लाइव, ईरान के साथ बातचीत बेनतीजा रहने पर रूसी राजनयिक ने अमेरिका से ये कहा

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में रूस के प्रतिनिधि ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सवाल किया है.

सारांश

लाइव कवरेज

सुमंत सिंह,चंदन कुमार जजवाड़े

  1. ईरान के साथ बातचीत बेनतीजा रहने पर रूसी राजनयिक ने अमेरिका से ये कहा

    मिखाइल उल्यानोव

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    इमेज कैप्शन, मिखाइल उल्यानोव ने पूछा है कि क्या अमेरिकी उपराष्ट्रपति कुछ ही घंटों में इस जटिल मुद्दे के समाधान की उम्मीद कर रहे थे (फ़ाइल फ़ोटो)

    इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में रूस के प्रतिनिधि ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सवाल किया है.

    आईएईए में रूस के प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने ईरान के साथ समझौता न होने के बारे में जेडी वेंस की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा, "क्या उपराष्ट्रपति को वास्तव में उम्मीद थी कि इतने जटिल और बहुआयामी मुद्दे पर कुछ ही घंटों में समझौता हो जाएगा?"

    एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि समझौता तभी संभव है जब एक पक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हो (जो इस मामले में नहीं है).

    उल्यानोव ने आगे कहा, "अगर अमेरिकी पक्ष समझौता चाहता है, तो उसे विशेषज्ञ स्तर पर कई दौर की बातचीत के लिए तैयार रहना होगा. कूटनीति में यह एक बुनियादी प्रक्रिया है."

    इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है.

    उन्होंने कहा, ''हम यहां से एक बहुत ही आसान प्रस्ताव देकर जा रहे हैं कि यही हमारा अंतिम और बेस्ट ऑफ़र है. हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं."

    इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, "हम 21 घंटे से इस पर हैं लेकिन बुरी ख़बर ये है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके."

  2. हैती के एक टूरिस्ट स्पॉट पर भगदड़ में कम से कम 30 लोगों के मारे जाने की आशंका, माया डेविस

    हैती किला

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    इमेज कैप्शन, यह हादसा हैती के उत्तर में बने क़िले के पास हुआ है (फ़ाइल फ़ोटो)

    हैती के एक मशहूर टूरिस्ट स्पॉट पर शनिवार को हुई भगदड़ में कम से कम 30 लोगों के मारे जाने की आशंका है.

    हैती के नॉर्ड डिपार्टमेंट के सिविल प्रोटेक्शन के प्रमुख जीन हेनरी पेटिट ने बताया कि यह घटना शनिवार को लाफेरियर सिटाडेल (जो एक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है) में सालाना ईस्टर जमावड़े के दौरान हुई.

    उन्होंने चेतावनी दी कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है.

    प्रधानमंत्री एलिक्स डिडिएर फिल्स-एम ने कहा कि यह घटना उत्तरी शहर मिलोट में "एक टूरिस्ट इवेंट के दौरान हुई, जिसमें कई युवा शामिल थे."

    उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए "सभी संबंधित अधिकारियों" को तैनात कर दिया गया है.

    स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि 19वीं सदी के इस क़िले की स्थापना की याद में आयोजित इस इवेंट का सोशल मीडिया पर प्रचार किए जाने के बाद, यहाँ छात्रों और पर्यटकों की भारी भीड़ जुटी थी.

    बताया जा रहा है कि भगदड़ की शुरुआत इसके एन्ट्री गेट के पास हुई थी और भारी बारिश शुरू होने से स्थिति और भी बिगड़ गई.

    सिटाडेल लाफेरियर, जिसे सिटाडेल हेनरी के नाम से भी जाना जाता है, का निर्माण क्रांतिकारी हेनरी क्रिस्टोफ ने हैती को फ्रांस से आज़ादी मिलने के कुछ ही समय बाद करवाया था.

    इस क़िले को बनाने में एक दशक से भी ज़्यादा का समय लगा था और यह कैरिबियन सागर में स्थित इस नए द्विपीय देश को हमलों से बचाने के लिए बनाए गए कई किलों का एक अहम हिस्सा था. तब से यह जगह हैती की आज़ादी का प्रतीक बन गई है.

