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कोविड महामारी: 'ब्राज़ील ने वो सब किया, जो कोरोना में नहीं करना था'
- Author, ओर्ला ग्वेरिन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, ब्राज़ील
अगर जोसिल्डो डे मोउरा की जान बच जाती, तो इस बार दिसंबर में वे अपनी शादी की 40वीं सालगिरह मना रहे होते.
लेकिन पाँच बच्चों के पिता और समर्पित पति मोउरा, बीती मई में ब्राज़ील के साओ पाओलो शहर के अस्पताल में एक-एक साँस के लिए तड़पते हुए मर गए.
ब्राज़ील के दूसरे तमाम नागरिकों की तरह 62 वर्षीय मोउरा भी वैक्सीन का इंतज़ार कर रहे थे.
अपने बच्चों और नाती-पोतों से घिरी हुईं उनकी पत्नी सिडा कहती हैं, "ये दर्द ख़त्म नहीं होता. हर रोज़ सुनने को मिल रहा है कि दूसरे कई परिवार अपनों को खोकर हमारी तरह जी रहे हैं."
ब्राज़ील में कोरोना वायरस की वजह से लगभग पाँच लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में ब्राज़ील सिर्फ़ अमेरिका से पीछे है.
ब्राज़ील के विशेषज्ञों की मानें, तो उनका देश अमेरिका को पीछे छोड़ने के रास्ते पर बढ़ रहा है.
ब्राज़ील में ऐसे हालात कैसे बने?
लेकिन सवाल ये उठता है कि मध्य आय वर्ग के देश ब्राज़ील, जहाँ बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण की व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, वहाँ ये हालात कैसे पैदा हुए?
कई लोग मानते हैं कि इसके लिए ब्राज़ील के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ज़िम्मेदार हैं.
सिडा कहती हैं, "वे सही क़दम उठाकर सबकी मदद कर सकते हैं. लेकिन उन्होंने इसके विपरीत काम किया. उनके मन में लोगों के प्रति कोई सम्मान नहीं है. ये काफ़ी घिनौना है."
ऐसे समय जब ब्राज़ील में कोरोना का कहर जारी है, तभी ब्राज़ील सीनेट इस आपदा को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए क़दमों की समीक्षा कर रहा है.
बीते अप्रैल में शुरू हुई इस समीक्षा से जुड़ी सुनवाई का लाइव प्रसारण किया जा रहा है.
ऐसे में ज़्यादातर लोगों के लिए ये एक बेहद ज़रूरी टीवी प्रसारण बन गया है. ये त्रासदी और धमाकेदार बयानबाज़ी से भरी टीवी सिरीज़ देखने जैसा हो गया है.
वैक्सीन निर्माता कंपनी फ़ाइज़र के प्रतिनिधि का बयान काफ़ी धमाकेदार रहा. उन्होंने समीक्षकों को बताया कि पिछले साल उनकी कंपनी ने सरकार को बार-बार वैक्सीन बेचने से जुड़ा प्रस्ताव भेजा.
कई महीनों तक इसे अनदेखा किया गया. लगभग 100 ईमेल्स का जवाब नहीं दिया गया.
सुनवाई के दौरान एक गवाह ने राष्ट्रपति बोलसोनारो पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने भारत से एक ऐसी वैक्सीन, जिसे मंज़ूरी भी नहीं मिली है, उसे बेहद ऊँची क़ीमत और भारी अनियमितताओं के साथ ख़रीदे जाने के अनुबंध की ओर ध्यान दिया.
राष्ट्रपति बोलसोनारो ने इस बारे में कोई जानकारी होने और किसी तरह की अनियमितताएँ बरते जाने से इनकार किया है.
वैक्सीन न मंगवाने को लेकर हंगामा
ये सुनवाई विपक्षी पार्टी के क़द्दावर नेता सीनेटर उमर अज़ीज़ कर रहे हैं, जो बुरी तरह कोरोना की मार झेल रहे प्रदेश अमेजोनास से आते हैं. अज़ीज़ संसद में भी गुज़रते हुए कोरोना नियमों का ध्यान रखते हुए लोगों से हाथ मिलाने की जगह मुट्ठी मिलाते हैं.
अज़ीज़ ने इस महामारी में अपने भाई वालिद को खोया है. जब हमारी मुलाक़ात हुई, उसी दिन उन्होंने अपने एक बहुत पुराने दोस्त को खो दिया.
अज़ीज़ कहते हैं, "ब्राज़ीली लोगों की बाँहों में बस दो टीके ज़िंदगियाँ बचा सकते हैं. अगर सरकार ने वैक्सीन जल्दी मंगवा ली होती, तो हम कई ज़िंदगियाँ बचा सकते थे. हमारे राष्ट्रपति विज्ञान में नहीं बल्कि हर्ड इम्यूनिटी में भरोसा रखते हैं."
अज़ीज़ जोर देकर कहते हैं कि ये सुनवाई पक्षपातपूर्ण कार्रवाई नहीं है. वह कहते हैं, "वायरस राजनीतिक पार्टियों को नहीं चुनता है. सभी मर रहे हैं."
