कोरोना वायरसः श्रीलंका में मुसलमानों के जबरन दाह संस्कार का आरोप

श्रीलंका मुसलमान

इमेज स्रोत, Nikita Deshpande

    • Author, सरोज पथिराना
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, सिंहला सेवा

श्रीलंका के मुसलमान समुदाय ने प्रशासन पर कोरोना वायरस महामारी की आड़ में उनसे भेदभाव करने का आरोप लगाया है.

उनका कहना है कि कोविड-19 के कारण हुई मौतों के मामले में प्रशासन शवों का जबरन दाह संस्कार करा रही है जबकि इस्लाम में ये वर्जित है. इस्लाम में मृतक को दफनाया जाता है.

04 मई को 44 साल की फ़ातिमा रिनोज़ा को कोविड-19 संक्रमण के शक़ में अस्पलात में भर्ती कराया गया था.

फ़ातिमा तीन बच्चों की मां हैं और श्रीलंका की राजधानी कोलोम्बो में रहती हैं. उन्हें सास लेने में दिक्कत पेश आ रही थी और प्रशासन को शक़ था कि उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है.

फ़ातिमा के पति मोहम्मद शफ़ीक कहते हैं कि जिस दिन फ़ातिमा को अस्पताल में भर्ती कराया गया उसी दिन से प्रशासन ने उनके परिवार को एक तरह से अपने कब्ज़े में ले लिया था.

वो कहते हैं, "पुलिस अधिकारी और सैन्य अधिकारी हमारे घर पहुंच गए."

"उन्होंने हमें हमारे घर से बाहर निकाल दिया और पूरे घर में, हर जगह कीटाणुनाशक का छिड़काव किया. हम पहले की काफी डरे हुए थे लेकिन उन्होंने भी हमें कुछ नहीं बताया. हमारे घर की तीन महीने की बच्ची का भी कोरोना टेस्ट किया गया. वो हमें कुत्ते की तरह घर से निकाल कर क्वारंटीन सेंटर ले कर आ गए."

फ़ातिमा के परिवार को पूरी रात क्वारंटीन सेंटर में रोक कर रखा गया और उन्हें दूसरे दिन छोड़ दिया गया. उनसे कहा गया कि वो दो सप्ताह कर आइसोलेशन में रहें.

लेकिन अब तक परिवार को अस्पताल से ख़बर मिल चुकी थी कि फ़ातिमा की मौत हो गई है.

दस्तावेज़ों पर जबरन करवाए गए दस्तख़त

फ़ातिमा के बालिग़ बेटे को अस्पताल आने के लिए कहा गया ताकि वो अपनी मां की पहचान कर सकें. उन्हें बताया गया कि फ़ातिमा की मौत कोविड-19 के कारण हुई है इस कारण उनका शव परिवार को लौटाया नहीं जा सकता.

फ़ातिमा के बेटे बताते हैं कि प्रशासन ने उनसे जबरन कुछ दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करवाए जिसमें लिखा था कि फातिमा के शव को दफनाया नहीं जाएगा बल्कि उनका दाह संस्कार किया जाएगा. वो कहते हैं कि इस्लामी क़ानून में मृतक को दफनाया जाता है, उसका दाह संस्कार करना उसके शरीर के साथ सही नहीं माना जाता है.

मोहम्मद शफ़ीक का आरोप है कि अस्पताल में जो कुछ हुआ उसके बारे में परिवार को पूरी जानकारी नहीं दी गई. वो कहते हैं, "मेरे बेटे से कहा गया कि फ़ातिमा के शरीर के कुछ हिस्सों को और टेस्टिंग के लिए अलग किया जाएगा. अगर फ़ातिमा कोरोना पॉज़िटिव थीं तो उनके शरीर के हिस्से उन्हें क्यों चाहिए?"

अब फ़ातिमा का परिवार उन अनेक श्रीलंकाई परिवारों में से एक है जो सरकार पर कोरोना महामारी की आड़ में उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगा रहा है.

श्रीलंका मुसलमान

इमेज स्रोत, Nikita Deshpande

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देश

इन परिवारों का कहना है कि प्रशासन उन पर कोविड-19 से मरने वाले परिजनों का दाह संस्कार करने का दवाब बना रहा है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार कोरोना पॉज़िटिव के शव को दफनाया भी जा सकता है.

इनका आरोप है कि ये बहुसंख्यक सिंहला आबादी द्वारा उनकी जांच कराने और फिर उन्हें डराने का नया पैटर्न बन गया है.

अप्रैल 2019 में इस्लामी चरमपंथियों से जुड़े कुछ स्थानीय समूहों ने कोलम्बो के जानेमाने होटलों और चर्चों को आत्मघाती बम धमाकों का निशाना बनाया था. इन धमाकों में 250 लोगों की मौत हुई थी जिनमें कई विदेशी भी शामिल थे.

इन हमलों की ज़िम्मेदारी कथित इस्लामी चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट ने ली थी जो श्रीलंका के लिए चौंकाने वाली बात थी. कई मुसलमानों को लगता है कि इन आत्मघाती हमलों के बाद से उन्हें दुश्मन की तरह देखा जा रहा है.

क्या शव दफनाने में जोखिम हो सकता है?