  3. भारतीय इलाक़े को चीन की ओर से नया नाम देने पर विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति

    रणधीर जायसवाल

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    इमेज कैप्शन, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के क़दम को आपसी रिश्ते को बिगाड़ने वाला बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    भारत ने चीन की ओर से उन जगहों का नया नाम देने पर कड़ी आपत्ति जताई है जो भारत का हिस्सा हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुद्दे पर भारत का बयान साझा किया है.

    इस संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत, चीन की ओर से उन जगहों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को पूरी तरह से ख़ारिज करता है, जो भारतीय क्षेत्र का हिस्सा हैं."

    विदेश मंत्रालय ने कहा, "झूठे दावे करने और मनगढ़ंत बातों वाले चीन के ऐसे प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश समेत ये जगहें और क्षेत्र हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और हमेशा रहेंगे."

    "चीन की ओर से की गई ये हरकतें, भारत-चीन के आपसी संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के लिए चल रहे प्रयासों को कमज़ोर करने वाली हैं. चीन को ऐसी हरकतों से बचना चाहिए, जो संबंधों को बिगाड़ती हैं और आपसी समझ को बेहतर बनाने के प्रयासों को नुक़सान पहुँचाती हैं."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास एक नया ज़िला बनाया है.

    सेनलिंग नाम का यह ज़िला, काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है, जो इसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है.

    पीटीआई का कहना है, "पिछले साल भारत ने हीन और हेकांग ज़िलों के निर्माण को लेकर चीन के सामने विरोध दर्ज कराया था. भारत ने कहा था कि इन ज़िलों का कुछ इलाक़ा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अधिकार क्षेत्र में आता है."

    "हीन ज़िले में विवादित अक्साई चिन पठार का एक बड़ा हिस्सा शामिल है. यह लद्दाख का वह हिस्सा है जिस पर चीन ने 1962 के युद्ध में कब्ज़ा कर लिया था, और तब से यह भारत-चीन सीमा विवाद का एक मुख्य मुद्दा बना हुआ है."

  4. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने फ़ारस की खाड़ी को कहा अरब की खाड़ी, ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

    पीट हेगसेथ

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 'अरब की खाड़ी' शब्द का इस्तेमाल किया था

    अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से 'फ़ारस की खाड़ी' के लिए 'अरब की खाड़ी' शब्द के प्रयोग पर ईरानी अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

    ईरान के उपराष्ट्रपति अब्दुलकरीम होसैनज़ादेह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "अलेक्जेंडर और मंगोलों के सेनापति भी फ़ारस की खाड़ी का 2500 साल पुराना नाम नहीं बदल सके, आप एक कप्तान से ज़्यादा कुछ नहीं हैं."

    होसैनज़ादेह ने लिखा है, "क्या आप अपनी युद्ध भड़काने वाली परियोजना की नाकामी को लेकर चिंतित हैं? क्या आप अरब देशों का शोषण करना चाहते हैं? आपसे नहीं, लेकिन मैं अपने अरब भाइयों से यह उम्मीद करता हूँ कि वे अपना पैसा ऐसे व्यक्ति के भ्रम पर ख़र्च न करें जो उनकी रक्षा नहीं कर सकता."

    इससे पहले ऑस्ट्रिया के वियना स्थित ईरानी दूतावास ने भी अमेरिकी रक्षा मंत्री के एक्स पोस्ट में "अरब खाड़ी" शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त की.

    दूतावास ने लिखा, "यह कोई संयोग नहीं है कि पीट हेगसेथ को ईरान के विरुद्ध युद्ध में और ख़ासकर होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर, करारी हार का सामना करना पड़ा. उनकी मुख्य समस्या ये थी कि उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट को ग़लत जगह पर खोजा."

    "उन्हें यह नहीं पता था कि वह फ़ारस की खाड़ी में स्थित है. हमारी विनम्र सलाह है कि वे हर सुबह दस बार 'फ़ारस की खाड़ी' दोहराएं. इससे शायद उन्हें अगला युद्ध जीतने में मदद न मिले, लेकिन कम से कम वे सही जगह पर तो पहुंच जाएंगे."

    इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक्स पर सेंटकॉम (अमेरिकी सेंट्रल कमांड) का एक बयान साझा किया और उसके एक अंश का ज़िक्र करते हुए लिखा, "विध्वंसक पोत यूएसएस फ्रैंक ई पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी अरब की खाड़ी में एक व्यापक मिशन के हिस्से के रूप में काम कर रहे हैं."

    उन्होंने लिखा, "इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना है कि यह जलमार्ग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की बिछाई गई समुद्री माइन्स को ख़त्म करना है."

    हालाँकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे से इनकार किया है.

  5. ईरान और अमेरिका की बातचीत बेनतीजा रहने पर ब्रिटेन के पीएम ने की ये अपील

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर

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    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अमेरिका-ईरान बातचीत के नाकाम रहने के बाद अपनी सलाह दी है (फ़ाइल फ़ोटो)

    इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मध्य पूर्व के हालात को लेकर संदेह बना हुआ है.

    शांति वार्ता की नाकामी के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अमेरिका और ईरान से 'कोई रास्ता निकालने' की अपील की है.

    डाउनिंग स्ट्रीट ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ईरान और अमेरिका दोनों से अपील की है कि वे "कोई रास्ता निकालें."

    ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत में स्टार्मर ने कहा कि सीज़फ़ायर जारी रहना "बेहद ज़रूरी" है और "सभी पक्षों ने आगे किसी भी तरह के तनाव से बचने की कोशिश की है."

    ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटफ़ोर्ड ने बीबीसी के 'संडे विद लॉरा कुएन्सबर्ग' कार्यक्रम में कहा कि ईरान में युद्ध ख़त्म करने के लिए शुरुआती बातचीत का बिना किसी समझौते के टूट जाना "निराशाजनक" है.

    स्ट्रीटफ़ोर्ड ने इस संघर्ष में शामिल न होने के ब्रिटेन के फ़ैसले का बचाव किया.

    इससे पहले पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई.

    इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अपने-अपने देश रवाना हो चुके हैं.

  6. 'होर्मुज़ ईरान के क़ब्ज़े में है और इसका टोल टैक्स तो चुकाना ही होगा'- ईरान

    होर्मुज़ स्ट्रेट

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    इमेज कैप्शन, होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण उसके लिए एक ताक़त बनकर उभरा है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका और ईरान के बीच लागू सशर्त संघर्षविराम का एक मुख्य हिस्सा, इस समुद्री रास्ते से जहाज़ों का सुरक्षित गुज़रना रहा है. यह दोनों पक्षों के लिए एक अहम मुद्दा है.

    इस समुद्री मार्ग से आम दिनों में दुनिया का क़रीब 20% तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) गुज़रता है.

    ईरान की संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा है कि यह स्ट्रेट ईरान के लिए एक 'अति संवेदनशील सीमा' है.

    'इस्लामिक प्रोपेगेशन ऑर्गनाइज़ेशन' से जुड़ी 'मेहर न्यूज़ एजेंसी' के मुताबिक़ बाबाई का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह से ईरान के कब्ज़े में है और "इसका शुल्क रियाल में ही चुकाना होगा."

    रियाल ईरान की मुद्रा है.

    इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट "जल्द ही खुल जाएगा."

    अमेरिका की 'सेंट्रल कमांड' ने भी शनिवार को बताया कि नौसेना के दो विध्वंसक जहाज़ों ने, जलमार्ग को समुद्री सुरंगों (सी माइन्स) से मुक्त कराने के एक बड़े अभियान के तहत, "होर्मुज़ को पार किया है."

    लेकिन ईरान ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया है कि ये दोनों जहाज़ उस इलाक़े से गुज़रे थे.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी ने ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के हवाले से बताया, "ईरान के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' ने कहा है कि किसी भी सैन्य जहाज़ के होर्मुज़ से गुज़रने की कोशिश का सख़्ती से जवाब दिया जाएगा."

    शनिवार को ईरान ने दावा किया कि उसकी कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिका का एक विध्वंसक जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से वापस लौट गया.

    इधर पाकिस्तान में ईरान के साथ घंटों चली बातचीत के बाद हुई अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने होर्मुज़ स्ट्रेट का ज़िक्र नहीं किया.