महामारी की शुरुआत से ब्राज़ील के राष्ट्रपति बोलसोनारो कोविड-19 के प्रति गंभीर रुख नहीं दिखा रहे थे. वे इसे एक हल्का बुख़ार बता रहे थे. पिछले साल जब उनसे कोविड-19 से मरने वालों की संख्या को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि "ये सवाल क़ब्रें खोदने वाले के लिए है."
उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था चलती रहनी चाहिए और 'मूर्ख लोग' घर पर रहते हैं.
पिछले साल अपने समर्थकों के साथ एक मोटर बाइक रैली में मास्क न पहनने की वजह से उन पर जुर्माना लगाया गया था.
'ब्राज़ील ने वो किया जो नहीं करना था'
राष्ट्रपति बोलसोनारो जहाँ इस महामारी को कमतर करके देख रहे थे. वहीं, प्रोफ़ेसर पेद्रो हलाल इस महामारी से मरने वालों की गिनती कर रहे हैं.
वह एक महामारी विशेषज्ञ हैं, जो ब्राज़ील में कोविड-19 पर हो रहे सबसे बड़े अध्ययन का नेतृत्व कर रहे हैं.
एक वैज्ञानिक और एक ब्राज़ीली होने के नाते वह इसे एक बुरा सपना कहते हैं.
वह कहते हैं, "ज़िंदगी में कभी न कभी आप एक ऐसा सपना देखते हैं, जिसमें आप हिल नहीं पाते, कुछ बोल नहीं पाते हैं. पिछले 16 महीनों में मेरी हालत यही है. मुझे इस बात की ट्रेनिंग मिली हुई है कि एक महामारी में क्या क्या होता है और मैं ये कह रहा हूँ कि सरकार में कोई कुछ सुन नहीं रहा है. आज जब हम बात कर रहे हैं तब कुछ अन्य 2000 ब्राज़ीली लोग मर जाएँगे."
इस महामारी में अपने कई दोस्तों को खो देने वाले प्रोफेसर हलाल कहते हैं कि उनका देश हर उस क़दम के लिए एक प्रयोगशाला रहा है, जो एक महामारी में ग़लत ढंग से उठाया जा सकता है.
बोलसोनारो के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन
उनके अध्ययन के मुताबिक़, इसका परिणाम चार लाख लोगों की मौत है, जिन्हें बचाया जा सकता था. इनमें से एक लाख लोगों की मौत की वजह पिछले साल समय से वैक्सीन कॉन्ट्रेक्ट न किए जाने की वजह से हुई है.
वह कहते हैं, "हर वो काम जो आपको नहीं करना चाहिए, ब्राज़ील ने किया है."
"ये कहा गया था कि महामारी का कोई महत्व नहीं होगा. बीते साल अप्रैल में, हमारे राष्ट्रपति ने कहा था कि ये ख़त्म होने जा रही है. इसके बाद उन्होंने कहा कि वैक्सीन सुरक्षित नहीं हैं. राष्ट्रपति की ओर से आए इन बयानों ने नुक़सान पहुँचाया है. इससे लोगों की जानें गई हैं. और ये स्पष्ट रूप से कहने की ज़रूरत है."
इस सुनवाई में सबूत देने वाले प्रोफेसर हलाल के पास ब्राज़ील के राष्ट्रपति के लिए एक संदेश है.
वह कहते हैं, "आप अपनी नौकरी छोड़ दें. आप ब्राज़ील के लिए सबसे अच्छा काम यही कर सकते हैं."
हालाँकि, ऐसा होने की उम्मीद काफ़ी कम है, लेकिन जायर बोलसोनारो कई मोर्चों पर दबाव झेल रहे हैं.
सीनेट की सुनवाई से उनके ख़िलाफ़ महाभियोग लाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना नहीं है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक जाँच के आदेश दिए हैं.
उनकी अप्रुवल रेटिंग्स सबसे निचले स्तर पर हैं और पिछले दिनों में लगातार कई राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किए हैं.
क्या कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ने या विरोधी स्वरों के तेज़ होने से राष्ट्रपति बोलसोनारो परेशान हो रहे हैं.
फ़िलहाल उन्होंने इसके कोई संकेत नहीं दिए हैं. उनके राजनीतिक सहयोगी और कट्टर समर्थक उनके साथ हैं.
ब्राज़ील में इतने लोगों की मौत होने के बाद भी बोलसोनारो को राष्ट्रपति पद पर देखकर सिडा अचरज में पड़ जाती हैं.
वह कहती हैं, "वह अभी भी सत्ता के शीर्ष पर हैं, जैसे कि कुछ हुआ ही न हो. उन्हें हटा दिया जाना चाहिए था. मैं सुनना चाहती हूँ कि बोलसोनारो अब ब्राज़ील के राष्ट्रपति नहीं हैं."
अपने परिवारों को खोने वाले कई लोगों की तरह सिडा भी उम्मीद कर रही हैं कि ब्राज़ील के मृत लोग बोलेंगे और अगले साल चुनाव के दौरान उनकी आवाज़ बुलंद होगी, अगर उससे पहले नहीं.
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