मार्च 31 को श्रीलंका में कोरोना वायरस के कारण पहले मुसलमान व्यक्ति की मौत हुई. इसके बाद से कई मीडिया रिपोर्टों में खुल कर बीमारी को फैलाने के लिए मुसलमानों को ज़िम्मेदार ठहराया गया. हालांकि आधिकारिक तौर पर अब तक देश में कोरोना के कारण कुल 11 लोगों की मौत हुई है और सभी मृतकों का दाह संस्कार किया गया है

श्रीलंकाई सरकार में चीफ़ एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉक्टर सुगता समरवीरा कहती हैं कि कोरोना महामारी के लिए सरकार की ये नीति है कि अगर किसी की मौत कोविड-19 से होती है या फिर मरने वाले के कोरोना संक्रमित होने का शक़ होता है तो ऐसे मामलों में मृतक का शव जलाया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि दफनाना से ग्राउंड वॉटर के दूषित होने का ख़तरा होता है.

डॉक्टर समरवीरा कहती हैं कि "समाज की भलाई के लिए ही" स्वास्थ्य मंत्रालय में क्लिनिकल एक्सपर्ट्स ने ये नीति अपनाई है.

लेकिन मुसलमान एक्टविस्ट्स, समुदाय से जुड़े नेताओं और राजनेताओं ने सरकार से अपने इस फ़ैसले पर एक बार फिर विचार करने के लिए कहा है.

"शवों को जलाने वाला एकमात्र देश"

पूर्व मंत्री और आगामी आम चुनावों में उम्मीदवार अली ज़ाहिर मौलाना ने अदालत में एक याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 182 सदस्य देशों में श्रीलंका एकमात्र ऐसा देश है जहां कोविड-19 से मरने वालों का दाह संस्कार किया जा रहा है.

मौलाना ने बीबीसी को बताया कि "अगर इस बात का कोई सबूत या फिर कोई वैज्ञानिक आधार है कि कोविड-19 के मृतक को दफनाने से सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुक़सान होता है तो" देश का मुसलमान समुदाय सरकार का फ़ैसला ज़रूर स्वीकार करेगा.

श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी उनके इस बयान से इत्तेफ़ाक रखते हैं. वो कहते हैं कि ये स्पष्ट है कि दाह संस्कार के पक्ष में न तो कोई सबूत हैं और न ही स्वस्थ्य से जुड़े कारण, सरकार ने "राजनीतिक एजेंडे" के तहत नस्ल के आधार पर देश को बांटने के लिए ये फ़ैसला लिया है.

श्रीलंका मुसलमान

इमेज स्रोत, EPA/CHAMILA KARUNARATHNE

इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर

अलग लोगों के लिए अलग नियम

जिस दिन फ़ातिमा की मौत हुई उसी दिन कोलोम्बो में 64 साल के अब्दुल हमीद मोहम्मद रफ़ाएदीन की मौत उनकी बहन के घर पर हुई.

चार बच्चों के पिता रफ़ाएदीन मज़दूरी का काम करते और उन्हें भी सांस लेने में दिक्कत आ रही थी.

उनके सबेसे छोटे बेटे नौशाद रफ़ाएदीन कहते हैं कि उसी दिन उनके पड़ोस में एक और व्यक्ति की मौत हुई थी जो बहुसंख्यक सिंहला धर्म से थे.

नौशाद बताते हैं कि उस वक्त देश में कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा हुआ था और कहीं आने जाने पर पाबंदी थी. स्थानीय पुलिस ने उनके परिवार से कहा कि वो अपने पिता और अपने पड़ोसी के शव ले कर अस्पताल पहुंचें.

अस्पताल के शवगृह में कोविड-19 क ख़तरा बताते हुए डॉक्चरों ने उन्हें अपने पिता के शव को छूने की इजाज़त नहीं दी. हालांकि अब तक ये स्पष्ट नहीं था कि उनके पिता की मौत कोविड-19 से ही हुई है.

समाज में भेदभाव का डर

नौशाद को पढ़ना नहीं आता. उनसे कहा गया कि उन्हें कुछ दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने हैं ताकि प्रशासन उनकी इजाज़त से उनके पिता का दाह संस्कार करा सके.

नौशाद कहते हैं कि उन्हें ये नहीं पता था कि अगर उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उनके साथ क्या होगा, लेकिन उन्हें डर था कि अगर उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना किया तो उनके परिवार को समुदाय में भेदभाव सहना पड़ सकता है. हालांकि वो बताते हैं कि उनके पड़ोसी के साथ अलग व्यवहार किया गया था.

वो कहते हैं, "पड़ोसी के शव के साथ अस्पताल पहुंचे तो वहां उन्हें उनके पास जाने दिया गया और उन्हें दफनाने की भी इजाज़त दी गई."

वो कहते हैं कि उनके पड़ोसी के रिश्तेदारों को मृतक के आख़िरी दर्शन करने की इजाज़त भी मिली जबकि अपने पिता के दाह संस्कार के वक्त वो और उनके कुछ रिश्तेदार ही मौजूद रह सके थे.

इस बीच फ़ातिमा की मौत को अब छह सप्ताह बीत चुके हैं और शफ़ीक उनकी यादों के साथ जीना सीख रहे हैं.

कोरोना वायरस टेस्टिंग मामलों की निगरानी करने वाले डॉक्टरों ने कहा है कि फ़ातिमा का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव नहीं आया था जबकि अस्पताल को शक़ को था उनके पॉज़िटिव होने का शक़ था. इस जानकारी के बाद फ़ातिमा का परिवार अब और भी कन्फ्यूज़्ड है.

शफ़ीक कहते हैं, "हम मुसलमान मरने वालों का दाह संस्कार नहीं करते. अगर उन्हें पता था कि फ़ातिमा को कोरोना नहीं है तो फिर उन्होंने उसका दाह संस्कार क्यों किया?"

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

End of कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
End of मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

End of अपने आप को और दूसरों को बचाना

मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

End of मैं और मेरा परिवार
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
लाइन
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)