  7. अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत कैसे आगे बढ़ी थी और अंत में क्या हुआ?, जैकब फ़िलिप्स, रिपोर्टर

    जेडी वेंस

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अपने देश के लिए रवाना हो गया है

    पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई. हालाँकि दोनों देशों के बीच कोई बातचीत हो पाएगी या नहीं, इसे लेकर भी शुरू से संदेह बना हुआ था.

    अनिश्चितता का दौर

    शुक्रवार को जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सड़कें साफ़ की गईं और वहाँ सुरक्षा बढ़ाई गई थी, तब भी इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी कि क्या अमेरिका-ईरान शांति वार्ता आगे बढ़ पाएगी या नहीं.

    फिर इस मामले में हमें हलचल दिखाई देने लगी. शुक्रवार की आधी रात को ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँचा. उनका स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने किया.

    इसके बाद शनिवार सुबह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 'एयर फ़ोर्स टू' विमान से उतरे तो डार और मुनीर ने उनसे मुलाक़ात की.

    अलग-अलग और आमने-सामने की बातचीत

    इसके बाद दोनों पक्षों ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाक़ात की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि वे "रचनात्मक रूप से बातचीत करेंगे."

    फिर पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने बीबीसी को बताया और बाद में व्हाइट हाउस ने भी इसकी पुष्टि की कि इस्लामाबाद में आमने-सामने की त्रिपक्षीय बातचीत चल रही थी.

    देर रात तक चली बातचीत

    इस शांति वार्ता में दोनों पक्ष पूरी रात बातचीत में व्यस्त रहे, और इसके बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक की गई.

    पाकिस्तान पहुंचे ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तस्वीर

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान पहुंचे ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तस्वीर

    नतीजा क्या रहा?

    रविवार सुबह पाकिस्तान में ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने एक बयान जारी किया.

    इस बयान में बातचीत को "गहन (इन्टेंसिव)" बताया गया और अमेरिका से "अत्यधिक मांगों और गैरकानूनी अनुरोधों" को छोड़ने का आग्रह किया गया.

    इसके कुछ ही देर बाद उपराष्ट्रपति वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि अमेरिका ने अपनी 'सीमाएं' साफ़ कर दी थीं, लेकिन ईरान उसकी शर्तों पर सहमत नहीं हुआ.

    रविवार को दोनों प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं.

  8. नमस्कार!

    अब तक बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

  9. नेतन्याहू की अर्दोआन पर टिप्पणी के बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान

    नेतन्याहू और अर्दोआन

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    इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अर्दोआन पर लगाए गए आरोपों को 'बेबुनियाद और झूठा' बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पर टिप्पणी की है. इसके बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर नेतन्याहू पर निशाना साधा है.

    नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा, "इसराइल मेरे नेतृत्व में ईरान के आतंकवादी शासन और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेगा. जबकि अर्दोआन उनका समर्थन करते हैं और अपने ही कुर्द नागरिकों का जनसंहार किया."

    इस पर तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अर्दोआन पर लगाए गए आरोपों को 'बेबुनियाद और झूठा' बताया है.

    तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा, "हमारे राष्ट्रपति पर इसराइली अधिकारियों की ओर से लगाए गए बेबुनियाद और झूठे आरोप उन सच्चाइयों से पैदा हुई असहजता का नतीजा हैं, जिन्हें हम हर मंच पर लगातार उठाते रहे हैं."

    बयान में आगे कहा गया, "तुर्की निर्दोष नागरिकों के साथ खड़ा रहेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा कि नेतन्याहू उनके किए गए अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराए जाएं."

    इसके अलावा तुर्की के विदेश मंत्रालय ने नेतन्याहू को 'इस दौर का हिटलर' भी कहा है.

  10. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बोले, 'दो-तीन मुद्दों पर अमेरिका से नहीं बन पाई सहमति'

    इस्माइल बक़ाई

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    इमेज कैप्शन, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह नहीं बताया है कि किन मुद्दों पर अमेरिका के साथ सहमति नहीं बन सकी (फ़ाइल फ़ोटो)

    बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा है कि अमेरिका के साथ 'दो-तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर असहमति' की वजह से समझौता नहीं हो पाया.

