ताह इस्माइल ने भारी शोर-शराबे, हाथापाई और नारेबाज़ी के बीच संसद में बजट पेश किया.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार, विपक्षी पार्टियों ने पहले तो बजट की कॉपी फाड़ी, वित्त मंत्री के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की लेकिन जब संसद अध्यक्ष के आदेश पर वित्त मंत्री बजट का भाषण देते रहे तो विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया.

अख़बार जंग ने बजट के हवाले से एक ख़ास जानकारी दी है. अख़बार के अनुसार, कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक अदालत में पाकिस्तान की पैरवी कर रहे वकील को 20 करोड़ पाकिस्तानी रुपए दिए गए हैं.

कुलभूषण जाधव भारतीय नागरिक हैं जो इस समय जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी जेल में सज़ा काट रहे हैं. पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी.

भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायिक अदालत में इसे चुनौती दी थी जिसके बाद अदालत ने मौत की सज़ा पर रोक लगा दी थी. फ़िलहाल ये मामला अंतरराष्ट्रीय अदालत में चल रहा है.

पाकिस्तान

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के बजट में रक्षा के लिए 11 अरब डॉलर

सालाना बजट में बरपा हंगामा

वहीं, सालाना बजट पेश करने वाले मिफ़्ताह इस्माइल को कुछ घंटे पहले ही वित्त मंत्री बनाया गया था. मौजूदा सरकार 30 मई को अपना कार्यकाल पूरा कर लेगी और एक जून से आंतरिक सरकार काम करेगी.

विपक्ष का इन्हीं दो मुद्दों पर सख़्त विरोध था. उनके अनुसार केवल कुछ घंटे पहले वित्त मंत्री बनाए गए एक ग़ैर-निर्वाचित व्यक्ति का बजट पेश करना ग़लत है और दूसरा ये कि इस सरकार को पूरे साल का बजट पेश करने का कोई हक़ नहीं है.

लेकिन सत्तारुढ़ पार्टी का कहना है कि इसमें कुछ भी ग़ैर-क़ानूनी या असंवैधानिक नहीं है.

रोज़नामा ख़बरें के अनुसार वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया उसमें रक्षा के लिए लगभग 11 अरब डॉलर रखा गया है जो कि पिछले साल के मुक़ाबले 19.5 फ़ीसदी अधिक है.

लेकिन अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार, पाकिस्तान का रक्षा बजट भारत के रक्षा बजट से बहुत कम है.

अख़बार के अनुसार भारत का रक्षा बजट क़रीब 62 अरब डॉलर है.

नवाज़ शरीफ़

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इमेज कैप्शन, इमरान ख़ान ने नवाज़ शरीफ़ को मारकोस बताया है

इमरान ख़ान का शरीफ़ बंधुओं पर हमला

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के अध्यक्ष इमरान ख़ान रविवार, 29 अप्रैल को लाहौर के ऐतिहासिक मीनार-ए-पाकिस्तान पर एक रैली करेंगे.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, इस रैली में इमरान ख़ान अपनी पार्टी की नई नीतियों की घोषणा करेंगे जो कि 10 बिंदुओं पर आधारित होंगी.

इमरान ख़ान ने इसे ''मदर ऑफ़ ऑल जलसा'' क़रार दिया है.

रैली से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान इमरान ख़ान ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ पर जमकर हमला बोला.

इमरान ख़ान

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इमेज कैप्शन, इमरान ख़ान ने रैली को 'मदर ऑफ़ ऑल जलसा' क़रार दिया है

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान का कहना था कि नवाज़ शरीफ़ नेल्सन मंडेला नहीं बल्कि मारकोस हैं जबकि उनके भाई और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ भ्रष्ट टोले के प्रमुख हैं.

शहबाज़ शरीफ़ ने भी इमरान ख़ान को करारा जवाब दिया.

रोज़नामा ख़बरें के अनुसार शहबाज़ शरीफ़ का कहना था, ''इलज़ाम ख़ान (इमरान ख़ान) ने ख़ैबर पख़्तूनख़्वा और आसिफ़ अली ज़रदारी ने सिंध को बर्बाद कर दिया है.''

इमरान ख़ान ने अपनी बातचीत में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ज़िक्र किया. इमरान ख़ान का कहना था, ''नरेंद्र मोदी का माइंडसेट ऐसा नहीं कि उनसे बातचीत की जाए.''

मोदी

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इमेज कैप्शन, इमरान ख़ान ने नरेंद्र मोदी के माइंडसेट पर भी टिप्पणी की है

पाकिस्तान-रूस की दोस्ती

अख़बार दुनिया में एक ख़ास ख़बर छपी है जिसके पाकिस्तान और रूस के बीच बढ़ती दोस्ती अमरीका के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है.

दुनिया के अनुसार प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार एक बड़े प्रतिनिधि मंडल के साथ रूस गए थे और उसके बाद सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा भी रूस गए थे.

अख़बार लिखता है कि क्षेत्र में बदलते हालात और अपने सामरिक हितों को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान एक बड़ी करवट ले रहा है.

पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव शमशाद अहमद ख़ान के हवाले से अख़बार लिखता है कि अमरीका को ये बात पसंद नहीं आ रही है और वो इस नए घटनाक्रम को लेकर चिंतित है.

शमशाद ख़ान कहते हैं, ''अंतरराष्ट्रीय संबंधों में दिलों की बात कम होती है, हितों की ज़्यादा. हालात हमेशा एक जैसे नहीं रहते. ये बहुत पहले हो जाना चाहिए था.''

उनके अनुसार पाकिस्तान और रूस को क़रीब लाने में चीन की बड़ी भूमिका है और ये अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक नई लामबंदी की ओर इशारा करती है.

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