    इस्माइल बक़ाई ने ईरान न्यूज़ नेटवर्क को बताया, "पाकिस्तान की मध्यस्थता से 24 से 25 अप्रत्यक्ष वार्ताएं हुईं और कुछ मामलों में हम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ एक समझौते पर पहुंचे, लेकिन दो या तीन मामलों में विचार अलग थे और हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके."

    हालाँकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि किन मुद्दों पर अमेरिका के साथ सहमति नहीं बन सकी.

    उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि क्षेत्र और होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे नए मुद्दों के जुड़ने से बातचीत और अधिक जटिल हो गई है और यह उम्मीद नहीं है कि एक दिन में कोई समझौता हो पाएगा.

    इससे पहले बीबीसी फ़ारसी सेवा ने इस्माइल बक़ाई के एक अन्य बयान को रिपोर्ट किया.

    बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़, इस्माइल बक़ाई ने कहा कि अमेरिका से बातचीत "अविश्वास के माहौल" में शुरू हुई और एक ही बैठक में समझौते पर पहुँचने की संभावना बहुत कम थी.

    उन्होंने कहा, "ये वार्ताएं 40 दिनों के युद्ध के बाद अविश्वास और संदेह के माहौल में हुईं. स्वाभाविक रूप से, यह उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि केवल एक बैठक में समझौता हो जाएगा. किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी."

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ईरान, पाकिस्तान और क्षेत्र के "अन्य मित्रों" के बीच संपर्क और बातचीत जारी रखेगा.

    उन्होंने आगे कहा कि "कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती, यह देश के हितों की रक्षा का एक ज़रिया है."

  11. अमेरिका के बाद ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी पाकिस्तान से रवाना हुआ

    बग़र ग़ालिबाफ़ और शहबाज़ शरीफ़

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    इमेज कैप्शन, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से भी मुलाक़ात की

    ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक़, ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से रवाना हो गया है.

    यह प्रतिनिधिमंडल ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बग़र ग़ालिबाफ़ के नेतृत्व में इस्लामाबाद आया हुआ था और स्थानीय समयानुसार सुबह क़रीब 9 बजे के बाद रवाना हुआ.

    अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी शांति वार्ता में समझौता नहीं होने के बाद इस्लामाबाद से लौट चुका है.

    अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में पाकिस्तान आया हुआ था.

  12. डोनाल्ड ट्रंप इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की वार्ता के दौरान क्या कर रहे थे?

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरान से वार्ता के दौरान उनकी ट्रंप से "लगातार" बात हो रही थी

    जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही थी, उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मियामी में एक यूएफ़सी फ़ाइट का आनंद ले रहे थे.

    ट्रंप के साथ उनके परिवार के कई सदस्य और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद थे.

    इधर, इस्लामाबाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान से बातचीत कर रहा था.

    वार्ता के बाद वेंस ने कहा कि पाकिस्तान में चल रही बातचीत के दौरान उनकी ट्रंप से "लगातार" बात हो रही थी.

    वेंस ने कहा, "पिछले 21 घंटों में हमने उनसे कितनी बार बात की, यह कहना मुश्किल है, शायद आधा दर्जन या एक दर्जन बार."

    उन्होंने कहा, "हम लगातार टीम के संपर्क में थे, क्योंकि हम अच्छी मंशा से बातचीत कर रहे थे."

    डोनाल्ड ट्रंप और मार्को रुबियो

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप को फ़ाइट के दौरान रुबियो और यूएफ़सी के सीईओ डेना व्हाइट के साथ देखा गया
    यूएफ़सी में डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, फाइट के दौरान ट्रंप को जंबोट्रॉन पर भी दिखाया गया
    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप अपने परिवार के सदस्यों के साथ फ़ाइट देखने पहुँचे, उनकी बेटी इवांका भी उनके पीछे बैठी नज़र आईं
  13. प्रधानमंत्री मोदी ने आशा भोसले के स्वास्थ्य पर जताई चिंता, क्या कहा?

    नरेंद्र मोदी

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    इमेज कैप्शन, आशा भोसले मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मशहूर सिंगर आशा भोसले को अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर चिंता जताई है और उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की है.

    पीएम मोदी ने रविवार को एक्स पर लिखा, "आशा भोसले जी के अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर सुनकर गहरी चिंता हुई है. उनके अच्छे स्वास्थ्य और जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ."

    आशा भोसले को शनिवार को कार्डियक अरेस्ट आया था. इसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

    92 वर्षीय आशा भोसले का इलाज अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज़ यूनिट में चल रहा है.

  14. अमेरिका-ईरान के बीच अगले दौर की बातचीत के बारे में ईरानी सरकारी मीडिया ने क्या बताया

    आसिम मुनीर, जेडी वेंस और इसहाक़ डार

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    इमेज कैप्शन, ईरानी समाचार एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिका से बातचीत के दौरान ईरान ने बार-बार अपने प्रस्ताव रखे

    बीबीसी उर्दू सेवा के मुताबिक़, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ हुई बातचीत के मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया है.

    तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार, इस्लामाबाद पहुँचने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख से कम से कम दो बार और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से एक बार मुलाक़ात की.

    ये बैठकें ज़रूरी व्यवस्थाओं और वार्ता की शुरुआत में अमेरिका की ओर से किए गए वादे के उल्लंघन के ख़िलाफ़ औपचारिक विरोध दर्ज कराने के लिए हुईं.

    ईरानी समाचार एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिका से बातचीत के दौरान ईरान ने बार-बार अपने प्रस्ताव रखे और अमेरिकी पक्ष को वास्तविकता की ओर लाने की कोशिश की.

    ईरानी समाचार एजेंसी ने कहा, "हालांकि, हर स्तर पर अमेरिका की अत्यधिक मांगों ने एक साझा ढांचे तक पहुंचने में अड़चन पैदा की. अमेरिकी रुख़ में लचीलेपन की कमी के कारण रविवार, 12 अप्रैल को वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई."

    रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगले दौर की वार्ता के समय, स्थान और प्रक्रिया के संबंध में अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है.

    इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका रवाना होने से पहले एक संक्षिप्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके. हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं और ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया है."

    उन्होंने यह भी कहा, "मुझे लगता है कि हमने काफ़ी लचीलापन दिखाया. राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे कहा था कि आपको अच्छी मंशा के साथ (बातचीत में) जाना होगा और समझौते तक पहुंचने के लिए पूरी कोशिश करनी होगी. हमने ऐसा किया, लेकिन दुर्भाग्य से कोई प्रगति नहीं हुई."

  15. इस्लामाबाद वार्ता असफल रही लेकिन पाकिस्तान ने सीज़फ़ायर के बारे में क्या कहा

    इसहाक़ डार

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान ने कहा कि वह आने वाले दिनों में भी अमेरिका और ईरान के मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत असफल रही है. वार्ता समाप्त होने के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक़ डार का एक बयान जारी किया गया है.

    इसमें इसहाक़ डार ने अमेरिका और ईरान से अपील करते हुए कहा है कि "यह अनिवार्य है कि दोनों पक्ष युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखें."

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक्स हैंडल से किए गए पोस्ट में कहा गया, "हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष सकारात्मक भावना के साथ आगे बढ़ेंगे, जिससे कि पूरे क्षेत्र और उससे आगे स्थायी शांति और समृद्धि हासिल की जा सके."

    पोस्ट के अंत में पाकिस्तान ने कहा कि वह आने वाले दिनों में भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा.

  16. अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा: पाकिस्तानी विदेश मंत्री

    जेडी वेंस, इसहाक़ डार और आसिम मुनीर

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान "सकारात्मक भावना" से बात करना जारी रखेंगे

    अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर बातचीत असफल होने के बाद पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.

    बीबीसी उर्दू सेवा के मुताबिक़, ''प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसहाक़ डार ने बताया कि इस बातचीत में उन्होंने और पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने "दोनों पक्षों के बीच कई दौर की कठिन और सार्थक बातचीत में मध्यस्थता करने की कोशिश की" और यह बातचीत रविवार सुबह तक जारी रही.''

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान "सकारात्मक भावना" से बात करना जारी रखेंगे, जिससे कि क्षेत्र और उससे परे स्थायी शांति और समृद्धि हासिल की जा सके.

    उन्होंने आगे यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहेगा.

  17. जेडी वेंस ने बताया, इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान ट्रंप से कितनी बार हुई बात

    जेडी वेंस

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    इमेज कैप्शन, ईरान से बातचीत के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो चुका है

    अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान से बातचीत के बाद एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि दोनों देश समझौते की स्थिति तक नहीं पहुँच सके हैं.

    उन्होंने यह भी बताया कि ईरान से वार्ता के दौरान वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लगातार संपर्क में रहे.

    उन्होंने कहा कि ट्रंप ईरान से बातचीत में शामिल थे और उन्होंने इस दौरान राष्ट्रपति से "आधे दर्जन" से लेकर "एक दर्जन" बार बात की.

    जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने एक बहुत ही आसान प्रस्ताव दिया है और यही "अंतिम और बेस्ट ऑफ़र है".

    उन्होंने कहा, "हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं."

  18. इस्लामाबाद में ईरान से समझौते पर बात नहीं बनने के बाद जेडी वेंस पाकिस्तान से रवाना हुए

    जेडी वेंस

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    इमेज कैप्शन, जेडी वेंस अपने 'एयर फोर्स टू' विमान से पाकिस्तान से रवाना हुए

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी टीम ईरान से समझौते पर सहमति नहीं बन पाने के बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से रवाना हो गए हैं.

    वह अपने 'एयर फोर्स टू' विमान से रवाना हुए और अमेरिका वापस लौट रहे हैं.

    बीबीसी उर्दू के संवाददाता शहजाद मलिक से पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के रवाना होने की पुष्टि की है.

    इस्लामाबाद से उड़ान भरने से पहले जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि क़रीब 21 घंटे चली बातचीत के बावजूद अमेरिका और ईरान किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके.

    ईरान की ओर से भी इस वार्ता को लेकर बयान आया है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि अमेरिका को अपनी 'अत्यधिक मांगों' से बचना चाहिए.

  19. ईरान ने अमेरिका से शांति वार्ता पर जारी किया बयान, 'अत्यधिक मांगों' से बचने की अपील की

    इस्माइल बक़ाई

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    इमेज कैप्शन, ईरानी विदेश मंत्रालय का बयान आने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं हो पाया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता की स्थिति पर एक बयान जारी किया है.

    सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में बक़ाई ने बातचीत को "गहन" बताया, लेकिन कहा कि जारी वार्ताओं की सफलता "विरोधी पक्ष की गंभीरता और अच्छी मंशा पर निर्भर करती है".

    बक़ाई ने अमेरिका से "अत्यधिक मांगों और ग़ैरक़ानूनी अनुरोधों" से बचने और ईरान के "वैध अधिकारों और हितों" को स्वीकार करने की अपील भी की.

    उन्होंने वार्ता के दौरान होर्मुज़ स्ट्रेट, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और "ईरान में युद्ध का पूरी तरह अंत" जैसे मुद्दों पर चर्चा का ज़िक्र किया.

    ईरान के इस बयान के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं हो पाया है.

  20. इस्लामाबाद वार्ता: जेडी वेंस ने ईरान से समझौते के बिना ही पाकिस्तान छोड़ने की कही बात

    जेडी वेंस

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    इमेज कैप्शन, जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका 'अच्छी मंशा' से बातचीत के लिए आया था

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ चल रही ऐतिहासिक शांति वार्ता को लेकर एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की है.

    उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी बातें स्पष्ट तौर पर रख दी हैं, लेकिन ईरान "हमारी शर्तों पर सहमत नहीं हुआ".

    उन्होंने कहा, "हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके, जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करते."

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे से बातचीत चल रही है, लेकिन "बुरी ख़बर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं."

    इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रति आभार जताते हुए कहा, "अगर बातचीत में कोई कमी रही, तो वह पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थी. उन्होंने बेहतरीन काम किया."

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए लचीलेपन और "अच्छी मंशा" के साथ आया था, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके.

    उन्होंने कहा, "हम यहां से एक बहुत सामान्य प्रस्ताव के साथ जा रहे हैं, यह समझ के साथ कि यही हमारा अंतिम और सबसे बेहतर प्रस्ताव है. अब देखना होगा कि ईरान इसे स्वीकार करता है या नहीं."

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